1922 Pratikar Chauri Chaura: स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित और ब्रिटिश शासकों को बेनकाब करती है फिल्म

Published by : Ashish Lata Updated At : 28 Jun 2023 11:53 AM

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1922 Pratikar Chauri Chaura: चौरी चौरा घटना पर आधारित '1922 प्रतिकार चौरी चौरा' रिलीज से पहले चर्चा में बनी हुई है. फिल्म उन ब्रिटिश शासकों के पाखंड और झूठ को उजागर करती है, जिन्होंने घटना में शहीदों के रिकॉर्ड में हेराफेरी की थी.

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1922 Pratikar Chauri Chaura: “1922 प्रतिकार चौरी चौरा” एक देशभक्तिपूर्ण फिल्म है, जो चौरी चौरा घटना के आसपास के ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डालती है. फिल्म का उद्देश्य ब्रिटिश शासन काल की छिपी सच्चाइयों को उजागर करना है. यह फिल्म उन स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने का प्रयास करती है, जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया, लेकिन आज कोई उन्हें जानता तक नहीं है. यह उन ब्रिटिश शासकों के पाखंड और झूठ को भी उजागर करती है, जिन्होंने घटना में शहीदों के रिकॉर्ड में हेराफेरी की थी. यह फिल्म कहीं ना कहीं चौरी चौरा क्रांति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञानवर्धक भाषण से भी प्रेरित प्रतीत होती है.

1922 प्रतिकार चौरी चौरा की क्या है कहानी

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान कई अन्याय किये गये, जिसमें भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर की चोरी भी शामिल हैं. उन्होंने भारतीयों पर भारी कर लगाया, दमनकारी नीतियां लागू कीं और स्थानीय इंडस्ट्री का दमन किया. यह फिल्म अंग्रेजों की ओर से गरीब बुनकरों के अंगूठे काटने जैसे अत्याचारों पर प्रकाश डालती है. “1922 प्रतिकार चौरी चौरा” फिल्म 30 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

क्या है चौरी चौरा घटना

चौरी चौरा कांड के दौरान, लाल गेरूआ वस्त्र पहने लगभग 4,000 प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह ब्रिटिश पुलिस के अत्याचारों के खिलाफ विरोध करने के लिए एकजुट हुआ था. ब्रिटिश पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप दो सौ से अधिक स्वयंसेवकों की मौत हो गई. जवाबी कार्रवाई में भीड़ ने थाने के अंदर 23 पुलिसकर्मियों को जला कर मार दिया था. इसके बाद ब्रिटिश पुलिस ने स्वयं सेवकों के रिकॉर्ड नष्ट कर दिये थे और घटना के बारे में गलत जानकारी फैलाई और कई निर्दोष व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया.

पंडित मदन मोहन मालवीय ने निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

पंडित मदन मोहन मालवीय, जिन्हें महामना के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने 19 स्वतंत्रता सेनानियों को मौत की सजा से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने क्रांतिकारियों के लिए लड़ाई लड़ी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया. फिल्म स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को श्रद्धांजलि देती है और इसका उद्देश्य अहिंसा, शाकाहार और हिंदू धर्म की महिमा और समृद्ध संस्कृति को फिर से स्थापित करना है. फिल्म को देश की आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न का हिस्सा माना जा रहा है.

चौरी चौरा घटना पर आधारित है फिल्म

यह फिल्म चौरी चौरा घटना की जांच के लिए द लीडर अखबार के संपादक सीवाई चिंतामणि की ओर से नियुक्त एक पत्रकार के इर्द-गिर्द घूमती है. पत्रकार इलाहाबाद से गोरखपुर की यात्रा करता है, जहां उसकी मुलाकात बाबा राघवदास से होती है, जो घटना के पीछे की जमीनी हकीकत का खुलासा करते हैं. क्रांतिकारी शराब, मछली और मांस बेचने का विरोध कर रहे थे, जिसे ब्रिटिश पुलिस ने अस्वीकार्य माना. पत्रकार को पता चला कि निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 172 को मृत्युदंड मिला. बाबा राघवदास ने हाईकोर्ट में केस लड़ने के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय से मदद मांगी.

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Ashish Lata

लेखक के बारे में

By Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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