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Coronavirus : क्या COVID-19 को ठीक कर सकती है चाय की लत ?

By Shaurya Punj
Updated Date
According to research, no evidence has been found that Covid-19 can cure by tea
According to research, no evidence has been found that Covid-19 can cure by tea
Prabhat Khabar

COVID-19 के दुष्चक्र में सारी दुनिया फंसी हुई और रोज इसके टीके एवं इलाज की खबरें छप रहीं हैं. अगर हालात काबू में न किए गए तो इससे धरती से जीवन के खत्म होने का ही संकट पैदा हो जाएगा. महामारी COVID-19 फैलाने वाले कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में करीब साढ़े तीन लाख तक पहुंच गई है और 15 हजार से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं.

कोरोना वायरस से जन्मी बीमारी COVID-19 पिछले साल 2019 के आखिर में अनजान कारणों से निमोनिया जैसी बीमारी से सामने आया. इसमें शुरुआत में हल्की सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण प्रकट होते हैं.

इसके आगे की श्रेणी में वे लोग हैं, जिनमें श्वसन नली के ऊपरी हिस्से में संक्रमण होता है। इस स्थिति में संक्रमित लोगों को बुखार, कफ, सिरदर्द या conjectivities (आंख संबंधी बीमारी) के लक्षण होते हैं. इन लक्षणों वाले लोग संक्रमण के वाहक होते हैं लेकिन संभवत: उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती है. तीसरी श्रेणी में COVID-19 पॉजिटिव लोग होते हैं, जिनमें निमोनिया जैसे लक्षण होते हैं और उन्हें अस्पताल में रहना होता है. चौथी श्रेणी के लोगों में निमोनिया जैसी बीमारी का गंभीर रूप दिखता है.

लॉकडाउन हो जाने के कारण इंटरनेट खंघाल कर ये तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह से इस महामारी से बचा जाए. लोग फर्जी खबरों से लेकर अफवाहों को सुनकर इसके इलाज को लेकर नए कयास लगा रहे हैं.

अब, एक वायरल व्हाट्सएप संदेश का दावा है कि में तीन रासायनिक यौगिकों Methylxanthine, theobromine और theophylline से मिलकर बनाई गईं यौगिक चाय COVID-19 के मरीजों को परोसा जा रहा है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है.

भारतीय रिसर्च के अनुसार भारतीय चाय में भी यौगिक गुण मौजूद है पर इससे COVID-19 ठीक कर सकता है इसका कोई तथ्य सामने नहीं आया है.

Drugs.com के अनुसार, Us food and drug administration मिथाइलक्सेंथिन्स (Methylxanthine) और थियोफिलाइन (theophylline) का उपयोग अस्थमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों में किया जाता है. इसके अलावा ये भी बताया गया है कि कैफीन, कॉफी और चाय दोनों में मौजूद रहते हैं.

International Agency for Research on Cancer (IARC) की किताब 'Coffee, Tea, Mate, Methylxanthines and Methylglyoxal ’ में ये बताया गया है कि theophylline काली चाय में इसकी उपस्थिति बहुत कम पाई जाती है. पुस्तक यह भी कहती है कि इसका उपयोग दमा के लक्षणों को नियंत्रित करने और सांस की बीमारी के उपचार में किया जाता है.

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