छठ पर्व के जरिये दूसरे प्रदेशों में भी फैल रही है बिहार की संस्कृति : देवी

भोजपुरी की चर्चित लोकगायिका देवी का इस साल छठ पूजा पर एलबम ‘बलम चली छठी घाटे’ रिलीज हुआ है. इसके कर्णप्रिय गीत लोगों की जुबान पर हैं. खास कर ‘गंगा जी के घटिया’ और टाइटल सांग ‘बलम चली छठी घाटे’ लोकप्रिय हो चुका है. गायिका देवी अपने छठ गीतों के कारण ही विशेष रूप से […]
भोजपुरी की चर्चित लोकगायिका देवी का इस साल छठ पूजा पर एलबम ‘बलम चली छठी घाटे’ रिलीज हुआ है. इसके कर्णप्रिय गीत लोगों की जुबान पर हैं. खास कर ‘गंगा जी के घटिया’ और टाइटल सांग ‘बलम चली छठी घाटे’ लोकप्रिय हो चुका है.
गायिका देवी अपने छठ गीतों के कारण ही विशेष रूप से जानी जाती हैं. उनके छठ गीत हर घर में सुने जाते हैं. छठ पर्व पर देवी कहती हैं कि जब भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र को कुष्ठ रोग हो गया, तो उसके निवारणार्थ ऋषि-मुनियों एवं ब्राह्मणों ने छठ व्रत का अनुष्ठान किया और सूर्य भगवान की पूजा की.
यह पहली छठ पूजा थी. वे भक्तगण एवं महात्मागण कुछ कारणवश जब विस्थापित होकर मगध प्रदेश में आये तो बिहार में छठ पूजा शुरू हो गया. आज छठ पर्व बिहार के साथ-साथ दूसरे कई प्रदेशों में होने लगा है. इस तरह बिहार की संस्कृति चारों ओर फैल रही है. छठ पर्व मुख्य रूप से संतान की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है. आज यह पर्व बिहार का महापर्व बन चुका है.
एक बात और कहना चाहूंगी कि छठ को आंतरिक और बाह्य शुचिता के रूप में मनाया जाये, तो बेहतर होगा. रासायनिक प्रदूषण से बचने हेतु हर संभव प्रयास होना चाहिए. छठ पर्व में आस्था तो है ही, इसका वैज्ञानिक पक्ष भी है. सूरज देव हमें जीवन, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य सभी कुछ देते हैं. उनके प्रति अहो भाव प्रदर्शित करने का एक तरीका भी है- छठ पूजा. मेरी ओर से प्रभात खबर के सभी पाठकों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
– संजीव कुमार आलोक
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