आज है National Safe Motherhood Day, प्रेगनेंसी में भूलकर ना करें ये गलतियां

National Safe Motherhood Day 2022: हर साल की तरह 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को उनके स्वास्थ्य संबंधी देखभाल और मातृत्व सुविधाओं के विषय में जागरूक करना है.
National Safe Motherhood Day 2022: एक गर्भवती महिला के निधन से ना केवल बच्चों से माँ का आंचल छिन जाता है बल्कि पूरा का पूरा परिवार ही बिखर जाता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की उचित देखभाल और प्रसव संबंधी जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल की तरह 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को उनके स्वास्थ्य संबंधी देखभाल और मातृत्व सुविधाओं के विषय में जागरूक करना है. साथ ही, महिलाओं में एनीमिया (शरीर में खून की कमी) को कम करने, प्रसव संबंधी देखभाल के लिए भी ध्यान केंद्रित करना है.
सुरक्षित मातृत्व का मतलब सभी महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान सुरक्षित और स्वस्थ होने के लिए आवश्यक देखभाल प्राप्त करना सुनिश्चित करना है. राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस जैसे वार्षिक अभियानों का लक्ष्य यही जागरूकता बढ़ाना है कि हर महिला को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जीने और जीवित रहने का अधिकार है.
भारत में हर साल जन्म देते समय तकरीबन 45000 महिलाएं प्रसव के दौरान अपनी जान गंवा देती हैं. यह संख्या दुनिया भर में होने वाली मौतों का करीब 12 प्रतिशत है. देश में जन्म देते समय प्रति 100,000 महिलाओं में से 167 महिलाएं मौंत के मुंह में चली जाती हैं. हालांकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक भारत में मातृ मृत्यु दर में तेजी से कमी आ रही है. देश ने 1990 से 2011-13 की अवधि में 47 प्रतिशत की वैश्विक उपलब्धि की तुलना में मातृ मृत्यु दर को 65 प्रतिशत से ज्यादा घटाने में सफलता हासिल की है.
भारत सरकार ने 1800 संगठनों के गठबंधन व्हाइट रिबन एलायंस इंडिया (डब्ल्यूआरएआइ) के अनुरोध पर साल 2003 में कस्तूरबा गांधी की जन्म वपर्षगांठ 11 अप्रैल को राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में घोषित किया था. आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस घोषित करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है. इस दिन देश भर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है ताकि गर्भवती महिलाओं के पोषण पर सही ध्यान दिया जा सके.
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गर्भवती महिलाओं को या तो कॉफी पीना छोड़ने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे उनके बच्चे बेचैन और चिड़चिड़े होने लगते हैं.
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प्रेग्नेंसी के दौरान ऊंची हील्स नहीं पहननी चाहिए. जब आपका पेट बढ़ता है तो सेंटर ऑफ ग्रैविटी भी बदल जाता है. इस वजह से आपको अपने पैरों पर खड़े होने में दिक्कत आती है.
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कोई भी दवाई लेने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें और उचित सलाह लें.
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पेट या कमर में दर्द हॉट बाथ या सिकाई ना करें. बढ़े तापमान की वजह से पहली तिमाही के दौरान बर्थ डिफेक्ट की समस्या आ सकती है.
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