Coronavirus : क्या COVID-19 को ठीक कर सकती है चाय की लत ?

Updated at : 25 Mar 2020 9:49 PM (IST)
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Coronavirus : क्या COVID-19 को ठीक कर सकती है चाय की लत ?

एक वायरल व्हाट्सएप संदेश का दावा है कि में तीन रासायनिक यौगिकों मेथिलक्सैन्थिन, थियोब्रोमाइन और थियोफिलाइन से मिलकर बनाई गईं यौगिक चाय COVID-19 के मरीजों को परोसा जा रहा है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है.

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COVID-19 के दुष्चक्र में सारी दुनिया फंसी हुई और रोज इसके टीके एवं इलाज की खबरें छप रहीं हैं. अगर हालात काबू में न किए गए तो इससे धरती से जीवन के खत्म होने का ही संकट पैदा हो जाएगा. महामारी COVID-19 फैलाने वाले कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में करीब साढ़े तीन लाख तक पहुंच गई है और 15 हजार से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं.

कोरोना वायरस से जन्मी बीमारी COVID-19 पिछले साल 2019 के आखिर में अनजान कारणों से निमोनिया जैसी बीमारी से सामने आया. इसमें शुरुआत में हल्की सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण प्रकट होते हैं.

इसके आगे की श्रेणी में वे लोग हैं, जिनमें श्वसन नली के ऊपरी हिस्से में संक्रमण होता है। इस स्थिति में संक्रमित लोगों को बुखार, कफ, सिरदर्द या conjectivities (आंख संबंधी बीमारी) के लक्षण होते हैं. इन लक्षणों वाले लोग संक्रमण के वाहक होते हैं लेकिन संभवत: उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती है. तीसरी श्रेणी में COVID-19 पॉजिटिव लोग होते हैं, जिनमें निमोनिया जैसे लक्षण होते हैं और उन्हें अस्पताल में रहना होता है. चौथी श्रेणी के लोगों में निमोनिया जैसी बीमारी का गंभीर रूप दिखता है.

लॉकडाउन हो जाने के कारण इंटरनेट खंघाल कर ये तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह से इस महामारी से बचा जाए. लोग फर्जी खबरों से लेकर अफवाहों को सुनकर इसके इलाज को लेकर नए कयास लगा रहे हैं.

अब, एक वायरल व्हाट्सएप संदेश का दावा है कि में तीन रासायनिक यौगिकों Methylxanthine, theobromine और theophylline से मिलकर बनाई गईं यौगिक चाय COVID-19 के मरीजों को परोसा जा रहा है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है.

भारतीय रिसर्च के अनुसार भारतीय चाय में भी यौगिक गुण मौजूद है पर इससे COVID-19 ठीक कर सकता है इसका कोई तथ्य सामने नहीं आया है.

Drugs.com के अनुसार, Us food and drug administration मिथाइलक्सेंथिन्स (Methylxanthine) और थियोफिलाइन (theophylline) का उपयोग अस्थमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों में किया जाता है. इसके अलावा ये भी बताया गया है कि कैफीन, कॉफी और चाय दोनों में मौजूद रहते हैं.

International Agency for Research on Cancer (IARC) की किताब ‘Coffee, Tea, Mate, Methylxanthines and Methylglyoxal ’ में ये बताया गया है कि theophylline काली चाय में इसकी उपस्थिति बहुत कम पाई जाती है. पुस्तक यह भी कहती है कि इसका उपयोग दमा के लक्षणों को नियंत्रित करने और सांस की बीमारी के उपचार में किया जाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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