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लिव-इन पार्टनर घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत का दावा नहीं कर सकती : डिंपल कपाड़िया

Updated at : 05 Mar 2015 8:39 PM (IST)
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लिव-इन पार्टनर घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत का दावा नहीं कर सकती : डिंपल कपाड़िया

मुंबई : राजेश खन्ना की पत्नी डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार ने दिवंगत अभिनेता की कथित लिव इन पार्टनर द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गयी कानूनी कार्यवाही को निरस्त करने का आज बंबई उच्च न्यायालय से अनुरोध किया. उन्होंने दावा किया कि इस तरह के संबंधों में रहने वाली महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत […]

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मुंबई : राजेश खन्ना की पत्नी डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार ने दिवंगत अभिनेता की कथित लिव इन पार्टनर द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गयी कानूनी कार्यवाही को निरस्त करने का आज बंबई उच्च न्यायालय से अनुरोध किया. उन्होंने दावा किया कि इस तरह के संबंधों में रहने वाली महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की मांग नहीं कर सकती. खन्ना की कथित लिव इन पार्टनर अनीता आडवाणी ने खन्ना की अलग रह रही पत्नी डिंपल, उनकी बेटियों रिंकी और ट्विंकल तथा दामाद अक्षय कुमार के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं को संरक्षण कानून के तहत 2013 में एक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक शिकायत दायर की थी.
आडवाणी ने दावा किया था कि खन्ना की मौत के बाद उनका उपनगरीय बंगला उनसे खाली कराया गया था. उन्होंने अपनी शिकायत में मासिक गुजारा भत्ते के साथ ही बांद्रा में तीन शयनकक्षों के एक फ्लैट की मांग की थी. एक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तब उन्हें नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था. इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उनके खिलाफ कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की.
डिंपल के वकील शिरीष गुप्ते ने न्यायमूर्ति एमएल तहिलयानी से कहा, ‘‘अगर यह स्वीकार भी कर लिया जाता है कि शिकायतकर्ता (अनीता आडवाणी) राजेश खन्ना के साथ सह जीवन गुजार रही थीं तब भी वह खन्ना की अलग रह रही पत्नी और परिवार से किसी राहत की मांग नहीं कर सकतीं, जिन्होंने कभी उनके साथ छत साझा नहीं किया.’’ कुमार की तरफ से प्रतिनिधित्व कर रहे महेश जेठमलानी ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि जो महिला किसी विवाहित व्यक्ति के साथ सहजीवन के रिश्ते में रहती है वो राहत पाने के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों का सहारा नहीं ले सकती.
कपाड़िया ने याचिका में दावा किया कि वह खन्ना की कानूनन पत्नी थीं और उनके पति की संपत्ति में कोई अन्य महिला हिस्सा नहीं मांग सकती. न्यायमूर्ति एमएल तहलियानी मामले में 10 मार्च को दलीलों पर सुनवाई जारी रखेंगे.
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