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इस IRS अफसर ने बदल दी पीरियड्स की सोच, 15000 लड़कियों तक पहुंचाए री-यूजेबल पैड्स

Updated at : 27 Feb 2026 5:45 PM (IST)
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Megha Bhargava IRS

Megha Bhargava IRS (PC- लिंक्डइन)

Dr Megha Bhargava IRS: डॉ मेघा भार्गव वर्तमान में इंकम टैक्स विभाग में एडिशनल कमीश्नर हैं. मेघा भार्गव लड़कियों तक बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड पहुंचाने का काम करती हैं. डॉक्टर से IRS बनीं मेघा भार्गव की कहानी काफी प्रेरणादायक है.

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Dr Megha Bhargava IRS: मेघा भार्गव मूल रूप से राजस्थान के कोटा की रहने वाले हैं. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई का माहौल मिला. एक तो कोटा शहर का माहौल, जहां दूर-दूर से बच्चे पढ़ने आते हैं. दूसरा मेघा की मां एक स्कूल प्रिंसिपल थीं. ऐसे में उन्हें घर में भी शिक्षा का माहौल मिला.

सरकारी कॉलेज से डेंटल की पढ़ाई

12वीं के बाद उन्होंने मुंबई के सरकारी डेंटल कॉलेज से पढ़ाई की. डिग्री हासिल करने के बाद दो साल तक रक्षा मंत्रालय के अस्पताल में काम किया. वहां काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि वे केवल एक पेशे तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, समाज सेवा करना चाहती हैं. ऐसे में उन्होंने UPSC परीक्षा देने का मन बनाया.

बिना कोचिंग के पाई सफलता

मेघा सुबह अस्पताल में ड्यूटी करती थीं और शाम में पढ़ाई. दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने बिना कोचिंग के UPSC की तैयारी की थी. पहले प्रयास में उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर लिया था. लेकिन दोबारा परीक्षा देकर IRS सेवा हासिल किया.

मेघा भार्गव की करेंट पोस्टिंग

डॉ मेघा भार्गव वर्तमान में इंकम टैक्स विभाग में एडिशनल कमीश्नर हैं. वहीं इससे पहले वे फाइनेंस मिनिस्ट्री में ज्वॉइंट कमीश्नर इंकम टैक्स ऑफिसर के पद पर थीं. उससे पहले इसी विभाग में डिप्यूटी कमीश्नर के पद पर कार्यरत थीं. इससे पहले उन्होंने डिफेंस मिनिस्ट्री में चीफ एग्जीक्यूटिव पद पर अपनी सेवा दी थी.

यही नहीं मेघा भार्गव के लिंक्डइन प्रोफाइल को देखें अगर तो पता चलता है कि उन्होंने सेवा के साथ-साथ करियर पर भी फोकस करते हुए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में एमफिल किया.

NGO के लिए काम करती हैं

सरकारी जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे IRS मेघा भार्गव सोशल वर्क में भी एक्टिव हैं. वे अपनी बहन द्वारा शुरू किए NGO समर्पण (Samarpann) के जरिए हजारों बच्चों तक शिक्षा पहुंचाती हैं. इस NGO ने करीब 26,000 बच्चों और 90 से ज्यादा स्कूलों को अपने काम से प्रभावित किया है. इस एनजीओ के माध्यम से मेघा भार्गव लड़कियों तक बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड पहुंचाती हैं और उन्हें स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का काम करती हैं. उन्होंने अभी तक 15,000 जरूरतमंद लड़कियों को सैनिटरी पैड किड मुहैया कराया है.

सच्चे मन से मेहनत करने पर जरूर मिलती है मंजिल

मेघा भार्गव का मानना है कि अगर दिल में सच्ची लगन हो, तो समय और परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं. वहीं लाइफ में असली सफलता तब ही मिलती है जब आप अपने काम से दूसरों के जीवन में सुधार ला सकें.

मां की बड़ी भूमिका

मेघा भार्गव की मां न सिर्फ पढ़ी-लिखी महिला हैं बल्कि वे काम भी करती थीं. ऐसे में मेघा के अंदर उन्होंने शिक्षा की नींव रखी. उनकी मां, जो एक स्कूल प्रिंसिपल थीं, बचपन से ही अपनी बेटियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करती रही थीं.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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