प्रभात खबर के आयोजन सुर संध्या में शामिल हुए गायक सुखविंदर ने कहा मोबाइल को गुरु के रूप में इस्तेमाल करिये सुनने की आदत डालिये, स्ट्रगल से मत डरिये
सुखविंदर सिंह. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित पार्श्व गायक. भारत के इंटरनेशनल फेम सिंगर. प्रतिष्ठित एकेडमी व ग्रैमी अवार्ड विनर. कभी मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ट्रुप के एक छोटे से कलाकार रहे सुखविंदर की झोली आज फिल्म फेयर और देसी-विदेशी पुरस्कार से भरी पड़ी है़ देश-दुनिया के मशहूर संगीतकारों और गीतकारों के साथ काम […]
सुखविंदर सिंह. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित पार्श्व गायक. भारत के इंटरनेशनल फेम सिंगर. प्रतिष्ठित एकेडमी व ग्रैमी अवार्ड विनर. कभी मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ट्रुप के एक छोटे से कलाकार रहे सुखविंदर की झोली आज फिल्म फेयर और देसी-विदेशी पुरस्कार से भरी पड़ी है़ देश-दुनिया के मशहूर संगीतकारों और गीतकारों के साथ काम कर चुके सुखविंदर ने अपना अलग मुकाम बना लिया है. छैयां…छैयां…से शुरू हुई उनकी सफलता का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है. उनके गाने जय हो… और चक दे इंडिया… की सनसनी अभी तक थमी नहीं. हाल ही में आयी फिल्म सुलतान के गाने मिट्टी में तेरा खून…खून में तेरे मिट्टी…ने फिर से लोगों में जोश भर दिया. मूल रूप से अमृतसर के रहनेवाले सुखविंदर के लिए सफलता की राह आसान नहीं रही. शुरुआती दौर में उन्होंने असफलता का सामना किया, स्ट्रगल किया, जुझारू बन विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहे. खुद पर विश्वास किया. मेहनत की. नतीजा आज वह देश के सफलतम गायकों में शुमार हैं. प्रभात खबर के कार्यक्रम में रांची आये सुखविंदर से प्रभात खबर के विवेक चंद्र और राजेश तिवारी ने कई पहलुओं पर बात की. पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:
सवाल : आपके शुरुआती जीवन की ज्यादा जानकारी गूगल पर नहीं है. दूसरे सेलिब्रेटियों की तरह आप सोशल साइट पर एक्टिव नहीं रहते. कुछ खास वजह?
जवाब : सोशल साइट्स में मेरा ज्यादा इंटरेस्ट नहीं है. ट्विटर पर मेरा एकाउंट तक नहीं है. मैं समझता हूं कि सोशल साइटों पर एक्टिव रहने से ज्यादा जरूरी काम मेरे पास है. संगीत में ही मैं इतना व्यस्त रहता हूं कि दूसरी चीजों के लिए समय नहीं मिल पाता. सच पूछिये तो मैं संगीत को छोड़ कर किसी दूसरी चीज के लिए समय निकालना भी नहीं चाहता. मैं ऐसा ही हूं. और खुश हूं जैसा भी हूं.
सवाल : अपने शुरुआती दिनों के बारे में कुछ बताइये.
जवाब : मैं अमृतसर का रहने वाला हूं. मेरी फैमिली बैकग्राउंड में संगीत कहीं नहीं है. आठ साल की उम्र में मैं लंदन चला गया. वहीं मेरी शिक्षा-दीक्षा हुई. पर, बचपन से ही संगीत मुझमें रचा-बसा है. संगीत हमेशा से मेरे सबसे करीब रहा. मैं सुरों के साथ रहता हूं. नाराजगी भी संगीत के जरिये ही व्यक्त करता हूं. मेरी बदमाशियों में, सुख में, दुख में हर समय संगीत मुझसे जुड़ा रहा. मैंने मुंडा साउथ हॉल दा के नाम से पंजाबी पॉप अलबम बनाया. वह काफी हिट रहा. फिर किसी ने मेरी मुलाकात महान संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से करायी. उन्होंने मेरा गाना सुना और मुझे गले से लगा लिया. उन्होंने मुझे अपने ट्रुप में शामिल कर लिया. बस, वहीं से मेरा सफर शुरू हो गया.
सवाल : आपको कभी स्ट्रगल नहीं करना पड़ा?
जवाब : बिल्कुल करना पड़ा. बल्कि बहुत ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ा. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के बुलावे पर मैं लंदन से मुंबई आ गया. शुरुआत में उनके घर पर ही रहा. बाद में किराये पर मकान लिया. एक दिन अचानक लक्ष्मीकांत गुजर गये और मैं जैसे सड़क पर आ गया. पैसे खत्म हो गये. घर का किराया देने के लिए भी रुपये नहीं थे. मैं म्यूजिक अरेंजर बन गया था. पर मेरे खाते में कोई बड़ा हिट नहीं था. मैं लोगों से लगातार मिल रहा था. लेकिन, मेरे पास काम नहीं था. फिर भी हिम्मत नहीं छोड़ी. किसी ने मुझे एआर रहमान के बारे में बताया. उस समय उनकी फिल्म रोजा आयी थी. मैंने उसके गाने सुने, तो मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने रहमान से मिलने की कोशिश शुरू कर दी. काफी दिक्कतों के बाद उनसे मेरी मुलाकात हुई. मेरी आवाज सुन कर उन्होंने मुझे अपने नये अलबम वंदे मातरम के लिए कुछ करने को कहा. रहमान साहब को मेरा काम पसंद आया. उन्होंने गुलजार साहब से गीत लिखवाया और फिर मुझसे छैयां…छैयां…गवाया. भगवान की कृपा है कि उस दिन के बाद से आज तक मुझे पीछे पलट कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी.
