बाल दिवस विशेष : बच्चों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं यह फिल्में

Updated at : 14 Nov 2019 9:02 AM (IST)
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बाल दिवस विशेष : बच्चों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं यह फिल्में

आज 14 नवंबर है यानी चिल्ड्रेन्स डे. इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था. चूंकि उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज इस मौके पर हम आपको बतायेंगे उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में जिन्हें देखकर बच्चे […]

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आज 14 नवंबर है यानी चिल्ड्रेन्स डे. इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था. चूंकि उन्हें बच्चों से बेहद लगाव था इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज इस मौके पर हम आपको बतायेंगे उन बेहतरीन फिल्मों के बारे में जिन्हें देखकर बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं. भले ही आज बच्चों के लिए कम फिल्में बनायी जाती हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब हिंदी सिनेमा में बच्चों के लिए खूब फिल्में बनीं. कुछ बेहतरीन फिल्में ऐसी हैं जो बाल दिवस पर बच्चों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है.

मिस्टर इंडिया

इस फिल्म को हिंदी सिनेमा के इतिहास में बच्चों के लिए बनी सबसे बेहतरीन फिल्म माना जाता है. अनिल कपूर और श्रीदेवी के लीड किरदारों वाली इस फिल्म में बच्चों का काफी अहम रोल था. किस तरह अनाथ बच्चे ‘एकता में बल है’ की तर्ज पर एकजुट रहते हुए गुंडों से अकेले लोहा लेते हैं, किस तरह वो गरीबी का सामना करते हुए भी खुश रहते हैं, हर परिस्थिति का सामना करते हैं, यह सब शेखर कपूर की इस फिल्म में बड़े ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया.

स्टेनली का डिब्बा

अमोल गुप्ते की यह फिल्म काफी एंटरटेनिंग है. हम अक्सर जो चीजें बच्चों को करने के लिए मना करते हैं, वही करते हैं और इस विचार को अमोल गुप्ते ने फिल्म में इमोशंस की चाशनी में लपेटकर बहुत ही अच्छे तरीके से परोसा है.

तारे जमीं पर

हमें किसी भी बच्चे को कमतर नहीं समझना चाहिए. हर बच्चा स्पेशल होता है, उसमें कुछ न कुछ खास जरूर होता है और आमिर खान की फिल्म ‘तारे जमीं पर’ ने इसी चीज को दिखायी है. कहानी एक ऐसे बच्चे की है जो पढ़ाई में बहुत ही कमजोर है, लेकिन आर्ट में उसका कोई सानी नहीं.

आइ एम कलाम

नील माधव पंडा की नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘आइ एम कलाम’ उन बच्चों के लिए किसी आदर्श से कम नहीं है जो माकूल परिस्थितियां और जरूरत की चीजें ना होने के बाद भी बड़ा बनने का सपना देखते हैं. यह फिल्म एक ऐसे ही लड़के की कहानी बताती है जो हर हाल में अंग्रेजी सीखना चाहता है.

अंजलि

यह एक ऐसी बच्ची की कहानी दिखाती है जो मानसिक रूप से विक्षित है और मरने वाली है, लेकिन जो चीज उसके पास है वो किसी के पास नहीं..और वो है लोगों को माफ करना और उन्हें स्वीकार करना, निस्वार्थ सभी से प्यार करना. लेकिन कैसे अंजलि अपनी यही खूबी सभी को सिखाकर इस दुनिया को अलविदा कह जाती है, वो बड़ा ही मार्मिक सीन पैदा करता है. इस फिल्म को 3 नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है और इसे 1991 में भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए ऑफिशयल एंट्री भी चुना गया था, लेकिन इसे कोई नॉमिनेशन नहीं मिला.

मकड़ी

बतौर निर्देशक ये विशाल भारद्वाज की पहली फिल्म थी. इसमें शबाना आजमी, मकरंद देशपांडे और श्वेता प्रसाद ने काम किया है. इस फिल्म की कहानी डरावनी होने के साथ-साथ काफी हंसाती भी है.

जजंतरम- ममंतरम

जिन बच्चों का सबसे अच्छा दोस्त टीवी रहा है. उन्होंने कभी ना कभी यह फिल्म जरूर देखी होगी. छोटे-छोटे लोगों के बीच एक बड़ा आदमी अपनी पहचान छोड़ कर आता है. उन छोटे लोगों के बीच एक राक्षस रहता है. वो उन्हें तंग करता है. वो उसे भी मजा चखा कर आता है.

तहान

गधे और एक लड़के की कहानी, गधा गुम हो गया है. किस्सा कश्मीर का है .इसके डायरेक्टर संतोष सीवान हैं. बता दें कि भारत के कुछ नामचीन सिनेमेटोग्राफर्स में उनका नाम लिया जाता है. इस फिल्म में अनुपम खेर, राहुल बोस और सारिका ने भी काम किया है.

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