Daadi Ki Shaadi Review: नीतू कपूर-कपिल शर्मा की ‘दादी की शादी’ दिल को छू जाएगी, इमोशन्स से भरी शानदार कहानी
दादी की शादी, फोटो- इंस्टाग्राम
Daadi Ki Shaadi Review: ‘दादी की शादी’ एक हल्की-फुल्की फैमिली फिल्म है, जो रिश्तों और अपनापन की खूबसूरत कहानी दिखाती है. नीतू कपूर और कपिल शर्मा ने अच्छा काम किया है.
फिल्म: दादी की शादी
निर्देशक: आशीष आर मोहन
लेखक: आशीष आर. मोहन, बंटी राठौर, साहिल एस शर्मा
शैली: फैमिली ड्रामा
कलाकार: नीतू कपूर, कपिल शर्मा, आर सरथ कुमार, सादिया खतीब, रिद्धिमा कपूर और योगराज सिंह
रन टाइम: 2 घंटे 35 मिनट
कहां देखें: सिनेमाघरों में
रेटिंग: 3.5 स्टार्स
आजकल फिल्मों में जहां बड़े एक्शन, भारी ड्रामा और जबरदस्त ट्विस्ट देखने को मिलते हैं, वहीं ‘दादी की शादी’ एक ऐसी फिल्म है जो बेहद साधारण तरीके से दर्शकों का दिल जीतने की कोशिश करती है. परिवार, अकेलापन और रिश्तों की अहमियत को खूबसूरती से दिखाने वाली यह फिल्म हर उम्र के दर्शकों को पसंद आ सकती है.
परिवार के बीच घूमती है कहानी
फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार से शुरू होती है, जहां सबकुछ नॉर्मल चल रहा होता है. लेकिन अचानक घर में यह खबर आती है कि दादी दोबारा शादी करना चाहती हैं. यह बात सुनते ही पूरे परिवार में हलचल मच जाती है. कोई इसे मजाक समझता है तो कोई इस फैसले को स्वीकार नहीं कर पाता. निर्देशक आशीष आर मोहन ने कहानी को बहुत आसान और साफ अंदाज में पेश किया है, जिससे दर्शक खुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि बढ़ती उम्र में भी इंसान को प्यार, साथ और अपनापन चाहिए होता है. यही बात इसे बाकी फैमिली फिल्मों से अलग बनाती है.
कलाकारों ने दिल से निभाए किरदार
फिल्म में नीतू कपूर ने दादी के किरदार में शानदार अभिनय किया है. उनके चेहरे के एक्सप्रेशन्स और सहज अभिनय कई सीन को बेहद खास बना देते हैं. उन्होंने अपने रोल को बहुत सादगी और खूबसूरती से निभाया है. कपिल शर्मा भी इस फिल्म में अपने पुराने कॉमिक अंदाज से थोड़ा अलग नजर आते हैं. उन्होंने सिर्फ हंसाने का काम नहीं किया, बल्कि कई भावुक सीन में भी अच्छा प्रदर्शन किया है. उनकी मौजूदगी फिल्म को हल्का और मनोरंजक बनाए रखती है. आर सरथ कुमार का किरदार कहानी में मजबूती लाता है. उनका स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है. वहीं सादिया खतीब ने अपने किरदार में ताजगी भरी है और वह स्क्रीन पर अच्छी लगती हैं. योगराज सिंह छोटे रोल में भी याद रह जाते हैं.
फिल्म की कमजोरियां भी आती हैं नजर
हालांकि फिल्म का विषय दिलचस्प है, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ जगहों पर धीमी महसूस होती है. खासकर सेकंड हाफ में कुछ सीन लंबे लगते हैं, जिन्हें थोड़ा छोटा किया जा सकता था. कुछ दर्शकों को कहानी ज्यादा साधारण भी लग सकती है क्योंकि इसमें बड़े ट्विस्ट या ड्रामे नहीं हैं. फिर भी फिल्म अपने भावनात्मक पलों और परिवार से जुड़ी बातों की वजह से दर्शकों को बांधे रखती है. फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के मूड के साथ फिट बैठता है.
देखें या नहीं?
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो दिल को सुकून देती हैं और रिश्तों की अहमियत याद दिलाती हैं, तो ‘दादी की शादी’ जरूर देखी जा सकती है. यह फिल्म ज्यादा शोर नहीं मचाती, लेकिन अपने प्यारे और भावुक पलों से लंबे समय तक याद रह जाती है. फैमिली के साथ देखने के लिए यह एक अच्छी और साफ-सुथरी एंटरटेनिंग फिल्म साबित हो सकती है.
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By दिव्या केशरी
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शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
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