सवाल : टीवी पर आने वाले रियलिटी शो को किस नजरिये से देखते हैं?
जवाब : रियलिटी शो प्रतिभाओं को निखारने और सामने लाने में बहुत उपयोगी है. यह बहुत बढ़िया कांसेप्ट है. सिर्फ रियलिटी शो का प्रस्तुतिकरण हसीन होना चाहिए. उसमें तमाशा नहीं होना चाहिए. संगीत होना चाहिए. स्टाइल होना चाहिए. लोग मुझसे पूछते हैं कि अब तक किसी शो में मैं क्यों नजर नहीं आता. अब इसका जवाब दे रहा हूं. मुझसे भी रियलिटी शो के लिए संपर्क किया गया है. अगले कुछ दिनों में शो शुरू होगा. मेरा रियलिटी शो दूसरों से अलग होगा. उसमें सिर्फ संगीत और स्टाइल होगा. तमाशे के लिए कोई जगह नहीं होगी.
सवाल : संगीत के क्षेत्र में करियर बनानेवाले युवाओं को क्या टिप्स देंगे?
जवाब : देखिये, मैंने एक बात सीखी है. दुनिया खास लोगों को ही जानती है. खास बनने के लिए खास चीजें करनी जरूरी होती हैं. गलत मेहनत से सफलता नहीं मिलती. सफलता के लिए सही मेहनत बहुत जरूरी होती है. मेहनत सही करने के लिए तो आज इंटरनेट के रूप में बहुत बड़ी सहूलियत है. सबके पास मोबाइल है. मोबाइल को गुरु के रूप में इस्तेमाल करिये. सुनिये. सुनने की आदत डालिये. जो जितना सुनेगा, वह उतना समझेगा. और समझने वाला ही करेगा. स्ट्रगल से मत डरिये. खुद पर भरोसा करिये. यह समझिये कि कोई खास अापके लिए दरवाजे पर खड़ा होकर इंतजार नहीं करता है. आपको खुद उसके पास पहुंचना होगा. मौका तलाश कर बाजी मारनी होगी.
सवाल : आज कल सेलिब्रेटी सोशल साइटों पर काफी कमेंट करते हैं. क्या यह मीडिया में बने रहने की ट्रिक है?
जवाब : ऐसा नहीं है. सोशल साइट पर अमिताभ बच्चन और लता मंगेशकर भी हैं. उनको मीडिया में बने रहने के लिए कोई ट्रिक की जरूरत नहीं है. हां, कुछ अपवाद हो सकते हैं. पर मैं समझता हूं कि अपनी बात रखने का सबको अधिकार है. सोशल मीडिया पर अपनी बात रखना गलत नहीं है. सच मानिए मेरा ट्विटर एकाउंट तक नहीं है. मुझसे बाजे-तबले की भाषा में बात करो. मेरा मानना है कि दुनिया खास लोगों को ही जानती है और खास लोग बहुत कम ही होते हैं.
सवाल : हाल ही में अजान को लेकर सोनू निगम का ट्विट काफी चर्चा में रहा. उनके ट्विट पर आपकी प्रतिक्रिया?
जवाब : सोनू की बात कहने का तरीका थोड़ा गलत हो सकता है, पर उसकी सारी बात गलत नहीं थी. मैं मानता हूं कि सच सिर्फ कड़वा नहीं होता. सच खूबसूरत भी होता है. सच हसीन और अच्छा भी होता है. सच परोसने का तरीका होना चाहिए. सच को चाशनी में डाल कर सामने रखें, तो वह कड़वा हरगिज नहीं लगेगा.
सवाल : आज कल बड़ी संख्या में कलाकार राजनीति में जा रहे हैं. ऐसा आपका कोई इरादा?
जवाब : हरगिज नहीं. मुझे नहीं लगता कि मैं राजनीति के लिए परफेक्ट हूं. मैं जो काम कर रहा हूं वही मुझको आता है. संगीत ही मेरा जीवन है. वही मेरा परिवार और प्यार है. संगीत को छोड़ कर मैं दूसरा कुछ करने की सोच भी नहीं सकता.
सवाल : झारखंड पर कुछ कहेंगे. कैसा लगा?
जवाब : सुंदर. यह अद्भुत प्रदेश है. सबसे पहले मैं 10-12 साल पहले झारखंड आया था. तत्कालीन मंत्री सुदेश महतो ने सिल्ली में कार्यक्रम पेश करने के लिए मुझे आमंत्रित किया था. मैं उनके साथ खुली जीप में घूमा. मोटरसाइकिल पर बैठ कर घूमा. आज भी याद कर मजा आ जाता है. उसके बाद तीन-चार बार आ चुका हूं. सिल्ली में ही एक दूसरे कार्यक्रम में टीम इंडिया के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धौनी की पत्नी ने मेरा स्वागत किया था. अंतिम बार राष्ट्रीय खेलों के उदघाटन समारोह में आया था. मुझे यहां का हरा-भरा माहौल बहुत आकर्षक लगता है.
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