Alpha Movie Review:बेदम कहानी ने आलिया भट्ट के दमदार एक्शन और एटीट्यूड का निकाला दम

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‘अल्फा’ की रिलीज पर लगा ब्रेक?

आलिया भट्ट स्टारर हालिया रिलीज फिल्म” अल्फा “को देखना या स्किप करना चाहिए.इससे पहले पढ़ लें यह रिव्यु

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फिल्म – अल्फा
निर्माता – यशराज फिल्म्स
निर्देशक -शिव रवैल
कलाकार – आलिया भट्ट,बॉबी देओल,शरवरी वाघ,अनिल कपूर,ह्रितिक रोशन,दिब्येंदु भट्टाचार्य और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -दो

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alpha movie review :यशराज बैनर की स्पाई यूनिवर्स में टाइगर,पठान और कबीर के बाद अब अल्फा का नाम भी जुड़ गया है. यह फिल्म इस यूनिवर्स में अलहदा है क्योंकि अभिनेत्रियों के इर्द गिर्द स्पाय यूनिवर्स की यह कहानी बुनी गयी है.आमतौर पर हिंदी सिनेमा अभिनेत्रियों के साथ बड़े बजट की हाई ऑक्टेन एक्शन फिल्म बनाने से कतराता रहा है, जिस वजह से यशराज फिल्म्स का यह प्रयास आगे की सोच है, लेकिन बेहद कमजोर कहानी इस सोच को पीछे खिंच ले जाती है.कमजोर कहानी और लचर ट्रीटमेंट ने इस स्पाय थ्रिलर को रियलिटी से ही नहीं मनोरंजन से भी दूर कर दिया है.

ये है कहानी

कहानी की शुरुआत 1999 में करगिल वॉर के खत्म होने से शुरू होती है. करगिल युद्ध में भारतीय सेना के कई जवान शहीद हो चुके हैं. तिरंगे में लिपटी उनकी लाशों को देख कर्नल विक्रांत कौल (अनिल कपूर )और मेजर फ़तेह सिंह लखावत (बॉबी देओल ) अपना दर्द एक दूसरे से बांटते हैं.उन्हें अफ़सोस है कि इतने भारतीय सैनिकों की जान गयी. इसी बीच फ़तेह, विक्रांत को अपने मिशन अल्फा के बारे में बताता है. जिसमें सोल्जर्स को एक खास सीरम की मदद से मजबूत बनाया जाएगा , जिसमें वह किसी भी आवाज को दूर से सुन सकते हैं. पानी के अंदर बिना ऑक्सीजन के सात से आठ मिनट तक रह सकते हैं. उनका निशाना अचूक होगा. चोट उन्हें भी लगेगी लेकिन अल्फा सोल्जर्स के घाव जल्दी भर जाएंगे. विक्रांत की मदद से डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ओर्गनाइजेशन से इस प्रोग्राम को मंजूरी मिल जाती है. सोल्जर्स का पहला बैच भी तैयार हो जाता है लेकिन अल्फा सीरम अपना साइड इफेक्ट्स भी दिखाना शुरू कर देती है और सारे सोल्जर्स ऑर्गन फेलियर्स की वजह से मर जाते हैं लेकिन फ़तेह रुकने वाला नहीं था. हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि वह विक्रांत की नवजात बेटी सीता (आलिया भट्ट )को अपने मिशन अल्फा के लिए गिन्नी पिग बनाता है. जिसकी खबर विक्रांत को भी नहीं होती है और गुजरते समय के साथ वह सीता को एक किलिंग मशीन में बदल देता है.क्या सीता और विक्रांत को फतेह की हकीकत के बारे में मालूम होगा. सीता क्या करेगी. क्या इस बार राम नहीं बल्कि सीता रावण का खात्मा करेगी. यही फिल्म की कहानी है.

