JEE Main कम नंबर पर भी मिल सकता है अच्छा कॉलेज, जानें मार्क्स और परसेंटाइल का फॉर्मूला

JEE Main Result 2026: जेईई मेन में सिर्फ मार्क्स देखना काफी नहीं होता है, परसेंटाइल ही असली गेम चेंजर है. क्या आप भी अपने मार्क्स और पर्सेंटाइल को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो जानें इन दोनों के बीच अंतर क्या है. साथ ही जानिए कितने परसेंटाइल में कौन सा कॉलेज मिल सकता है.
JEE Main Result 2026: जेईई मेन 2026 का रिजल्ट आज यानी 20 अप्रैल 2026 को जारी हो सकता है. ऐसे में JEE Main Result 2026 आने के बाद हर स्टूडेंट के मन में यही सवाल होता है कि मेरे मार्क्स के हिसाब से कितना परसेंटाइल बनेगा. बहुत सारे छात्र ऐसे होते हैं, जिन्हें मार्क्स और परसेंटाइल के बीच का अंतर समझ नहीं आता है. इससे कन्फ्यूजन और बढ़ जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Marks vs Percentile क्या होता है.
क्या होता है मार्क्स और परसेंटाइल का खेल?
बहुत से छात्र कन्फ्यूज रहते हैं कि उनके 300 में से 200 नंबर आए हैं, तो क्या उनकी पर्सेंटाइल भी 90 के ऊपर होगी. दरअसल, JEE Main में पर्सेंटाइल आपके नंबरों पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि उस शिफ्ट में बैठने वाले बाकी छात्रों के मुकाबले आपने कैसा परफॉर्म किया है. अगर आपकी शिफ्ट का पेपर बहुत कठिन था, तो कम नंबर पर भी आपकी पर्सेंटाइल बहुत अच्छी हो सकती है.
JEE Main Result 2026: संभावित Marks vs Percentile
पिछले सालों के ट्रेंड्स को देखते हुए, साल 2026 के सेशन 2 के लिए एक अनुमानित डेटा नीचे देख सकते हैं:
| संभावित स्कोर (300 में से) | अपेक्षित पर्सेंटाइल (Percentile) |
| 285 – 300 | 99.99+ |
| 260 – 280 | 99.5 – 99.8 |
| 210 – 250 | 99.0 – 99.4 |
| 180 – 200 | 98.0 – 98.9 |
| 150 – 175 | 97.0 – 97.9 |
| 120 – 145 | 95.0 – 96.9 |
| 100 – 115 | 90.0 – 94.9 |
कितनी पर्सेंटाइल पर मिलेगा NIT या IIIT?
अगर आप जनरल कैटेगरी से हैं और एक अच्छे NIT (National Institute of Technology) में कोर ब्रांच (जैसे CS, IT या ECE) चाहते हैं, तो आपकी पर्सेंटाइल 98 से ऊपर होनी चाहिए. हालांकि, 95 से 97 पर्सेंटाइल वाले छात्रों को भी नए NITs या IIITs में सीटें मिल सकती हैं.
JEE Main Percentile कैसे कैलकुलेट करें?
JEE Main का एग्जाम कई शिफ्ट में होता है और हर शिफ्ट का पेपर थोड़ा आसान या कठिन हो सकता है. इसलिए सबके साथ बराबरी करने के लिए NTA एक तरीका अपनाता है जिसे normalization कहते हैं.
अब percentile का मतलब ये नहीं होता कि आपने कितने नंबर लाए, बल्कि ये बताता है कि आप कितने लोगों से बेहतर हैं. अगर 100 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया और आपसे कम या बराबर नंबर 90 लोगों के आए, तो आपका percentile 90 होगा. फॉर्मूला कुछ ऐसा होता है:-
Percentile = (आपसे कम या बराबर स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स / कुल कैंडिडेट्स) ×100
यानि आपका स्कोर दूसरे स्टूडेंट्स से तुलना करके तय होता है. क्योंकि हर शिफ्ट का पेपर अलग होता है, इसलिए NTA normalisation के जरिए सभी शिफ्ट्स को बराबर कर देता है, ताकि किसी को आसान या कठिन पेपर का फायदा या नुकसान न हो.
क्यों बदलता है मार्क्स और परसेंटाइल?
इस बार सेशन 2 (JEE Main Result 2026) में कई शिफ्ट्स में एग्जाम हुए हैं. हर शिफ्ट के पेपर अलग होते हैं. अगर किसी शिफ्ट का पेपर आसान रहा, तो उस शिफ्ट के स्टूडेंट अच्छा नंबर लाते हैं. वहीं अगर पेपर हार्ड रहा, तो मार्क्स कम आ सकते हैं. इस वजह से कॉम्पिटिशन का लेवल बढ़ जाता है. लेकिन NTA नॉर्मलाइजेशन के प्रोसेस को फॉलो करता है, ताकि किसी भी छात्र के साथ गलत न हो.
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By Smita Dey
स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.
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