जन्मदिन पर विशेष : भूपेन हजारिका, जिसकी आवाज ने हर जुबान में घोली मिठास

-शिकोह अलबदर- ओ गंगा तुम, गंगा तुम बहती हो क्यों और दिल हूम हूम करे को अपनी आवाज देने वाले डाॅ भूपेन हजारिका हमारे बीच तो नहीं हैं लेकिन अलग अलग भाषाओं में उनकी आवाज हमारे कानों में हमेशा गूंजती रहेगी. आज मशहूर लेखक, गायक, संगीतकार डाॅ भूपेन हजारिका का जन्मदिन है. दक्षिण एशिया के […]
-शिकोह अलबदर-
ओ गंगा तुम, गंगा तुम बहती हो क्यों और दिल हूम हूम करे को अपनी आवाज देने वाले डाॅ भूपेन हजारिका हमारे बीच तो नहीं हैं लेकिन अलग अलग भाषाओं में उनकी आवाज हमारे कानों में हमेशा गूंजती रहेगी.
1993 में जब फिल्म ‘रूदाली’ रिलीज हुई तो उस समय इस फिल्म ने काफी हलचल मचाया था. सामाजिक तानेबाने को दर्शाती फिल्म के माध्यम से महिलाओं की स्थिति को जिस तरह दिखाया, काफी चर्चित रहा था. वह फिल्म प्रोडयूसर भूपेन हजारिका ही थे जिन्होंने इस फिल्म के गानों के लिए भी अपनी आवाज भी दी. बहुमुखी प्रतिभा के धनी हजारिका ने अपने गीत, संगीत और गायकी से सभी का दिल जीता. उन्होंने असम और बांग्ला सहित अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाया.
आठ सितंबर 1926 को असम के तिनसुकिया के सदिया गांव में जन्मे हजारिका अपने परिवार के दस बच्चों में सबसे बड़े थे. गायन जैसी कलाओं के प्रति रूझान उनकी मां शांतिप्रिया के कारण ही हुआ था. उनके पिता एक शिक्षक थे. बचपन से ही असम की लोकगीतों के प्रति उनके आकर्षण ने ही उन्हें गायन के क्षेत्र में खींचा. हजारिका ने दस साल की उम्र से ही गाना लिखना आरंभ कर दिया था. ठीक ग्यारहवें साल में आॅल इंडिया रेडियो के लिए अपनी एक प्रस्तुति देकर लोकप्रियता हासिल की. 1939 में बनी इंद्रमालती नामक असम भाषा में बनी फिल्म में अपनी गीत दिया और एक स्टार के रूप में कामयाबी का सेहरा बांधा.
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बाद के समय में उन्होंने भारत की आजादी में हिस्सा लिया. इसी समय उनकी मुलाकात असम के कई फिल्मकारों, लेखकों व कवियों से हुई. इसी समय उन्होंने असम के कवि व फिल्म निर्माता ज्योति प्रसाद अगरवाला से हुई जिन्होंने इंद्रमालती फिल्म निर्देशित किया था. पढ़ाई और आजादी के बीच के संबंध को जानने का मौका मिला और इसका प्रभाव उनके लेखनी पर पड़ा.
हजारिका ने बनारस यूनिवर्सिटी से पाॅलिटिकल सांइस में ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. इस दौरान भी उनका गीत संगीत से गहरा नाता रहा. वे 1949 में अमेरिका गये और वहां के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से माॅस काॅम्यूनिकेशन में पीएचडी किया. वहीं न्यूयाॅर्क में ही उनकी मुलाकात प्रियमबदा पटेल से हुई जिससे उन्होंने विवाह किया. भूपेन हजारिका ने अमेरिका में वहां के लोक गीतों को जानने समझने के साथ -साथ वहां के सिविल राइट्रस आंदोलन में भी हिस्सा लिया.
1952 में वह कोलकाता आ गये. यहां एक मकान किराये पर लिया. यहीं उन्होंने अपनी मशहूर गीत लिखी जिसके बोल थे और गंगा तू बहती है क्यों. फिल्म गांधी टू हिटलर में भी उन्होंने वैष्णव जन भजन को अपनी आवाज दी. 1992 में उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया.
हिंदी फिल्मों में रूदाली के अलावा साज, दरम्यां, गजगामिनी, दमन और पपीहा जैसी फिल्मों के अलावा असमिया भाषाओं में बनी कई फिल्मों को अपने खूबसूरत संगीत से संवारा.
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