फिर भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी की कहानी याद आयी

यशराज का स्पाई यूनिवर्स की इस फिल्म की कहानी भी भारत और पाकिस्तान के बीच ही सिमट गयी है. टाइगर , पठान, कबीर के बाद अल्फा भी पाकिस्तान से ही देश को बचा रही है. हालाँकि फिल्म में पाकिस्तान के एंगल से जो धुरंधर वाला ट्विस्ट जोड़ा गया है लेकिन वह भी कहानी में कुछ खास जोड़ नहीं पाया है. फिल्म की कहानी में इमोशनल एंगल बॉलीवुड की पुरानी फिल्मों का खोया पाया वाला है, जबकि देशभक्ति का जज्बा थोपा हुआ ज्यादा लगता है,फिल्म के कमजोर लेखन ने सिर्फ पुरानी हिंदी फिल्मों से ही नहीं बल्कि हॉलीवुड की फिल्मों से भी प्रेरणा ली गयी है. सीरम से ताकतवर बनाना हो या फिर आवाज को दूर से सुनने की पावर यह सब हम मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स से जुड़े किरदारों में देख चुके हैं.फिल्म में ओडिसी का भी जिक्र है , इसी नाम की क्रिस्टोफर नोलेन की हॉलीवुड फिल्म जल्द ही दस्तक देने वाली है हालांकि दोनों का कोई कनेक्शन नहीं है. इसके साथ हीअल्फा में सिर्फ मिशन ओडिसी का जिक्र भर ही हुआ है. फिल्म का ट्रीटमेंट तेज रफ़्तार वाला है, जिस वजह फिल्म का फर्स्ट हाफ ठीक ठाक लगता है लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले रनटाइम के साथ कमजोर पड़ता चला गया है. सेकेंड हाफ पूरी तरह से प्रेडिक्टेबल है और रही सही कसर कमजोर क्लाइमेक्स कर गया है. लेखन के दूसरे पहलुओं संवाद की बात करें तो यह किरदारों को जरूर मजबूती देते हैं. इंसान कमजोर होता है जेंडर नहीं. शेर सिर्फ खूंखार होने का दिखावा करता है. असली शिकार तो शेरनी करती है.

एक्शन है मजबूत

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका एक्शन है.हॉलीवुड के प्रसिद्ध स्टंट कोर्डिनेटर क्रैग का नाम इस फिल्म से जुड़ा हुआ है.उनके द्वारा कोरियोग्राफ किये गए स्टंट और एक्शन सीन फिल्म की यूएसपी है हालाँकि कुछ जगहों पर यह नेचुरल कम कोरियोग्राफ किया हुआ स्टंट ज्यादा लगता है.कुछ स्टंट्स देखे दिखाए लगते हैं.आलिया के किरदार जिस तरह से क्लाइमेक्स में अपने पिता को बचाता है. वह सीक्वेंस कई फिल्मों में नज़र आ चुका है. शरवरी का टैंक उड़ाने वाला अंदाज भी नया नहीं है. फिल्म का पंजाबी ,अंग्रेजी बैकग्राउंड रैप म्यूजिक रोमांच को बढ़ाता है, हालांकि गीत संगीत फिल्म में ख़ास कुछ जोड़ नहीं पाए हैं.यह फिल्म की रफ्तार को सिर्फ बाधित करते हैं.फिल्म की सिनेमेटोग्राफी शानदार अनुभव लिए हुए है.

कलाकारों ने दिखाया है अपना दमखम

आलिया भट्ट इस फिल्म में पहली बार हाई ऑक्टेन एक्शन अवतार में दिखी हैं.उन्होंने अपनी भूमिका को एटीट्यूड और दमदार एक्शन के साथ निभाया है. किरदार के लिए उनकी मेहनत दिखती है.बॉबी देओल ने फ़तेह सिंह की भूमिका में अपना दम दिखाया है तो अनिल कपूर की भी तारीफ़ बनती है.शरवरी का स्क्रीन टाइम भले ही परदे पर कम हो,लेकिन वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही हैं.अभिनेता ह्रितिक रोशन ने फिल्म में कबीर की अपनी भूमिका को दोहराया है. परदे पर पर वह आकर्षक रहे हैं हालाँकि कमजोर लेखन ने उनके इस कैमियो के साथ न्याय नहीं किया है.यह कहना गलत ना होगा.


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