Google ने Doodle बनाकर ''ट्रेजेडी क्‍वीन'' मीना कुमारी को किया याद

Updated at : 01 Aug 2018 11:37 AM (IST)
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Google ने Doodle बनाकर ''ट्रेजेडी क्‍वीन'' मीना कुमारी को किया याद

नयी दिल्ली: सीधे दिल पर दस्तक देने वाली अपनी बेहतरीन अदाकरी और संवाद अदायगी के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली भारतीय सिनेमा की ‘ट्रेजेडी क्वीन’ मीना कुमारी के 85वें जन्मदिन के मौके पर सर्च इंजन गूगल ने आज डूडल बनाकर उन्हें याद किया. अजीमोशान अदाकारा होने के साथ बेहतरीन शायरा और […]

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नयी दिल्ली: सीधे दिल पर दस्तक देने वाली अपनी बेहतरीन अदाकरी और संवाद अदायगी के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली भारतीय सिनेमा की ‘ट्रेजेडी क्वीन’ मीना कुमारी के 85वें जन्मदिन के मौके पर सर्च इंजन गूगल ने आज डूडल बनाकर उन्हें याद किया. अजीमोशान अदाकारा होने के साथ बेहतरीन शायरा और गायिका मीना कुमारी अपनी नज्में ‘नाज’ के तख़ल्लुस से लिखती थीं. मुंबई में एक अगस्त 1932 को मुस्लिम परिवार में हुआ था.

मीना कुमारी गूगल डूडल में लाल साड़ी पहने बेहद भावुक नजर आ रहीं हैं और पीछे गूगल लिखा है. उनके अनगिनत फिल्मी किरदारों में अभिनय से बयां किया गया दर्द इस डूडल में भी उनके चेहरे पर नजर आ रहा है.

महजबीन बानो ऊर्फ मीना कुमारी की जोड़ी हिन्दी सिनेमा में गुरूदत्त, राजकुमार और देवानंद के साथ बेहद सुन्दर बनी. कौन भूल सकता है साहिब, बीबी और गुलाम की ‘छोटी बहू’ को या फिर पाकीजा की ‘माहजबीन’ या मेरे अपने की ‘आनंदी देवी’ को. गुरूदत्त के साथ 1962 में आई साहिब, बीबी और गुलाम के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला.

उन्होंने बैजू बावरा, परिणिता और काजल के लिये भी यह पुरस्कार जीता. मीना कुमारी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1939 में ‘लैदरफेस’ से की थी, लेकिन एक अदाकारा के तौर पर उन्हें पहचान वर्ष 1952 में आई फिल्म ‘बैजूबावरा’ से मिली.

उन्होंने ‘परिणीता’ (1953), ‘एक ही रास्ता’ (1956), ‘शारदा’ (1957), शरारत (1959) ‘कोहिनूर’ (1960), ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ (1960), साहिब बीबी और ग़ुलाम (1962), सांझ और सवेरा (1964) फूल और पत्थर’ (1966) जैसी तमाम हिट फिल्में दी. बेहतरीन अदाकारी के दम पर ही आज उन्हें हिंदी सिनेमा की महिला गुरु दत्त और भारतीय सिनेमा की सिंड्रेला कह कर संबोधित किया जाता है.

मीना कुमारी की आखिरी फिल्म वर्ष 1972 में आई ‘पाकीजा’ (1972) थी, जो अदाकारा के अचानक निधन के बाद एक हिट साबित हुई. उनका निधन महज 38 वर्ष की आयु में 31 मार्च 1972 को हो गया था. उनके निभाये फिल्मी किरदारों की तरह उनका असल जीवन भी किसी ट्रेजेडी से कम नहीं रहा.

मीना कुमारी के पिता मास्टर अली बक्स पारसी थियेटर के जानेमाने नाम थे. वह मूल रूप से भेड़ा के रहने वाले थे, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है. अदाकारा की मां इकबाल बेगम ऊर्फ प्रभावती देवी भी विवाह से पहले ‘कामिनी’ के नाम से स्टेज कार्यक्रम, नृत्य और अदाकारी किया करती थीं.

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