Coronavirus Third Wave News: कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने को तैयार भारत के बच्चे, ICH का दावा

Updated at : 23 Jul 2021 1:32 AM (IST)
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Coronavirus Third Wave News: कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने को तैयार भारत के बच्चे, ICH का दावा

Ghaziabad: A COVID-19 positive child receives free oxygen provided by a Sikh organization, as coronavirus cases surge in record numbers across the country, at Indirapuram, Ghaziabad, Wednesday, May 5, 2021. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI05_05_2021_000083B)

Coronavirus Third Wave News: 50 से अधिक बच्चों को जाइडस कैडिला (Zydus Cadilla) का टीका नहीं लगाया जा सका, क्योंकि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबाॅडी पायी गयी.

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Coronavirus Third Wave News: कोलकाता: कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण की तीसरी लहर (Third Wave) विशेषकर बच्चों के लिए काफी खतरनाक मानी जा रही है. लेकिन राहत भरी खबर यह है कि इससे अधिक बच्चे संक्रमित नहीं होंगे, क्योंकि ज्यादातर बच्चों में एंटीबाॅडी (Antibody) विकसित हो चुकी है. यह दावा है कोलकाता के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (Institute of Child Health) के विशेषज्ञों का.

एंटीबॉडी का मतलब मजबूत इम्यूनिटी (Immunity) है. शरीर आमतौर पर दो तरह से प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करता है. पहला किसी बीमारी से संक्रमित होने के बाद और दूसरा उसी बीमारी का टीका (Vaccine) लगाये जाने के बाद. यही हाल कोविड-19 (Covid-19) का भी है. हाल में इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (ICH) में 18 साल से कम उम्र के 100 बच्चों के लिए कोरोना टीका का ट्रायल (Trial of Corona Vaccine for Children) शुरू हुआ है.

इस दौरान 50 से अधिक बच्चों को जाइडस कैडिला (Zydus Cadilla) का टीका नहीं लगाया जा सका, क्योंकि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबाॅडी पायी गयी. संस्थान के बाल रोग विशेषज्ञ प्रो डॉ प्रभास प्रसुन गिरि ने बताया कि सभी बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके थे, लेकिन कोई लक्षण नहीं होने के कारण उनके परिजनों को पता ही नहीं चला. ये बच्चे खुद ठीक भी हो गये तथा कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए प्रोटीन कोशिकाएं (एंटीबाॅडी) अर्जित कर चुके हैं.

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संक्रमण से बननेवाली एंटीबाडी की सीमा थोड़ी अधिक

अब सवाल यह है कि यह एंटीबाॅडी बच्चों को कब तक सुरक्षा मुहैया करायेगी? इस बारे में इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ जयदीप चौधरी का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि संक्रमण से बनने वाली एंटीबाॅडी शरीर में कब तक रहेगी, क्योंकि इसका स्तर धीरे-धीरे घटता है.

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हालांकि, आमतौर पर संक्रमण के परिणामस्वरूप बनने वाली एंटीबाॅडी की सीमा थोड़ी अधिक होने की संभावना है. डॉ चौधरी का मानना है कि देश में बड़ी संख्या में बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन उनमें कोई लक्षण दिखायी नहीं दिये हैं. ऐसे बच्चों में एंटीबाॅडी विकसित हो चुकी है.

Posted By: Mithilesh Jha

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