Lok Sabha Election Results 2024 : लोकसभा में इस बार 74 महिला सांसद, जानिए सबसे युवा एमपी प्रिया सरोज को

Edited by Rajneesh Anand
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यूपी के मछलीशहर एससी सुरक्षित सीट से समाजवादी पार्टी की 25 वर्षीय उम्मीदवार प्रिया सरोज सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल हो गई हैं. प्रिया सरोज ने पहली बार चुनाव लड़ा था और जीतकर संसद पहुंची हैं.

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Lok Sabha Election Results 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 में 74 महिला सांसद चुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं, ये 74 सांसद विभिन्न पार्टियों से हैं. 2019 से अगर तुलना करें महिला सांसदों की संख्या में थोड़ी कमी आई है, क्योंकि पिछली लोकसभा में 78 महिलाएं चुनकर आई थीं. कुल 543 सीट में से 74 सीट पर महिला उम्मीदवार विजयी हुई हैं, यानी लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 13.6 प्रतिशत का है. ज्ञात हो कि संसद ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का विधेयक पास कर दिया है, इस लिहाज से यह आंकड़ा काफी कम है.

महिलाओं की संख्या में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि

इस चुनाव में महिलाओं की जीत का प्रतिशत भले ही कम हुआ, लेकिन उम्मीदवारों की संख्या में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. अगर हम 2009 से 2024 तक का आंकड़ा देखें तो पाएंगे कि महिला उम्मीदवारों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज हुई है. 2009 में जहां सात प्रतिशत महिलाएं चुनाव मैदान में थीं, वहीं 2024 में उनकी संख्या बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो गई. वर्ष 2019 में नौ प्रतिशत, 2014 में आठ प्रतिशत और 2009 में सात प्रतिशत महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं.

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चुनाव जीतने वाली सबसे युवा सांसद

लोकसभा चुनाव 2024 में सबसे अधिक उम्मीदवार बीजेपी की जीतीं. बीजेपी ने 69 महिलाओं को टिकट दिया था, जिसमें से 30 महिलाएं चुनाव जीतीं. कांग्रेस ने 41 महिलाओं को टिकट दिया था, जिसमें से 14 महिलाएं जीतीं. टीएमसी की 11 महिलाएं चुनाव जीतीं, समाजवादी पार्टी ने सात महिलाओं को टिकट दिया था जिनमें से 4 विजयी हुईं, द्रमुक की तीन और जेडीयू और लोजपा (आर) की दो-दो महिला उम्मीदवार चुनाव जीतीं हैं. इस बार के चुनाव में हेमा मालिनी, महुआ मोइत्रा, सुप्रिया सुले, डिंपल यादव, रोहिणी आचार्य, मीसा भारती, कंगना रनौत जैसी उम्मीदवारों ने सबका ध्यान खिंचा. वहीं यूपी के मछलीशहर से समाजवादी पार्टी की 25 वर्षीय उम्मीदवार प्रिया सरोज और कैराना से 29 वर्षीय इकरा चौधरी जीत हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की उम्मीदवारों में शामिल हैं. प्रिया सरोज ने पहली बार चुनाव लड़ा था और जीतकर संसद पहुंची हैं. वे मछलीघर एससी सुरक्षित सीट से सांसद चुनी गई हैं, उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार बीपी सरोज को हराया.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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