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डायबिटीज वाले कोरोना मरीजों को है ब्लैक फंगस से सबसे ज्यादा खतरा, ये व्यक्ति आ सकते हैं चपेट में, जानें क्या है इसके लक्षण

Updated at : 19 May 2021 11:09 AM (IST)
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डायबिटीज वाले कोरोना मरीजों को है ब्लैक फंगस से सबसे ज्यादा खतरा, ये व्यक्ति आ सकते हैं चपेट में, जानें क्या है इसके लक्षण

हम्यूकर माइसिटिस नामक फंगस से होता है. आमतौर पर यह फंगस हमारे घर या वातावरण में मौजूद नमी वाली जगह पर होती है जैसे- खेतों, बगीचों, मिट्टी, पेड़-पौधों, खाद, सड़ी हुई फल-सब्जियों, गन्ने के ऊपर काले रंग की पाउडर, यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी यह फंगस पाया जाता है, लेकिन यह ब्लैक फंगस सिर्फ उनलोगों को अपनी चपेट में लेता है, जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हों और जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है.

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Health Update, Black Fungus Treatment रांची : कोविड इन्फेक्शन के बाद एक नयी तरह की समस्या म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस का डर व्याप्त हो गया है. हर जगह इसकी बात हो रही है. यह फंगल इन्फेक्शन कोरोना संक्रमण से ठीक हो रहे या ठीक हो चुके लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. खासकर उन कोविड संक्रमितों में इसका खतरा ज्यादा है, जिन्हें डायबिटीज भी है. यह बीमारी शरीर के इम्यून सिस्टम के कमजोर होने की वजह से होती है. इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है.

हम्यूकर माइसिटिस नामक फंगस से होता है. आमतौर पर यह फंगस हमारे घर या वातावरण में मौजूद नमी वाली जगह पर होती है जैसे- खेतों, बगीचों, मिट्टी, पेड़-पौधों, खाद, सड़ी हुई फल-सब्जियों, गन्ने के ऊपर काले रंग की पाउडर, यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी यह फंगस पाया जाता है, लेकिन यह ब्लैक फंगस सिर्फ उनलोगों को अपनी चपेट में लेता है, जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हों और जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है.

कैसे पहुंचता है शरीर में फंगस

म्यूकर माइसिटिस फंगस नाक या मुंह से या स्किन पर किसी घाव के माध्यम से शरीर में पहुंच जाता है. नाक की अंदरूनी दीवार म्यूकोसा और साइनेस के टिशू में चिपक जाता है. फिर फंगस एक्टिव हो जाता है और उसके टेंटीकल्स निकल आते हैं. फिर तेजी से मल्टीपल होकर दूसरे टिशू्ज को संक्रमित करता है. आमतौर पर यह इन्फेक्शन नाक से शुरू होता है और धीरे-धीरे आंखों तक फैल जाता है. दिमाग, फेफड़े या स्किन पर भी यह इन्फेक्शन हो सकता है.

जा सकती है आंख की रोशनी

इस फंगल इन्फेक्शन से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. इससे जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है. अगर संक्रमण ब्रेन तक पहुंच जाये, तो मेनेनजाइटिस, थ्रम्बोसिस जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं. उपचार न मिलने पर यह फंगस खून में शामिल होकर पूरे शरीर में फैल सकती है, मरीज को सेप्सिस हो सकता है, मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो सकता है और मौत भी हो सकती है.

अर्ली स्टेज में ही रहें सतर्क

नाक बंद हो जाना, नाक में दर्द होना, चेहरे पर एक तरफ सूजन, सिरदर्द, तेज बुखार आदि इसके शुरुआती लक्षण हैं. वहीं लंग्स में म्यूकर इन्फेक्शन होने पर बहुत तेज खांसी, सीने में दर्द, बुखार, पेट दर्द, उल्टी भी हो सकती है. मरीज को किसी भी तरह का अंदेशा हो, तो पोस्ट कोविड समस्या समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए. बिना देर किये ईएनटी, आइ स्पेशलिस्ट या फिजिशियन को कंसल्ट करना चाहिए. अर्ली स्टेज में डायग्नोज होने और जल्दी उपचार शुरू करने से किसी भी तरह की गंभीर क्षति से बचा जा सकता है.

स्टेरॉयड व डायबिटीक का कनेक्शन

स्टेरॉयड ब्लड शूगर को बढ़ाता है. जब शूगर वाले पेशेंट को स्टेरॉयड देते हैं, तो उसका ब्लड शूगर लेवल तेजी से बढ़ जाता है. इससे शरीर की लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और फंगस का अटैक होता है. नाक, आंख और मस्तिष्क का ब्लैक फंगस शूगर वाले मरीज में देखा जाता है.

ब्लैक फंगस का इलाज संभव

उपचार के क्रम में सबसे पहले ब्लड शूगर लेवल को कंट्रोल करना होता है. शुरुआती स्टेज में मरीज को 8 सप्ताह तक हर रोज एंटीफंगल मेडिसिन के इंजेक्शन दिये जाते हैं. डॉक्टर एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी की पद्धति से इस फंगस के असर वाले हिस्से को काट कर निकाल देते हैं. देर होने पर मेडिसिन ज्यादा असर नहीं कर पाती हैं. इन्फेक्शन बढ़ने से रोकने और मरीज की जान बचाने के लिए प्रभावित आंख निकालनी पड़ सकती है, नाक या जबड़े की हड्डी काटनी भी पड़ सकती है.

Posted By : Sameer Oraon

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