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जन्मदिन पर विशेष : स्मिता ने अभिनय को दिये नये मायने

-नवीन शर्मा- स्मिता पाटिल हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभावान अभिनेत्रियों में से एक हैं. उन्होंने अपनी कई फिल्मों में एक से बढ़कर एक यादगार रोल निभाये हैं. इनकी एकदम आरंभिक फिल्मों में निशांत, मंथन और भूमिका हैं. श्याम बेनेगल ने इनकी प्रतिभा को पहचान कर बेहतरीन इस्तेमाल किया है. मुझे स्मिता की अर्थ फिल्म काफी […]

-नवीन शर्मा-

स्मिता पाटिल हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभावान अभिनेत्रियों में से एक हैं. उन्होंने अपनी कई फिल्मों में एक से बढ़कर एक यादगार रोल निभाये हैं. इनकी एकदम आरंभिक फिल्मों में निशांत, मंथन और भूमिका हैं. श्याम बेनेगल ने इनकी प्रतिभा को पहचान कर बेहतरीन इस्तेमाल किया है.

मुझे स्मिता की अर्थ फिल्म काफी पसंद है. हालांकि ये फिल्म पूरी तरह शबाना आजमी के इर्द-गिर्द है लेकिन जिस दमदार तरीके से स्मिता अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं वो शबाना जैसी अभिनेत्री को कड़ी टक्कर देती नजर आती हैं. इस फिल्म में उन्होंने कुछ हद तक मानसिक रोगी का अभिनय किया था. अपने पूरे हावभाव और आवाज से वे वैसी ही नजर आती हैं.
1981 में आयी ‘चक्र’ फिल्म में स्मिता का अभिनय जबर्दस्त ऊंचाइयों को छूता नजर आता है. वे झुग्गी-झुपड़ी की एक गरीब महिला के किरदार को एकदम सहज तरीके से निभातीं हैं. उन महिलाओं के रहन-सहन, बोलचाल और शैली को वो पूरी तरह से आत्मसात कर लेतीं हैं. इस फिल्म में उनके शानदार अभिनय को काफी तारीफ मिली थी. इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. इससे पहले वे ‘भूमिका’ फिल्म के लिए में यह पुरस्कार प्राप्त कर चुकी थीं.
स्मिता पाटिल की एक और यादगार फिल्म है ‘बाजार’ इसमें भी वे हैदराबादी महिला के किरदार को जीवंत रूप देती हैं. स्मिता की आवाज में एक अलग तरह की कशिश है. केतन मेहता की मिर्च मसाला में भी वे महिला सशक्तीकरण के एक यादगार किरदार को निभाती हैं. अपनी इज्जत की रक्षा के लिए वह पुलिस, जमींदार के गठजोड़ के साथ ही पूरे गांव से टकराती हैं. उन्होंने अपने दमदार अभिनय से नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी को कड़ी टक्कर दी है. मंडी और अर्द्धसत्य में हालांकि उनका रोल छोटा था पर उसे भी वो पूरी शिद्दत से निभातीं हैं.
स्मिता ने कई ऐसी कॉमर्शियल फिल्मों में भी काम किया जिसमें वो अगर काम ना भी करती तो अच्छा रहता. जैसे नमकहलाल और डांस-डांस जैसी दर्जनों फिल्में हैं. उन्होंने अपनी अंतिम फिल्मों में से एक वारिस में भी अच्छा काम किया है. कुल मिला कर देखा जाये तो आर्ट फिल्मों में हमें शबाना और स्मिता के बीच जबर्दस्त मुकाबला नजर आता है.इनमें से शायद अधिक फिल्में करने के कारण शबाना को भले नंबर वन कहना पड़े पर मुझे व्यक्तिगत रूप से स्मिता ज्यादा पसंद आती हैं.
स्मिता को बहुत सुंदर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सांवले रंग की इस नायिका में एक अलग तरह का आकर्षण था. सबसे अफसोस इस बात है कि इतनी समर्थ अभिनेत्री हमें बहुत जल्दी छोड़ (सिर्फ 36 वर्ष की उम्र में) कर चली गई. उनकी कमी काफी खलती है.उनके स्तर की आज एक भी अभिनेत्री नजर नहीं आती है.
(फेसबुक वॉल से साभार)

Prabhat Khabar Digital Desk
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