Raja Shivaji Movie Review :दिल को छूती है मराठा शौर्य गाथा की यह कहानी

Published by :Urmila Kori
Published at :02 May 2026 4:07 AM (IST)
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Raja Shivaji

राजा शिवाजी, फोटो- इंस्टाग्राम

रितेश देशमुख अभिनीत और निर्देशित फिल्म राजा शिवाजी देखने की प्लानिंग है तो पढ़ लें यह रिव्यु

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फिल्म – राजा शिवाजी
निर्माता- रितेश और जिओ फिल्म्स
निर्देशक – रितेश विलासराव देशमुख
कलाकार – रितेश देशमुख,संजय दत्त,अभिषेक बच्चन,विद्या बालन ,जेनेलिया डिसूजा, भाग्यश्री ,सचिन खेडेकर,महेश मांजरेकर, सलमान खान और अन्य
प्लेटफार्म – सिनेमाघर
रेटिंग -तीन

raja shivaji movie review :छत्रपति शिवाजी महाराज पर मराठी सिनेमा में अब तक कई फिल्में बन चुकी हैं लेकिन बीते शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म राजा शिवाजी मराठी के साथ -साथ हिंदी भाषा में भी रिलीज हुई है.इस फिल्म को परदे पर जीवंत करने में अभिनेता और निर्देशक रितेश देशमुख को एक दशक से ज्यादा का वक़्त लगा. हिंदी सिनेमा में अपने हलके फुल्के किरदार के लिए पहचाने जानेवाले रितेश देशमुख ने इस ऐतिहासिक कहानी में शिवाजी महाराज की भूमिका निभाना और निर्देशन करना किसी रिस्क से कम नहीं था लेकिन उन्होंने इस रिस्क को शिद्दत के साथ लिया है.फिल्म में खामियां भी हैं लेकिन यह दिल से बनायी गयी फिल्म है. इससे इंकार नहीं है.

फिल्म की कहानी

राजा शिवाजी की कहानी शिवाजी के जन्म से पहले शुरू होती है. फिल्म दिखाती है कि शिवाजी के नाना (महेश मांजरेकर)और पिता शाहजी भोंसले (सचिन खेडेकर ) का मराठा राज्य कभी निजामशाही के अधीन रहा तो कभी आदिलशाही के, जिसमें मुग़लों की भी भागीदारी होती थी। इन सबके बीच शिवाजी का जन्म हुआ. छोटी उम्र में निजामशाही के झंडे के नीचे मराठों को देख उन्होंने अपने बड़े भाई शम्भू राजे से इसके बारे में पूछा। बड़े भाई ने जवाब में कहा कि स्वराज्य से हमें अपना झंडा मिलेगा और उसके लिए विद्रोह करना पड़ेगा। विद्रोह और स्वराज्य ये दोनों शब्द शिवाजी में रच बस गए और आदिलशाही के अन्याय के खिलाफ उन्होंने युवा होते ही विद्रोह का बिगुल बजा दिया।दक्कन पर शिवाजी का बढ़ता वर्चस्व देख आदिलशाही सल्तनत शिवाजी को खत्म करने की जिम्मेदारी क्रूर अफजल खान (संजय दत्त ) को देती है. जो शिवाजी के बड़े भाई शम्भू राजे (अभिषेक बच्चन ) के मौत के लिए भी जिम्मेदार है.शिवाजी किस तरह से क्रूर अफजल खान और उसकी बड़ी फ़ौज का सामना करते हुए अपने भाई शम्भू राजे की मौत का बदला लेते हैं. यही आगे की कहानी है.

