IIT Success Story: हर इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स का सपना होता है कि वे IIT पहुंचें. लेकिन आईआईटी का सफर इतना आसान नहीं होता है. इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. कई रातों की नींद कुर्बान करनी होती है और लगातार पढ़ाई करनी होती है, तब जाकर कहीं ये सपना पूरा होता है. कई बार तो स्टूडेंट्स का ऐसा ध्यान भटक जाता है कि उनके एक गलत फैसले से पूरा साल बर्बाद हो जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है उत्तर प्रदेश की इंदू पटेल की, जिन्हें हमेशा से कुछ अच्छा करना था. लेकिन एक गलत फैसले ने उनका कीमती वक्त बर्बाद कर दिया.
IIT Success Story: 10वीं में कम मार्क्स आने पर रिश्तेदार ने दिए ताने
आज हम बात कर रहे हैं इंदू पटेल की. इंदू उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly Indu Patel) की रहने वाली हैं. 10वीं के बाद उन्होंने 12वीं में पीसीएम (फिजिक्स+केमिस्ट्री+ मैथ्स) चुना. उनका सपना था IIT पहुंचना. लेकिन 10वीं में कम मार्क्स आने से वे काफी निराश हो गईं. इंदू पटेल को 10वीं में 77 % मार्क्स आए थे. रिश्तेदार ने उन्हें डिमोटिवेट कर दिया. लोगों ने कहा कि वे इतने कम मार्क्स के साथ करियर में कुछ भी अच्छा नहीं कर पाएंगी. लेकिन इंदू ने इन सब बातों की परवाह किए बिना आगे बढ़ने का फैसला लिया.
कोविड के फेज ने बर्बाद कर दिया करियर
इंदू पटेल (Indu Patel) ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने 10वीं के बाद कोटा जाने का फैसला किया था. लेकिन कोविड 19 के कारण, वो कोटा नहीं जा सकीं. इसके बाद घर पर बैठकर ऑनलाइन तैयारी करने का सोचा. लेकिन घर बैठने के कारण वो माहौल नहीं मिल पाया और पूरी तरह से समय बर्बाद हो गया. इंदू ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि वे कोविड वाले फेज में सिर्फ-और-सिर्फ समय बर्बाद करती थीं. टिकटॉक पर वीडियो देखा करती थीं. रील्स बनाकर टाइम पास करती थीं.
बिना तैयारी के दिया बोर्ड एग्जाम
इंदू बताती हैं कि उन्होंने 11वीं में पूरा साल बर्बाद कर दिया. फिर सोचा कि 12वीं क्लास में मेहनत करूंगी लेकिन फ्लो नहीं बना पाया. जब एग्जाम से कुछ दिन पहले ये एहसास हुआ कि तैयारी बिलकुल नहीं है तो उन्होंने 12वीं के बोर्ड्स एग्जाम (Board Exams) पर फोकस किया. आखिरकार, वो दिन आया जब 12वीं का रिजल्ट आया और इंदू ने 86 प्रतिशत हासिल किया था.
JEE Exam Preparation: ड्रॉप लेकर शुरू कर दी जेईई परीक्षा की तैयारी
12वीं के बाद इंदू ने ड्रॉप लिया और जेईई परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. इंदू ने कोटा जाकर जेईई परीक्षा की तैयारी शुरू की. कोचिंग पहुंचने के बाद उनका दिमाग उड़ गया क्योंकि वहां उनसे ज्यादा तेज-तेज स्टूडेंट्स थे. कोई स्टेट टॉपर तो कोई जिला टॉपर. जब तक इंदू सवाल लिखती थीं तब तक दूसरे स्टूडेंट्स का जवाब आ जाता था. इन सब बातों से वे और भी परेशान हो गईं.
पिता ने दिया हौसला
इंदू ने बताया कि उनकी कामयाबी में उनके पिता का बहुत बड़ा रोल है. उनके पापा को रिश्तेदार कहते थे कि लड़की है, इसकी पढ़ाई पर क्यों इतना खर्च करना. लेकिन पापा ने लोगों की एक नहीं सुनीं. जब भी मैं निराश होकर उनसे कहती थी कि मेरे से नहीं हो पाएगा तो वो कहते थे कि तूं निराश मत हो, तू जरूर अच्छा करेगी और अगर सेलेक्शन नहीं भी हुआ तो कम-से-कम कुछ सीखोगी. पापा की यही बात याद रखकर मैं मेहनत करती गई.
परीक्षा के नजदीक आते ही तैयारी में आई तेजी
फिर एग्जाम का डेट आया और मैंने पूरे विश्वास के साथ तैयारी में और तेजी लाई. मैंने परीक्षा दी और जेईई मेन का रिजल्ट आया तो मेरा 91 पर्सेंटाइल आया जोकि मेरे लिए बहुत बड़ा अचीवमेंट था. मैंने जेईई मेन्स 1 के बाद जेईई मेन्स 2 पर ध्यान नहीं दिया था और सिर्फ जेईई एडवांस की तैयारी की थी. मैंने सिर्फ JEE Advance की PYQs किए थे.
परीक्षा से एक दिन पहले पेट में हुआ दर्द
परीक्षा के एक दिन पहले मैं पैनिक कर गई. मेरी हालत खराब हो गई. मेरे पेट में दर्द शुरू हो गया. लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला. मेरा पहला पेपर बहुत अच्छा गया था. दूसरा पेपर अच्छा नहीं गया था. लेकिन कहीं न कहीं मुझे लग रहा था कि अब मेरा हो गया. घर आकर मैंने जब आंसर की चेक किया तो मुझे लगा मेरा हो जाएगा.
IIT Success Story: आखिरकार पाई सफलता
रिजल्ट आया तो मुझे लगा कि कहीं मैं सपना तो नहीं देख रही हूं. मैं रोने लगी. मम्मी को लगा कि मेरा नहीं हुआ इसलिए मैं रो रही हूं. मुझे तीन दिन लगे ये फील करने में कि मेरा रिजल्ट हो गया है. मैं अपने गांव से पहली लड़की हूं जिसने कोई इतनी बड़ी परीक्षा में क्रैक किया हो. इंदू ने IIT IISM Dhanbad में एडमिशन लिया है.
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