NFHS आंकड़ों के अनुसार हेल्दी डाइट के प्रति अवेयर हो रहे भारतीय, कोल्ड ड्रिंक्स,जंक फूड को कह रहे बाय-बाय

Updated at : 02 Jun 2022 12:45 PM (IST)
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NFHS आंकड़ों के अनुसार हेल्दी डाइट के प्रति अवेयर हो रहे भारतीय, कोल्ड ड्रिंक्स,जंक फूड को कह रहे बाय-बाय

NFHS Survey Report बताते हैं कि भारतीय हेल्दी डाइट फूड्स के बारे में अवेयर हो रहे हैं. एक ओर जहां भारतीयों में हेल्दी डाइट लेने की आदत बढ‍़ रही है वहीं दूसरी ओर अनहेल्दी फूड्स आइटम्स का सेवन घट रहा है. नॉनवेज खाने में भी भारतीयों का इंट्रेस्ट बढ़ा है लेकिन फल खाने को लेकर अभी भी कोताही बरत रहे हैं.

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NFHS Survey Report: पिछले महीने जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के 2019-21 के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अपने डाइट के प्रति जागरूक हो रहे हैं. एक ओर नॉनवेज फूड की तरफ भारतीयों का इंट्रेस्ट बढ़ा है वहीं कोल्डड्रिंक्स जैसे पेय पीने की आदत कम हो रही है. भारतीय घरों के मेनू में दाल ने प्रमुखता से अपनी जगह बना ली है, लेकिन फल का सेवन कम हो गया है. जानें इस रिपोर्ट की पूरी डिटेल.

जंक फूड आउट हेल्दी फूड इन

आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय पहले की तुलना में तली हुई चीजों और कोल्डड्रिंक्स कम और हेल्दी चीजों का सेवन अधिक कर रहे हैं. नवीनतम सर्वेक्षण में 15-49 आयु वर्ग के लगभग 25% पुरुषों और 16% महिलाओं ने सप्ताह में कम से कम एक बार कोल्डड्रिंक्स का सेवन किया, जो 2015-16 में क्रमशः 32% और 24% था. ज्यादातर लोग कभी-कभार ही तला हुआ खाना पसंद करते हैं, जिसमें केवल 7% महिलाएं और 9% पुरुष ही रोजाना ऐसी चीजों का सेवन करते हैं. इसके विपरीत, महिला और पुरुष अब अधिक बार अंडे और पत्तेदार सब्जियों जैसे हेल्दी फूड्स का सेवन कर रहे हैं. आधे से अधिक पुरुष (58%) वीकली अंडे खाते हैं. आधे से अधिक (52%) महिलाएं अब रोजाना 47% से अधिक, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां खाती हैं. हालांकि, फल की बात करें तो केवल 12% लोगों ने ही कहा कि वे प्रतिदिन फल का सेवन करते हैं.

भारत में नॉन वेज की खपत बढ़ी

मांसाहारी भोजन – मछली, चिकन या मांस – की खपत पूरे भारत में तेजी से बढ़ी है. 2015-16 में 49% की तुलना में अब कम से कम 57% पुरुष ऐसे फूड खाते हैं. इसमें गरीब तबके के लोग करीब 16 प्रतिशत हैं जो सबसे ज्यादा नॉनवेज खाते हैं लेकिन अमीर तबके की बता करें तो सिर्फ 6 प्रतिशत लोग ही हफ्ते में मांस, मछली, अंडे जैसी नॉनवेज चीजों का सेवन करते हैं. इस संबंध में एक्सपर्ट का कहना है कि नॉनवेज खाने के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ने का कारण चिकन और अंडे जैसी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट है.

