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Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है फिल्‍म ''अर्जुन पटियाला''

Updated at : 27 Jul 2019 8:31 AM (IST)
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Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है फिल्‍म ''अर्जुन पटियाला''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: अर्जुन पटियाला निर्देशक: रोहित जुगराज कलाकार: दिलजीत दोसांज, कृति सेनन, वरुण शर्मा और अन्य रेटिंग: डेढ़ पिछले डेढ़ दशक में कॉमेडी जॉनर इतना बड़ा बन गया है कि आए दिन इसमें नए नए प्रयोग होते रहे हैं. अर्जुन पटियाला स्पूफ जॉनर वाली कॉमेडी फिल्म है विदेशों में लोकप्रिय कहानियों और […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: अर्जुन पटियाला

निर्देशक: रोहित जुगराज

कलाकार: दिलजीत दोसांज, कृति सेनन, वरुण शर्मा और अन्य

रेटिंग: डेढ़

पिछले डेढ़ दशक में कॉमेडी जॉनर इतना बड़ा बन गया है कि आए दिन इसमें नए नए प्रयोग होते रहे हैं. अर्जुन पटियाला स्पूफ जॉनर वाली कॉमेडी फिल्म है विदेशों में लोकप्रिय कहानियों और फिल्मों पर स्पूफ बनते रहे हैं और सफलता की नयी कहानी भी गढ़ते रहे हैं. लेकिन यहां स्पूफ जॉनर के नाम पर घिसी पिटी सी कहानी और बेदम पंचेस दर्शकों को नसीब हुए हैं.

कहानी पंजाब के पुलिसवाले अर्जुन पटियाला ( दिलजीत दोसांझ) की है. उसकी पोस्टिंग फ़िरोज़पुर में होती है. वो उस इलाके से क्राइम का खात्मा कर देना चाहता है इसके बाद वो अपने पुलिस साथी ओनिडा (वरुण शर्मा) के साथ मिलकर अपराधियों के बीच दरार डालने की कोशिश करते हैं ताकि वे एक दूसरे को मार दे. ऐसा होने भी लगता है.

कहानी में तेज तर्रार रिपोर्टर रितु (कृति) का भी एंगल है।जो अर्जुन के प्यार का भी एंगल है. वह एक के बाद एक अपराधियों की मौत पर अर्जुन के कामकाज पर सवालिया निशान लगाती है।दोनों के रिश्ते में दूरियां आ जाती है लेकिन ट्विस्ट अभी खत्म नहीं हुआ है जो फ़िल्म के आखिर में होगा. आखिर में होने से ट्विस्ट रोचक बन जाता है ऐसा ज़रूरी नहीं है.

फ़िल्म की कहानी बहुत ही घिसी पिटी है तो क्लाइमेक्स और भी. अजीबो गरीब ट्विस्ट और टर्न से आगे बढ़ती है. जिसपर हंसी कम सिर पीटने का मन ज़्यादा करता है.

फ़िल्म को देखते हुए महसूस होता है कि कुछ दृश्यों की फ़िल्म में ज़रूरत नहीं थी. उन्हें रखकर बस कहानी में और रायता फैलाया गया है. रही सही कसर ज़रूरत से ज़्यादा ग्राफिक्स के इस्तेमाल ने कर दी है. कई बार सीन से जुड़ा मकसद पूरी तरह से स्पष्ट था फिर भी ग्राफ़िक्स को क्यों थोपा गया था समझ नहीं आरहा था.

फ़िल्म का स्क्रीनप्ले इतना कमज़ोर है तो किरदार कैसे प्रभावी हो सकते हैं. अर्जुन पटियाला के किरदार के लिए दिलजीत ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत करते दिखते हैं जो किसी भी अभिनेता की कमज़ोरी कह सकते हैं. कृति परदे पर खूबसूरत दिखी हैं लेकिन अभिनय में वो भी कमतर रह गयी हैं. वरुण शर्मा की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है लेकिन उसमें नयापन नहीं है. उनकी पुरानी फिल्मों के दृश्य ही यहां दोहराए जा रहे हैं ऐसा लगता है. अभिनय के भरोसेमंद नाम सीमा पाहवा,मोहम्मद जीशान ,रोनित रॉय इस फ़िल्म में है ज़रूर लेकिन उनके करने को कुछ फ़िल्म में खास नहीं है. फ़िल्म का गीत संगीत औसत है.

कुलमिलाकर दर्शकों को देखने के लिए सिफारिश करने जैसा इस फ़िल्म में कुछ भी नहीं है.

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