Cocktail 2 review :कमजोर कहानी और किरदार कॉकटेल 2 के सुरूर को नहीं है चढ़ने देता

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शाहिद कपूर, कृति और रश्मिका, फोटो- इंस्टाग्राम

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शाहिद कपूर,रश्मिका और कृति सैनन की फिल्म कॉकटेल 2 देखने की प्लानिंग है तो इससे पहले पढ़ लें यह रिव्यु

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फ़िल्म – कॉकटेल 2
निर्माता – दिनेश विजन
निर्देशक – होमी अदजानिया
कलाकार -शाहिद कपूर,रश्मिका मंदाना,कृति सैनन,टिकू तलसानिया और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -दो

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cocktail 2 review :हिंदी सिनेमा में सीक्वल के पुराने फॉर्मूले में नया शब्द स्पिरिचुअल जुड़ गया है.इसी फेहरिश्त में इस शुक्रवार फिल्म कॉकटेल के स्पिरिचुअल सीक्वल कॉकटेल 2 ने दस्तक दी. पिछली फिल्म की तरह इस फिल्म में भी खूबसूरत लोकेशंस, ग्लैमरस एक्टर्स,स्टाइलिश ट्रीटमेंट हैं लेकिन इसके बावजूद कॉकटेल 2 बढ़िया नहीं बन पाया है क्योंकि फिल्म की कहानी कमजोर रह गयी है.

ये है कहानी

फिल्म की कहानी की बात करें तो फिल्म त्रिकोणीय प्रेम कहानी है. कुणाल (शाहिद कपूर )और दिया (रश्मिका )की कहानी है.जो पिछले 16 साल से रिलेशनशिप में हैं. दोनों कॉलेज के समय से एक दूसरे के प्यार में पड़ गए थे.दोनों लिव इन में रहते हैं,लेकिन शादी के लिए फिलहाल तैयार नहीं है. दिया इस कन्फ्यूजन में है कि कुणाल उससे प्यार तो करता है लेकिन शादी कर लें वैसा प्यार नहीं।क्या वह उसकी आदत है या फिर प्यार। यही सब उसके दिमाग में चल रहा होता है. इसी बीच वह कुणाल के साथ छुट्टियां बिताने के लिए सिसिली जाती है. जहाँ दिया की मुलाक़ात उसकी दस साल पुरानी दोस्त एली (कृति सैनन )से होती है. दिया कुणाल का प्यार को परखने के लिए एली का सहारा लेती है.वह एली को कुणाल को आकर्षित करने को कहती है. एली तैयार हो जाती है लेकिन कई कोशिशों के बावजूद एली, कुणाल को अपनी तरफ आकर्षित नहीं कर पाती है लेकिन वह खुद कुणाल के प्यार में पड़ जाती है हालांकि उसे लगता है कि अगर वह कुणाल को दिया से पहले मिली होती तो कुणाल उसे ही चुनता था. चूंकि वह दिया के साथ सालों से रिलेशनशिप में है इसलिए वह एली के लिए अपने प्यार को छुपा रहा है.इधर दिया ,कुणाल को शादी के लिए प्रपोज कर देती है. दोनों दिल्ली जाकर शादी की तैयारियों में जुट जाते हैं.पीछे से एली भी आ जाती है.कुणाल को पाने के लिए. इस प्रेम त्रिकोण का अंत क्या होगा। क्या वाकई कुणाल की पसंद दिया नहीं बल्कि एली है. यही फिल्म की आगे की कहानी है.