महिलाओं में प्रोटीन की समस्या

एनएफएचएस डेटा में महिलाओं में प्रोटीन का सेवन कम आंका गया है. इसे मापने के लिए, दूध या दही और अंडे के उपभोग के पैटर्न को देखा गया ये दोनों ही प्रोटीन के सस्ते और सुलभ स्रोत हैं. सर्वे के अनुसार 81% पुरुष अपनी किशोरावस्था में (15-19 वर्ष की आयु) सप्ताह में कम से कम एक बार दूध या दही का सेवन करते हैं, वही महिलाओं में केवल 70% ऐसा करती हैं. सभी आयु समूहों में अंडों के लिए समान गैप मौजूद हैं. चूंकि महिलाएं मछली, चिकन या मांस खाना कम पसंद करती हैं ऐसे में उनका आवेरऑल प्रोटीन इंटेक कम है जो चिंता कारण हो सकता है. हालांकि, तीन दक्षिणी राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में महिलाएं दूध और अंडे दोनों खूब खाती हैं. पश्चिम बंगाल (83%), त्रिपुरा (75%), और सिक्किम (72%) में महिलाओं में साप्ताहिक अंडे की खपत अधिक है. मध्य भारतीय राज्यों में दोनों प्रकार के उत्पादों की खपत कम है.

ग्रामीणों की तुलना में शहरी अधिक खाते हैं हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह के फूड्स

आंकड़ों से पता चलता है कि हाई इनकम लेवल वाले शहर के लोग हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह के फूड्स गांवों की तुलना में अधिक बार खाते हैं. जहां 86 फीसदी शहरी पुरुष कम से कम साप्ताहिक रूप से दूध या दही का सेवन करते हैं, वहीं उनके ग्रामीण समकक्षों में से केवल 77 फीसदी ही ऐसा करते हैं. 66% शहरी पुरुष अक्सर फलों का सेवन करते हैं, लेकिन केवल 51% ग्रामीण पुरुष ही ऐसा करते हैं. दालें और हरी पत्तेदार सब्जियां ग्रामीण और शहरी भारतीयों दोनों के लिए यूनिवर्सल हैं. हालांकि, शहरों में तले हुए फूड और कोल्ड ड्रिंक्स अधिक आम हैं. मांसाहारी भोजन को छोड़कर धनी परिवारों में अक्सर सभी फूड्स आइटम्स खाने की संभावना अधिक होती है. सबसे अमीर 20% भारतीयों में से एक-तिहाई लोग सप्ताह में कम से कम एक बार कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करते हैं, जबकि सबसे गरीब 20% में से एक-छठा हिस्सा होता है.

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युवाओं की तुलना में मध्यम आयु वर्ग में शराब लेने वाले अधिक

सर्वेक्षण से पता चला है कि युवा भारतीयों में मध्यम आयु वर्ग की तुलना में पीने की संभावना काफी कम है. इसके अलावा, पिछले सर्वेक्षण के बाद से शराब ने कुछ अपील खो दी है. 20-34 आयु वर्ग के 12% पुरुष सप्ताह में कम से कम एक बार पीते हैं, 35-49 आयु वर्ग के लोगों में यह हिस्सा बढ़कर 19% हो गया है. महिलाओं में शराब पीना अत्यंत दुर्लभ है, 1% से कम ने कहा कि वे शराब का सेवन करती हैं. अरुणाचल प्रदेश (18%), सिक्किम (15%) और असम (6%) इस मीट्रिक पर शीर्ष तीन राज्य थे. पुरुषों में, गोवा (59%), अरुणाचल प्रदेश (57%) और तेलंगाना (50%) में शराब पीना सबसे आम है. बिहार में तेज गिरावट (29% से 17%) देखी गई, क्योंकि पिछला सर्वेक्षण शराबबंदी नीति से पहले था. अधिक शिक्षा और धन को कम शराब की खपत से जोड़ा जा सकता है. तंबाकू के लिए भी रुझान है: 15-49 आयु वर्ग के लगभग 39% पुरुष किसी भी प्रकार के तंबाकू का उपयोग करते हैं, जो 45% से कम है, और 50-54 आयु वर्ग के पुरुषों के लिए यह हिस्सा बहुत अधिक (53%) है.

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