The Kerala Story 2 Review:फिल्म का ट्रीटमेंट रियलिटी से दूर एजेंडे के करीब

the kerala story 2 review
2023 में रिलीज हुई फिल्म द केरल स्टोरी की सीक्वल फिल्म केरल स्टोरी 2 देखने की प्लानिंग है तो इससे पहले पढ़ लें यह रिव्यु
फिल्म – द केरल स्टोरी 2 द गोज बियॉन्ड
निर्माता – विपुल अमृतलाल शाह
निर्देशक – कामख्या नारायण सिंह
कलाकार – उल्का गुप्ता,अदिति भाटिया, ऐश्वर्य ओझा, पूर्वा पराग,युक्तं खोसला,अर्जन सिंह औजला,सुमित गहलावत,अलका अमीन और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -दो
the kerala story 2 review :फिल्म द केरल स्टोरी की सीक्वल फिल्म द केरल स्टोरी 2 द गोज बियॉन्ड अपने ट्रेलर लांच के बाद से ही विवाद में आ गयी थी. विवाद कोर्ट तक जा पहुंचा था, लेकिन फिल्म आखिकार रिलीज हो गयी है. लव जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन के संवेदनशील विषय पर बनी यह फिल्म कमजोर है क्योंकि फिल्म की कहानी और उसका ट्रीटमेंट एक तरफ़ा रह गया है. जिससे यह गंभीर विषय पर बनी फिल्म असर छोड़ने में नाकामयाब है.
ये है कहानी
फिल्म की कहानी तीन लड़कियों की हैं. दिव्या (अदिति भाटिया )एक डांसर है.उसे सोशल मीडिया का स्टार बनना है.जिस वजह से माता पिता के साथ उसकी अनबन होती रहती है. उसकी दोस्ती रशीद (युक्तं खोसला )से होती है.रशीद उसे उसके सपनों को पूरा करने का वादा करता है.दूसरी लड़की नेहा (ऐश्वर्या ओझा ) है,वह संघर्षरत एथलीट है. उसकी मुलाक़ात फैजान (अर्जन सिंह औजला)से होती है.उसने नेहा से अपनी पहचान छिपाई है. उनके बीच जल्द ही प्यार हो जाता है कि क्योंकि फैजान नेहा से वादा करता है कि वह उसके सपने को पूरा करेगा और बेस्ट कोच से उसकी ट्रेनिंग करवाएगा. तीसरी कहानी सुरेखा (उल्का गुप्ता )की है. वह यूपीएससी की तैयारी कर रही है.जिसे एक शादीशुदा प्रोग्रेसिव सोच वाले जर्नलिस्ट सलीम (सुमित गहलावत ) से प्यार हो जाता है,जो उससे वादा करता है कि वह अपनी पहली पत्नी से जल्द ही तलाक ले लेगा, लेकिन जिस सलीम को सुरेखा प्रोग्रेसिव सोच वाला समझती है. उसके इरादे बहुत गलत हैं.कोच्चि,जोधपुर और ग्वालियर की कहानी है. केरल से दूर दूर तक कुछ लेना देना नहीं है. ये तीनों लड़कियां इन्ही तीन शहरों से हैं लेकिन ये तीनों लड़कियां ना सिर्फ इन तीनों मुस्लिम युवकों के धोखे का शिकार बनती हैं बल्कि निकाह के बाद उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर उन पर तरह तरह के जुल्म किये जाते हैं. क्या ये लड़कियां बच पाएंगी. इससे निकल पाएंगी.यही आगे की कहानी है.
