ACR संभालना सरकार का काम, कर्मचारी का नहीं": झारखंड हाईकोर्ट ने विभाग के तर्क को किया खारिज

Published by :Sameer Oraon
Published at :28 Apr 2026 8:36 PM (IST)
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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट की तस्वीर, Pic Credit- X

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए प्रार्थी किशोर पटेल और मोहम्मद महफूज को उनके जूनियर की तरह ही 30 दिसंबर 2023 से असिस्टेंट इंजीनियर पद पर प्रोन्नति का लाभ देने का निर्देश दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने विभाग के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एसीआर (ACR) उपलब्ध न होने को देरी का कारण बताया गया था.

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Jharkhand High Court, रांची (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रोन्नति (Promotion) से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने प्रार्थी किशोर पटेल और मोहम्मद महफूज की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि उन्हें उनके जूनियर के समान ही 30 दिसंबर 2023 की तिथि से असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रोन्नति का लाभ दिया जाए. अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश का अनुपालन करने और चार सप्ताह के भीतर कोर्ट को सूचित करने का समय दिया है.

जूनियर को मिला लाभ, सीनियर दो साल पीछे रहे

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विभाग ने उनके जूनियर सत्यदेव प्रसाद को तो 30 दिसंबर 2023 को ही असिस्टेंट इंजीनियर बना दिया था, लेकिन किशोर पटेल और मोहम्मद महफूज को सीनियर होने के बावजूद दो साल तक इंतजार कराया गया. विभाग ने आखिरकार उन्हें 26 सितंबर 2025 को प्रोन्नति दी. प्रार्थियों ने दलील दी कि जब जूनियर को लाभ मिल चुका है, तो वे भी उसी तिथि से लाभ पाने के वैधानिक हकदार हैं, क्योंकि वे वरिष्ठता सूची में ऊपर थे.

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ACR उपलब्ध न होना कोई बहाना नहीं: हाईकोर्ट

विभाग की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि संबंधित कर्मचारियों का वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) समय पर उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण उनकी प्रोन्नति में देरी हुई. इस तर्क पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस दीपक रोशन ने स्पष्ट किया कि एसीआर का कस्टोडियन (रक्षक) सरकार होती है, न कि कर्मचारी. अदालत ने कहा कि विभाग द्वारा अपनी फाइलों को न संभाल पाना और उसका आधार बनाकर किसी योग्य कर्मचारी को समय पर पदोन्नति से वंचित करना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है.

अदालत का कड़ा संदेश

अदालत ने माना कि चूंकि जूनियर अधिकारी को पहले ही प्रमोशन का लाभ दिया जा चुका है, इसलिए कानूनन सीनियर को उसी तिथि से काल्पनिक (Notional) या वास्तविक लाभ देने से नहीं रोका जा सकता. इस फैसले से राज्य के अन्य विभागों में भी उन कर्मचारियों को बल मिलेगा जिनके प्रमोशन की फाइलें ‘एसीआर’ या अन्य प्रशासनिक कमियों के नाम पर दफ्तरों में धूल फांक रही हैं. अदालत ने साफ कर दिया कि प्रशासनिक खामियों का दंड कर्मचारियों के करियर को नहीं दिया जा सकता.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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