Rajasthan Election : वसुंधरा राजे की नाराजगी के बीच किस तरह भाजपा लहराएगाी अपना झंडा, जानिए पूरी रणनीति
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 24 Nov 2023 3:15 PM
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जो जंग चल रही है उससे आलाकमान परेशान है. वहीं दूसरी ओर राजस्थान में बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाए जाने की वजह से नाराज चल रही हैं. हालांकि बीजेपी ने अबतक किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया है.
राजस्थान चुनाव : राजस्थान विधान सभा चुनाव के लिए 25 नवंबर को मतदान होना है. राजस्थान में अभी कांग्रेस की सरकार है और अशोक गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बीजेपी किसी भी हाल में राजस्थान को जीतना चाहती है. वहीं कांग्रेस की स्थिति भी राजस्थान में बहुत अच्छी नहीं हैं और वह बीजेपी से कम अपने लोगों से ज्यादा परेशान है. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जो जंग चल रही है उससे आलाकमान परेशान है. वहीं दूसरी ओर राजस्थान में बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाए जाने की वजह से नाराज चल रही हैं. हालांकि बीजेपी ने अबतक किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया है, लेकिन वसुंधरा राजे को दरकिनार किए जाने की वजह से उनके समर्थकों में निराशा है और जिसका असर चुनाव पर स्पष्ट रूप से पड़ेगा.
इन परिस्थितियों में आखिकार बीजेपी किस तरह राजस्थान को अपने पाले में लाएगी और इसके लिए उसकी रणनीति क्या है, यह जानना बहुत ही जरूरी है. दरअसल बीजेपी राजस्थान विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ‘मोदी मैजिक’ पर भरोसा कर रही है. वहीं अगर बीजेपी की रणनीति पर गौर करें तो हम पाएंगे कि बीजेपी इस चुनाव में सात सांसदों को भी लेकर आई है जिनमें राज्यवर्धन सिंह राठौर जैसे नेता प्रमुख हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी का संगठन राजस्थान में बहुत ही मजबूत है.
यही वजह है कि पार्टी ने चुनाव की तैयारी बहुत पहले ही कर ली थी और उम्मीदवारों की सूची को जारी करने में काफी सूझबूझ दिखाई. इस बार के राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जातिगत समीकरण को संतुलित करने के लिए गुर्जर और मीना जातियों के साथ -साथ दलित वोटर्स पर फोकस किया है. यही वजह है कि पार्टी ने गुर्जर और मीना समुदाय के कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला और सांसद किरोड़ी लाल मीना को टिकट दिया है. इतना ही नहीं इस बार बीजेपी ने दलितों को साधने की कोशिश में उनके मुद्दों को बखूबी उठाया है, जो इस चुनाव में उनकी ताकत बनने जा रहे हैं.
वहीं बीजेपी पार्टी में व्याप्त गुटबाजी से परेशान है. वसुंधरा राजे की नाराजगी से निपटने के लिए ही पार्टी ने पीएम मोदी को आगे किया है और केंद्र की योजनाओं को प्रदेश में लागू करने की बात कर रहे हैं. इसके अलावा पार्टी ने महिला आरक्षण और पेपर लीक जैसे मुद्दों को भी उठाया है, जो उनके लिए बड़े मुद्दे बन सकते हैं. यानी एंटी इंकम्बेंसी का फायदा भी बीजेपी जोर-शोर से इस चुनाव में लेना चाहती है, लेकिन बड़ा खतरा उसे वसुंधरा राजे की नाराजगी से हो सकता है. राजस्थान में 200 विधानसभा क्षेत्र हैं और बहुमत का आंकड़ा 101 है. इस बार भी 199 विधानसभा क्षेत्र पर चुनाव हो रहे हैं, 25 नवंबर को मतदान होगा और तीन दिसंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे. प्रदेश में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही है, लेकिन कई सीटों पर बागियों की वजह से त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबले भी हो रहे हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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