फिल्म की खूबियां और खामियां
2023 में बॉक्स ऑफिस 300 करोड़ की ताबड़तोड़ कमाई करनेवाली केरल स्टोरी फिल्म का यह सीक्वल है लेकिन फिल्म पहले पार्ट के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं. प्रभात खबर के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्ट 2 केरल की स्टोरी नहीं है. यह राजस्थान की स्टोरी है. मध्य प्रदेश की स्टोरी है और इन पर मेरा नॉलेज नहीं है. यह इतना सेंसिटिव सब्जेक्ट है. अगर आप गहराई से रिसर्च नहीं कर पाएंगे तो सिर्फ यह एक बहुत सुपरफिशियल फिल्म होगी और सुपरफिशियल फिल्म इस देश के लिए सबसे खतरनाक चीज है. मैं पेपर कटिंग या व्हाट्सप्प फॉरवर्ड पर फिल्म नहीं लिख सकता हूँ. केरल स्टोरी 2 को देखते हुए यह बात महसूस होती है. फिल्म का प्लाट बहुत कमजोर रह गया है.सिर्फ विचलित करने वाले वाले दृश्यों और संवादों का ही सहारा लिया गया है. स्क्रीनप्ले ,प्लाट और किरदारों को गहराई में जाकर एक्सप्लोर नहीं करता है.फिल्म का क्लाइमेक्स भी फ़िल्मी ज्यादा हो गया है. निश्चित तौर पर लव जिहाद बहुत लड़कियों की दर्दनाक हकीकत है. फिल्म बखूबी यह मैसेज देती हैं कि बेटियों को किस तरह पाला जाए और अगर वह शादी माता पिता की मर्जी के खिलाफ शादी भी कर भी लें तो भी माता पिता का फर्ज है कि बेटी से रिश्ता ना खत्म करें. फिल्म शुरुआत से ही खुद को वास्तविक बताती है.फिल्म के आखिर में कुछ तथ्य भी रखे गए हैं. हर कौम में बुरे लोग हैं. इससे इंकार नहीं है,लेकिन उसकी वजह से बुरे कौम को दोषी बताना ये कैसे जायज हो सकता है. फिल्म में मुस्लिम युवक, उसके पूरे परिवार और मोहल्ले तक को नकारात्मक रंग ही दिया गया है. केरल स्टोरी 2’ अपना दृष्टिकोण को थोपती है. यह बताती है कि 2047 तक भारत शरिया कानून के तहत एक मुस्लिम राज्य बन सकता है.यह कहना गलत ना होगा कि फिल्म सिर्फ नफरत को पोषित करती है. फिल्म के तौर पर भी समीक्षा करें तो स्क्रीनप्ले सतही रह गया है. फिल्म में फिल्म में पुलिस और प्रसाशन की कोई भूमिका नहीं है. लड़कियां पढ़ी लिखी हैं. वह पुलिस से मदद क्यों नहीं मांगती हैं. यह बात भी समझ नहीं आती है. फिल्म का प्रोडक्शन वैल्यू भी कमजोर रह गया है. संवाद की बात करें तो वह अपने मकसद को जाहिर करते हैं.फिल्म के संवाद में पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन अब्दुल कलाम का जिक्र अखरता है तो राइट विंग कट्टरपंथी की तरह बात करने वाला संवाद बचकाना सा लगता है.गीत संगीत विषय के साथ न्याय करते हैं जबकि फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक बेहद लाउड हो गया है.आखिर में फिल्म की खूबियों और खामियों के साथ यह बात भी अहम है कि दर्शक इस फिल्म को पसंद करेंगे या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि वह इस फिल्म को देखते हुए अपेक्षा क्या रखते हैं
कलाकारों का सहज परफॉरमेंस
अभिनय की बात करें तो फिल्म की अभिनेत्रियों उल्का गुप्ता,अदिति भाटिया,ऐश्वर्या ओझा ने अपने किरदारों से जुड़े डर,विश्वासघात और भावनात्मक उतार -चढ़ाव को बखूबी जिया है.बाकी के किरदारों ने भी अपनी -अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.अलका अमीन जैसी सीनियर अभिनेत्री के साथ यह फिल्म न्याय नहीं कर पायी है.
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लेखक के बारे में
By Urmila Kori
I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
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