#Film_Review : अनछुए विषय को शानदार तरीके से पेश करती है #Raagdesh
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Jul 2017 5:14 PM
फिल्म – रागदेशनिर्माता – लोकसभा टीवीनिर्देशक – तिग्मांशु धूलियाकलाकार – कुणाल कपूर, मोहित मारवाह, अमित साध, केनी देसाई, केनी, कंवलजीत और अन्यरेटिंग – ढाई ।। उर्मिला कोरी ।। पान सिंह तोमर और साहब बीवी और गैंगस्टर जैसी फिल्में बना चुके निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की ‘राग देश’ एक पीरियड ड्रामा फिल्म है, जो 1945 में हुए […]
फिल्म – रागदेश
निर्माता – लोकसभा टीवी
निर्देशक – तिग्मांशु धूलिया
कलाकार – कुणाल कपूर, मोहित मारवाह, अमित साध, केनी देसाई, केनी, कंवलजीत और अन्य
रेटिंग – ढाई
।। उर्मिला कोरी ।।
पान सिंह तोमर और साहब बीवी और गैंगस्टर जैसी फिल्में बना चुके निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की ‘राग देश’ एक पीरियड ड्रामा फिल्म है, जो 1945 में हुए अनछुए ऐतिहासिक मुकदमे की कहानी कहता है. आजाद हिंद फौज के सिपाहियों शाहनवाज खान, गुरबख्श सिंह ढिल्लों और प्रेम सहगल पर लाल किले में चले मुकदमे पर कहानी पर आधारित है. अंग्रेजों की मंशा उन्हें दोषी करार देकरउसी लाल किले में फांसी देने की थी. लेकिन किस तरह से उस मुकदमे में अंग्रेजों ने मुंह की खायी थी, इसी घटना पर यह फिल्म आधारित है.
फिल्म में इस मुकदमे के साथ-साथ आजाद हिंद फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर भी कहानी छूती है. फिल्म में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नीतियों और आजाद हिंद फौज की कार्यप्रणाली को दिखाने की कोशिश की गयी है, लेकिन सतही तौर पर. फिल्म का विषय जितना खास है. फिल्म का रिसर्च वर्क उतना ही कमाल का है. इस पर काफी मेहनत की गयी है. कॉस्ट्यूम, सेट और जापानी भाषा से लेकर ब्रिटिश इंग्लिश आदि के जरिये आजादी से पहले के माहौल को बखूबी सामने लानेकी कोशिश की गयी है. इतिहास के नजरिये से फिल्म में तारीख और जानकारी की भरमार है.
कमजोर पक्ष की बात करें, तो फिल्म का स्क्रीनप्ले कहानी के साथ बखूबी न्याय नहीं कर पाया है. अगर इसकी एडिटिंग पर काम किया गया होता, तो यह एक बेहतरीन फिल्म हो सकती थी. फिल्म की रफ्तार भी धीमी है. फिल्म में कहानी अतीत और वर्तमान में जिस तरह से आती-जाती है, उससे थोड़ा कन्फ्यूजन होता है. अपनी इन खामियों की वजह से बेहतरीन फिल्म बनने से चूक जाती है. अभिनय की बात करें तो कुणाल कपूर एक उत्कृष्ट अभिनेता हैं, वह अपनी भूमिका में सहज रहे हैं. अमित साध का भी बतौर अभिनेता अच्छा प्रदर्शन रहा है. हां, तीनों में सबसे ज्यादा मोहित मारवाह प्रभावशाली रहे हैं.
केनी देसाई ने भुलाभाई देसाई के रूप में फिल्म में जो अदालती मोनोलॉग दृश्य पेश किया है, खास कर क्लाइमेक्स वाला. वह फिल्म के सबसे अच्छे दृश्यों में से है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रूप में केनी बासुमतारी ने अपने सीमित रोल में अच्छा काम किया है. फिल्म के बाकी के कलाकारों का काम भी अच्छा है. फिल्म के गीत-संगीत की बात करें, तो गाने अच्छे हैं. गीत ‘कदम कदम बढ़ाये जा’ एक अलग ही जोश भरता है. फिल्म के संवाद प्रभावी हैं. कुल मिलाकर यह फिल्म कुछ कमजोरियों के बावजूद अपने अनछुए विषय और कलाकारों के अभिनय की वजह से देखी जा सकती है.
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