एनटीपीसी के खिलाफ 11 गांवों के अनिश्चितकालीन आंदोलन से देश को सैकड़ों करोड़ का नुकसान
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Sep 2020 6:20 PM
हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड में 10 सूत्री मांगों के समर्थन में 11 गांवों के लोगों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है. इससे कोयले की ढुलाई ठप है और अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान कोयला कंपनियों, रेलवे, भारत सरकार और झारखंड सरकार को हो चुका है. बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद ने उनके आंदोलन का समर्थन किया है. कहा है कि रैयतों की मांगें जायज हैं. कंपनी को उनकी मांगों को मान लेना चाहिए.
बड़कागांव (संजय सागर) : हजारीबाग जिला के बड़कागांव प्रखंड में 10 सूत्री मांगों के समर्थन में 11 गांवों के लोगों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है. इससे कोयले की ढुलाई ठप है और अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान कोयला कंपनियों, रेलवे, भारत सरकार और झारखंड सरकार को हो चुका है. बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद ने उनके आंदोलन का समर्थन किया है. कहा है कि रैयतों की मांगें जायज हैं. कंपनी को उनकी मांगों को मान लेना चाहिए.
अंबा प्रसाद ने कहा कि उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. इस पर एनटीपीसी के प्रबंधक के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं. उन्होंने उम्मीद जतायी कि रैयतों की जीत होगी. कोयला खनन करने वाली कंपनियों तथा विस्थापित हुए रैयतों के बीच कुछ विवाद है, जिसके समाधान के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनायी गयी है.
कोयला खनन की वजह से प्रभावित 11 गांवों के रैयतों ने 31 अगस्त, 2020 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जो अब तक जारी है. आंदोलन के कारण एनटीपीसी के त्रिवेणी सैनिक कंपनी द्वारा संचालित चिरुडीह कोयला खदान से कोयले की ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह से बंद है. इससे अरबों रुपये के नुकसान का अनुमान जताया जा रहा है.
एनटीपीसी के पीआरओ विजय जुवैल की मानें, तो 18 अगस्त से अब तक कोयले की ट्रांसपोर्टिंग बंद है. इसकी वजह से रेलवे को हर दिन 10 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को भी अब तक कम से कम 70 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है. उन्होंने बताया कि कोयले की ट्रांसपोर्टिंग नहीं हो रही है, जहां कोयला को डंप किया गया है, वहां आग लग सकती है. इससे भी करोड़ों का नुकसान हो सकता है. और तो और, देश में ऊर्जा की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है.
बड़कागांव के पंकरी बरवाडीह, सिंदवारी, आराहरा, चेपाखुर्द, चेपकलां, जुगरा, डाड़ीकलां, सीकरी, बड़कागांव सूर्य मंदिर एवं तेलियातरी गांव के रैयतों द्वारा 10 सूत्री मांगों के समर्थन में धरना दिया जा रहा है. धरना दे रहे किसानों एवं रैयतों का कहना है कि विस्थापित, प्रभावित रैयतों एवं पर्यावरण के हितों की रक्षा के लिए आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी बनी थी.
कमेटी में बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद, एनटीपीसी त्रिवेणी सैनिक कंपनी के अधिकारी भी शामिल थे. कमेटी ने 8 अगस्त को प्रखंड मुख्यालय में रैयतों व जनप्रतिनिधियों की राय ली थी. आयुक्त कमल जॉन लकड़ा ने वर्ष 2013 अधिनियम लागू करने का आश्वासन दिया था. कमेटी ने जांच-पड़ताल की, लेकिन अब तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी.
आंदोलन कर रहे लोगों ने बताया कि उन लोगों से कमेटी ने कहा था कि अगर अगस्त, 2020 तक पूरी रिपोर्ट जारी नहीं होती है, तो वे धरना देने के लिए स्वतंत्र हैं. इसलिए वे लोग धरना दे रहे हैं. कोरोना से जंग जीतकर विधायक अंबा प्रसाद आंदोलन कर रहे लोगों का समर्थन कर रही हैं. वहीं, धरना खत्म कराने की सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई है.
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भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत मुआवजा दिया जाये, 18 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी युवाओं को नौकरी मिले
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कार्यक्षेत्रों में एक समान ग्रेड के वर्करों को एक समान वेतन दिया जाये
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पुनर्वास के लिए प्रत्येक परिवार को हजारीबाग शहर से पांच किलोमीटर के दायरे में प्रति परिवार 10 डिसमिल का भू-खंड तथा आवास बनाने के लिए पैसे दिये जायें
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आवंटित पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, पानी, उच्चतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करायी जाये
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आवंटित पुनर्वास स्थल में सामुदायिक एवं धार्मिक कार्यों के लिए सामुदायिक भवन, मंदिर, मस्जिद, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, खेल का मैदान, तालाब आदि की व्यवस्था की जाये
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पूर्व में फर्जी तरीके से हस्तांतरित वन भूमि एवं गैर-मजरुआ भूमि के हस्तांतरण को रद्द करके नये सिरे से वन भूमि एवं गैर-मजरुआ भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाये
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पूर्व में फर्जी तरीके से कराये गये सर्वे को रद्द करते हुए नये सिरे से विस्तृत सर्वेक्षण करवाया जाये
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रैयतों के खिलाफ एनटीपीसी से संबंधित जितने भी केस हैं, उन सभी केस को वापस लिया जाये तथा फर्जी केस से पीड़ित सभी व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति दी जाये
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विस्थापित परिवारों को विस्थापन प्रमाण पत्र निर्गत करने की व्यवस्था हो, जिसके आधार पर भविष्य में विस्थापित परिवारों के वंशजों को स्थानीय निवासी के प्रमाण पत्र सहित सभी प्रकार के प्रमाण पत्र निर्गत हों
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जब तक प्रभावित लोगों का पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक ब्लास्टिंग एवं प्रदूषण को नियंत्रित किया जाये, जंगल में जाने के रास्ते पर लगी रोक को हटाया जाये
Posted By : Mithilesh Jha
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