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क्या प्यार के बदले मिल रहा दर्द, ऐसे ट्रॉमा बॉन्ड रिश्तों के पहचाने संकेत

Updated at : 27 Jul 2023 3:31 PM (IST)
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क्या प्यार के बदले मिल रहा दर्द, ऐसे ट्रॉमा बॉन्ड रिश्तों के पहचाने संकेत

Relationship: प्यार और लगाव आपके रिश्तों की उम्र बढ़ाते हैं ये हेल्दी रिलेशनशिप की बुनियाद को भी मजबूत करते हैं. लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो प्यार देते हैं लेकिन उन्हें उसके बदले सिर्फ दर्द मिलता है. वे साथ खुश नहीं रहते लेकिन अलग भी नहीं हो पाते.

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Relationship: रिश्तों के ताने-बाने में ही हर इंसान की जिंदगी उलझी होती है. कोई इसे सुलझाकर चलता है कोई इसमें चलकर उलझ जाता है. ऐसे भी रिश्ते होते हैं जो आप जानते हैं कि ये अनहेल्दी रिलेशनशिप है लेकिन आप इसमें फंसकर रह जाते हैं. ये ट्रॉमा बॉन्ड कहलाता है. यह तब बढ़ता है, जब कोई व्यक्ति दर्द, मानसिक उत्पीड़न, दुर्व्यवहार से भरे रिश्ते में फंस कर रह जाता है. यह किसी भी संबंधों में हो सकता है, परिवार के किसी भी सदस्यों के साथ हो सकता है लेकिन वैवाहिक जीवन में अपने लाइफपार्टनर के साथ यह ज्यादा होता है. ये ट्रॉमा बॉन्ड तब बनते हैं जब एक व्यक्ति लगातार अपने दूसरे इंसान को चोट पर चोट पहुंचाता है लेकिन अगला शख्स इमोशनली इतना जुड़ा होता है कि वह चाहकर भी दर्द पहुंचाने वाले को छोड़ नहीं पाता है.

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रिश्तों में ट्रामा बॉन्ड सेहत के लिए अच्छे नहीं होते. इसमें आप ऐसे हालात में जी रहे लोगों को देखकर समझ नहीं सकते कि वो खुश है या अंदर से दुखी. क्योंकि वह ऊपर से खुश दिखता क्योंकि वो अपने दर्द को भूलकर रहना चाहता है. अपने लाइफ में आगे बढ़ने के लिए ट्रॉमा बॉन्ड के संकेतों को पहचानना और इससे निकलना बहुत जरूरी है.

ट्रॉमा बॉन्ड के संकेतों को पहचानें

  • किसी भी इंसान के प्रति इसमें आपका पारिवारिक सदस्य या फिर अपने पार्टनर के आस-पास नहीं होने पर परेशान हो जाना, जरूरत से अधिक लगाव किसी भी रिश्ते के लिए सही नहीं है.

  • ट्रॉमा बॉन्ड में उलझे लोग अपने पार्टनर या पारिवारिक सदस्य के गलत व्यवहारों की अनदेखी करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि उनके साथ गलत व्यवहार के जिम्मेदार वे खुद हैं.

  • कम आत्मसम्मान लोगों को उन रिश्तों में फंसाए रखता है जहां उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता.

  • ऐसे रिश्तों में फंसे लोग इससे बाहर निकलने का निर्णय नहीं ले पाते हैं. वे सबसे पहले इसके परिणाम देखने लगते हैं और नतीजों से डरने लगते हैं. बदला लेने के डर से वे चुप रहना ज्यादा पसंद करते हैं.

  • अपने व्यवहार को बदलने का वादा करने के बाद भी जब आपका साथी नहीं बदलता है और बार-बार वहीं आचरण दोहराता है. ऐसे में इस उम्मीद से कि आगे सब अच्छा हो जाएगा, आप बार – बार उसे मौका देते रहते हैं इससे स्थिति अच्छी होने के बजाय खराब होती जाती है.

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आघात बंधन या ट्रॉमा बॉन्ड गलत व्यवहार करने वाले और उनके पीड़ित के बीच एक अस्वस्थ संबंध है. आघात बंधन तब होता है जब हम दर्द देने या चोट देने वाले को प्यार से जोड़ते हैं. ऐसे रिश्ते से उबरने के लिए इसे पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है. ट्रॉमा बॉन्ड से पीड़ित भ्रमित हो जाता है कि क्या यह उसके लिए सही है या नहीं. किसी रिश्ते में भावनात्मक शोषण विभिन्न तरीकों से हो सकता है – शारीरिक शोषण से लेकर सूक्ष्म अपमान तक जो हमें प्रभावित कर सकता हैं. ऐसे रिश्तों में हम अक्सर महसूस करते हैं कि जिस व्यक्ति के साथ हम हैं वो कब कैसा बर्ताव करेगा यह पता नहीं चलता है. हम कभी नहीं जान सकते कि उनकी अगली प्रतिक्रिया क्या होगी ऐसे में उनसे एक डर बना रहता है. ट्रॉमा बॉन्ड के रिश्ते में हमेशा बेचैनी बनी रहती है. जब भी रिश्ते को छोड़ने या कोई रास्ता निकालने के बारे में सोचते हैं, तो ये विचार हमें असहज महसूस कराता है. बहुत प्रगाढ़ समझने वाले रिश्ते में हम अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली विस्फोटक भाषा को उनके प्यार की भाषा समझने की भूल कर बैठते हैं. अक्सर हम अपनी हर जरूरतों को इग्नोर करने लगने लगते हैं मन में यह बैठ जाता है या बिठाया दिया जाता है कि हमारी ज़रूरतों से ज्यादा अहम हमारे पार्टनर की जरूरतें हैं. ये लगातार बना रहता है और धीरे – धीरे हम अपना वजूद ही खोने लगते हैं अपनी फीलिंग्स को भूल जाते हैं. एक अधूरेपन में जीने लगते हैं और इसी को सच्चाई मान कर स्वीकर भी कर लेते हैं. अपने लाइफ पार्टनर से किसी भी तरह की बहस में पड़ने से बचना चाहते हैं. कभी कभी अपने लाइफ पार्टनर के प्यार भरे बर्ताव में खुद को भ्रमित महसूस करते हैं. बहुत लंबे समय तक अपमानजनक और दर्दनाक स्थितियों में रहने से लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, जिसमें पीटीएसडी, चिंता, मादक द्रव्यों के सेवन और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है.

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आघात बंधन को कैसे तोड़ें

आघात के बंधन से मुक्त होना बहुत मुश्किल प्रक्रिया हो सकती है. लेकिन अपनी इमोशनल सोच में परिवर्तन लाना जरूरी है. खोखले वादों के लिए सच्चाई से समझौता न करें, सतर्क रहें और स्वीकार करें कि आप किस दौर से गुजर रहे हैं, नकारात्मक आत्म-चर्चा से बचें, इसके बजाय, अपने एक मजबूत समर्थन प्रणाली से घेरकर खुद में सकारात्मक आत्म विश्वास बढ़ाये .

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Meenakshi Rai

लेखक के बारे में

By Meenakshi Rai

Meenakshi Rai is a contributor at Prabhat Khabar.

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