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VIDEO : राज्यपाल ने संजय दत्त की दया याचिका खारिज की

Updated at : 24 Sep 2015 10:53 AM (IST)
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VIDEO : राज्यपाल ने संजय दत्त की दया याचिका खारिज की

मुंबई : महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने वर्ष 1993 में हुए मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराए गए अभिनेता संजय दत्त की जेल की शेष सजा को माफ करने के लिए किया गया एक आग्रह खारिज कर दिया है. संजय दत्त की शेष सजा रद्द करने के लिए याचिका उच्चतम न्यायालय […]

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मुंबई : महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने वर्ष 1993 में हुए मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराए गए अभिनेता संजय दत्त की जेल की शेष सजा को माफ करने के लिए किया गया एक आग्रह खारिज कर दिया है. संजय दत्त की शेष सजा रद्द करने के लिए याचिका उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कन्डेय काटजू ने दाखिल की थी जिनका तर्क था कि संजय आतंकवादी नहीं हैं, उन्होंने केवल गलती की थी.

एक अधिकारी ने बताया, ‘माफी के लिए आग्रह खारिज करते हुए राज्यापाल ने गृह विभाग के परामर्श को माना जिसमें उनसे सिफारिश की गई थी कि सजा से माफी का आग्रह ठुकरा दिया जाए क्योंकि संजय दत्त को सर्वोच्च (उच्चतम) अदालत ने दोषी ठहराया है. यह समझा गया कि उन्हें माफी देना गलत नजीर साबित होगा.’ संजय दत्त की शेष सजा रद्द करने के लिए याचिका उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कन्डेय काटजू ने दाखिल की थी जिनका तर्क था कि संजय आतंकवादी नहीं हैं, उन्होंने केवल गलती की थी.

56 वर्षीय अभिनेता वर्ष 1996 में जेल गए थे और 18 माह कैद में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी. वर्ष 2013 में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अपराध के लिए पांच साल कैद की सजा सुनाई थी. संजय द्वारा पूर्व में काटी गई 18 माह कैद को ध्यान में रखा गया और अब वह शेष 42 माह की सजा काट रहे हैं.

मई 2013 में सजा सुनाए जाने के बाद से संजय करीब 30 माह सलाखों के पीछे बिता चुके हैं. फरवरी 2016 में सजा पूरी होने के बाद वह रिहा किए जाएंगे. संजय मई 2013 में पुणे की यरवदा जेल भेजे जाने के बाद दो बार पेरोल पर और दो बार फरलो पर जेल से बाहर आ चुके हैं.

संजय अक्तूबर 2013 में 14 दिन के लिए फरलो पर जेल से बाहर आए और फिर यह अवधि एक पखवाडे के लिए बढा दी गई. जनवरी 2014 में संजय की 30 दिन की पेरोल भी अन्य 30 दिनों के लिए बढा दी गई थी. दिसंबर 2014 में उन्हें 14 दिन की फरलो दी गई थी. 27 अगस्त 2015 से वह एक बार फिर फरलो पर हैं.

याचिका में काटजू ने कहा, ‘जिस एकमात्र आरोप के लिए संजय को दोषी ठहराया गया है वह आरोप है कि उन्होंने एक प्रतिबंधित हथियार अपने पास रखा था.’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले पर सवाल नहीं उठा रहे हैं. काटजू ने लिखा कि हथियार रखने के लिए पांच साल की सजा सही है लेकिन संजय ने सजा सुनाए जाने से पहले, मार्च 2013 में 18 माह सलाखों के पीछे बिता कर पर्याप्त दंड भुगता है इसलिए यह मामला माफी के अनुकूल है.

उन्होंने कहा, ‘मेरी प्रार्थना है कि जब तक मेरी माफी याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, स्थगन दे दिया जाए क्योंकि अनुच्छेद 72 न केवल राष्ट्रपति को माफी देने का अधिकार प्रदान करता है बल्कि यह राष्ट्रपति को स्थगन देने या सजा के निलंबन का भी अधिकार प्रदान करता है. इसलिए जब तक माफी की याचिका पर फैसला होता है, मेरी प्रार्थना है कि राष्ट्रपति को सजा मुल्तवी कर देनी चाहिए.’ संजय दत्त के साथ साथ काटजू ने 1993 के बम विस्फोट मामले की एक अन्य दोषी जैबुन्निसा काजी को भी माफी देने का आग्रह किया था.

काटजू ने लिखा, ‘मैं यह आग्रह नहीं कर रहा हूं कि संजय को सेलिब्रिटी होने की वजह से माफी दे दी जाए. मैं जैबुन्निसा काजी को भी माफी देने का आग्रह कर रहा हूं जो सेलिब्रिटी नहीं, सह आरोपी हैं.’

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