फिल्म की खूबियां

फिल्म की कहानी नौ अध्याय में फैली हुई है. जिसमें शिवाजी के जन्म से पहले उनके नाना की हत्या को दर्शाया गया है. आदिलशाही, मुग़लों और निजामशाही के बीच के उठापटक को भी फिल्म दर्शाती है. धुरंधर की तरह यहाँ भी चैप्टर में कहानी को कहा गया है. जो शिवाजी के बचपन ,युवा दिनों और छत्रपति बनने से पहले की कहानी को दर्शाता है. शिवाजी महाराज एक महान योद्धा थे लेकिन इस फिल्म में उनके मानवीय पहलुओं को भी दिखाया गया है. उन्हें पता है कि अफ़ज़ल और उसकी बड़ी सेना को हराना आसान नहीं होगा. वह अफजल को ललकारते नहीं है बल्कि उसे खुद से बड़ा योद्धा बताने से गुरेज नहीं करते हैं. यह फिल्म शिवाजी की शौर्यता के साथ कूटनीति पहलू को बखूबी सामने लाती है. फिल्म में कई ऐतिहासिक पहलुओं से भी रूबरू करवाती है. शारजहां के ताज महल को बनाने में आदिलशाह का भी धन लगा था. अफ़ज़ल खान का अपनी 63 रानियों को मार देना. फिल्म के लेखन में देशभक्ति के पहलू को भी बखूबी जोड़ा गया है.तकनीकी पहलुओं में अजय अतुल के संगीत की तारीफ बनती है.छत्रपति और शिवराया गीत जोश के साथ साथ गर्व से भरते हैं. फिल्म के संवाद कहानी के साथ न्याय करते है.सिनेमेटोग्राफी जानदार है.

फिल्म की खामियां

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से प्रतापगढ़ के युद्ध पर आधारित है. जिसे गुरिल्ला युद्ध का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है.जिसमें भौगोलिक परिस्थितियों का इस्तेमाल कर शिवाजी ने एक बड़ी सेना को हराया था लेकिन फिल्म में यह पहलू उस तरह से नहीं आ सका है. जिस तरह से जरुरत थी.शिवाजी के छापामार युद्ध तकनीक को फिल्म में हाईलाइट नहीं किया गया है. इसके साथ ही शिवाजी के जांबाज योद्धाओं को भी यह फिल्म प्रभावी तरीके से नहीं दिखाती है. फिल्म के तकनीकी पहलू में इसका विजुवल इफेक्ट्स कमजोर रह गया है. हाथी के दृश्य हो या किले के उनमें बनावटीपन दिखता है. फिल्म की भव्यता को स्पेशल इफेक्ट्स कमतर बनाता है. फिल्म की लम्बाई ३ घंटे से ज्यादा है.कुछ जगहों पर फिल्म धीमी हो गयी है. इसके साथ ही दृश्यों में दोहराव भी है, जिनमें कांट छांट कर फिल्म की लम्बाई कम की जा सकती थी.

रितेश के साथ स्टार्स की टोली

एक्टिंग की बात करें तो शिवाजी के किरदार में रितेश देशमुख ने अपना सबकुछ झोंक दिया है.उनकी मेहनत दिखती है लेकिन एक्शन सीन और खासकर स्लो मोशन में फिल्माए गए दृश्यों में वह और बेहतर हो सकते थे. इससे इंकार नहीं है.संजय दत्त ने एक बार भी खलनायक की भूमिका में छाप छोड़ी है तो अभिषेक बच्चन और विद्या बालन की भी तारीफ बनती है.दोनों ने अपनी मौजूदगी से किरदार को ख़ास बनाया है.सलमान खान की क्लाइमेक्स में एंट्री फिल्म को एक अलग ही एनर्जी से भर देती है.सितारों से सजी इस फिल्म में सलमान खान की एंट्री ने जिस तरह से तालियां बटोरी हैं। उससे यह तय है कि फिल्म को उनकी मौजूदगी से फायदा मिलने वाला है.इसके साथ ही भाग्यश्री , जितेंद्र जोशी, सचिन खेडेकर,जेनेलिया,फरदीन ,अमोल गुप्ते सहित बाकी के किरदारों ने भी अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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