भीषण गर्मी में चलायी 70 किलोमीटर बाइक, रोजा तोड़कर किया रक्तदान, सिकंदर अली ने ओमप्रकाश को दी नयी जिंदगी

Jharkhand News: सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने हजारीबाग जिले के पदमा प्रखंड अंतर्गत गोरिया करमा के ओमप्रकाश गुप्ता के लिए रक्तदान किया. इसके लिए उन्होंने अपनी बाइक से 70 किलोमीटर की दूरी भीषण गर्मी में तय की. डॉक्टरों की सलाह पर रोजा तोड़ा और रक्तदान करते हुए ओमप्रकाश को नयी जिंदगी दी है.
Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के बेको निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने दो समुदायों के बीच आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की है. सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने हजारीबाग जिले के पदमा प्रखंड अंतर्गत गोरिया करमा के ओमप्रकाश गुप्ता के लिए रक्तदान किया. इसके लिए उन्होंने अपनी बाइक से 70 किलोमीटर की दूरी भीषण गर्मी में तय की. डॉक्टरों की सलाह पर रोजा तोड़ा और रक्तदान करते हुए ओमप्रकाश को नयी जिंदगी दी है.
ओमप्रकाश की तबीयत हो रही थी खराब
हजारीबाग जिले के पदमा प्रखंड अंतर्गत गोरिया करमा के ओमप्रकाश की जान बचाने के लिए हजारीबाग में ओ-पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता थी. स्थिति में सुधार नहीं होने की वजह से उसे हजारीबाग स्थित लाइफ केयर नर्सिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत गंभीर बनी हुई थी. उनका हीमोग्लोबिन की मात्रा तीन थी और उनके परिजन काफी परेशान थे. ओ-पॉजिटिव रक्त नहीं मिल रहा था. ओमप्रकाश की हालत धीरे-धीरे और खराब होती जा रही थी.
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रक्तदान कर बचाया जीवन
जैसे ही इसकी जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली को सोशल मीडिया के माध्यम से मिली, उन्होंने गिरिडीह से करीब 70 किमी दूरी तय की और हजारीबाग के अस्पताल में जाकर रक्तदान किया. इससे पहले चिकित्सकों ने उन्हें रोजा तोड़ने की बात कही थी. उन्होंने बिना परवाह किए रोजा तोड़ा और रक्तदान कर दो समुदायों के बीच आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की. इस बाबत सिकंदर ने कहा कि रोजा फिर कभी रख लूंगा. उन्होंने माहे रमजान के फर्ज रोजे को तोड़कर एक हिंदू भाई की जान बचाई है. उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी की जान बचाने के लिए अपना रक्तदान करता है, तो इससे बढ़कर इंसानियत और मजहब क्या होगा. रोजे की हालत में अपनी बाइक से भीषण गर्मी में रक्तदान करने के लिए वे हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच गये थे.
रोजा तोड़िए, फिर रक्तदान कीजिए
हजारीबाग स्थित शेख भिखारी अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड का स्टॉक नहीं था. तब उन्होंने रक्तदान की पहल की, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि पहले रोजा तोड़िए, फिर रक्तदान कीजिए. उन्होंने कहा कि मेरे लिए रोजा के फर्ज से ज्यादा जरूरी था बच्चे की जान बचाना. इसलिए रक्तदान किया. जिंदगी रही तो आगे भी रोजा रखकर पूरा कर लूंगा. ऐसा कर उन्होंने समाज के लिए एक मिसाल पेश की है.
रिपोर्ट : कुमार गौरव
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