कहानी और किरदार दोनों हैं कमजोर

पिछले कॉकटेल की कहानी दोस्ती ,प्यार और उलझे रिश्तों के इर्द गिर्द बुनी गयी थी. इस बार भी वही कांसेप्ट लिया गया है लेकिन इस बार फिल्म का लेखन बेहद कमजोर रह गया है.इंटरवल से पहले तक फिल्म फिर भी बांधे रखती है. हल्के फुल्के पलों के साथ लेकिन इंटरवल के बाद एक अच्छी फिल्म देखने की उम्मीद पूरी तरह से धराशायी हो जाती है.कहानी कमजोर है. इसलिए किरदार भी कमजोर रह गए हैं.कृति का किरदार के लुक पर जितना फोकस किया गया है. उतना अगर उनके किरदार पर फोकस किया जाता तो कॉकटेल की वेरोनिका की तरह एली का किरदार भी यादगार बन जाता था. एली जो अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती है. अचानक से कुणाल के लिए इतना ऑब्सेसिव कैसे बन जाती है. यह बात समझ नहीं आती है.फिल्म के एक दृश्य में एली एक बुजुर्ग इंसान को गले लगाती है तो जिस तरह से उसकी आँखें आंसुओं से भर आते हैं.लगता है कि उनके किरदार में भावनात्मक गहराई भी दर्शायी जायेगी, लेकिन वह फिल्म में टॉक्सिक के ज्यादा करीब सेकेंड हाफ में पहुँच गयी हैं. दूसरी महिला किरदार रश्मिका का तो बहुत ज्यादा कमजोर रह गया है. उन्हें फिल्म की स्क्रीनप्ले ऐसी गर्ल फ्रेंड के तौर पर परिभाषित करती है. जो अपने रिश्ते में असुरक्षित महसूस करने के साथ साथ बहुत डॉमिनेटिंग भी है.इस कमजोर किरदार में रश्मिका अपनी कमजोर हिंदी के साथ ज्यादा कुछ जोड़ नहीं पायी हैं. शाहिद के किरदार को मौजूदा टर्म में ग्रीन फारेस्ट कहा जा सकता है लेकिन क्लाइमेक्स को छोड़कर इस किरदार के लिए परफॉर्म करने को ज्यादा कुछ नहीं था. लीड चेहरों के अलावा सपोर्टिंग कास्ट के साथ भी फिल्म की कहानी बुरा कर गयी है. फिल्म में नीलू कोहली,टिकू तसलानिया जैसे बड़े नाम सिर्फ चेहरा दिखाने का काम करते हैं.पिछली वाली कॉकटेल में तीनों एक्टर्स के बीच की केमिस्ट्री उसकी यूएसपी थी.इस बार वह नज़र नहीं आयी खासकर रश्मिका और शाहिद के बीच.

विजुअल है अपीलिंग

फिल्म के अच्छे पहलुओं में इसका लुक है. फिल्म अपने हर फ्रेम में यह खूबसूरती का एहसास करवाती है फिर चाहे सिसिली की खूबसूरत वादियां हो या फिर एक्टर्स का लुकऔर उनके आउटफिट्स. फिल्म हर फ्रेम में पिक्चर परफेक्ट नज़र आती है. पुरानी कॉकटेल का लोकप्रिय गीत संगीत आज भी दर्शकों की जुबान पर है .संगीतकार प्रीतम वह पुराना जादू दोहरा तो नहीं पाएं हैं, लेकिन कॉकटेल 2 का गीत संगीत फिल्म के साथ न्याय जरूर करता है.फिल्म के संवाद अच्छे बन पड़े हैं. क्लाइमेक्स में खासकर. क्लाइमेक्स के संवाद के ज़रिये ही मॉडर्न रिश्तों पर भावनात्मक रूप से कुछ ठोस कहा गया है.वरना पूरी फिल्म में रिश्तों ,टूटे दिल,कमिटमेंट इन सब पहलुओं से बचकर ही निकलती नज़र आयी है. फिल्म के दूसरे पहलू ठीक ठाक हैं.

देखें या ना देखें

लुक में अच्छी दिखने वाली यह फिल्म कंटेंट के मामले में अच्छी नहीं है.इस लव ट्र्रायंगल फिल्म में रोमांस और उससे जुड़ा इमोशन दोनों ही कमजोर रह गया है. किरदार भी सतही से हैं, जिस वजह से कॉकटेल 2 का लुत्फ़ अपने रिस्क पर उठाएं.


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