Gen Z के बीच पॉपुलर है Lily Padding, कंपनी की बढ़ेगी परेशानी

सांकेतिक तस्वीर (PC-Freepik)
What is Lily Padding: अगर आप भी अपनी जॉब से इसलिए ऊब चुके हैं क्योंकि वहां कुछ नया सीखने को नहीं मिल रहा, तो शायद आप भी 'लिली पैडिंग' के लिए तैयार हैं. याद रखिए, आज के दौर में लर्निंग ही असली अर्निंग है.
Lily Padding: पहले के दौर में लोग एक ही कंपनी में लंबे समय तक काम करना पसंद करते थे. उनके लिए ये कंफर्ट का मामला था. साथ ही वे कंपनी के साथ रिलेशन बनाने को अधिक महत्व देते थे. लेकिन आज के समय में खासकर Gen Z के बीच ट्रेंड बदल रहा है. हर काम को अपने अंदाज में करने वाले Gen Z साल दो साल में नौकरी, कंपनी और कई बार तो फील्ड भी बदल लेते हैं. इसे ही जनरेशन Z की भाषा में Lily Padding कहते हैं.
क्या है Lily Padding?
लिली पैडिंग (Lily Padding) एक ऐसी रणनीति है, जिसके तहत युवा जल्दी-जल्दी नौकरी, इंडस्ट्री और जॉब रोल चेंज करते हैं. इससे न सिर्फ सैलरी बढ़ती है बल्कि करियर में बहुत जल्दी ग्रोथ होता है. साथ ही कनेक्शन और स्किल्स भी अपग्रेड होते हैं.
मेंढक भी इस तकनीक का करते हैं इस्तेमाल
देखा जाए तो मेंढक भी एक पत्ते से दूसरे पत्ते पर छलांग लगाते हैं. इससे उन्हें खुद को सुरक्षित रखने, शिकारियों से बचने में मदद मिलती है. फ्रॉग जंप की इस तकनीक को अब Gen Z जॉब्स में ग्रोथ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.
क्या है रिसर्च का कहना?
रैंडस्टैड एनवी (Randstad NV) जोकि एक रिक्रूटमेंट एजेंसी है, की एक रिसर्च के अनुसार, अपने करियर के पहले पांच सालों में एक Gen Z कर्मचारी औसतन सिर्फ 1.1 साल ही एक कंपनी में टिकता है. मिलेनियल्स करीब 1.8 साल और उनसे पहले की पीढ़ी के लोग शुरुआती दौर में लगभग 3 साल तक एक ही जगह काम करते थे. इस रिसर्च में एक और चीज सामने आई है कि हर 3 में से 1 Gen Z कर्मचारी अगले एक साल में नौकरी बदलने का प्लान बना रही है.
Lily Padding जॉब हॉपिंग से कितना अलग है?
Lily Padding के बार में पढ़ते हुए आपको लग रहा होगा कि ये जॉब हॉपिंग के जैसा है. लेकिन दोनों में अंतर है. जॉब हॉपिंग का मकसद सिर्फ सैलरी बढ़ाना होता है. लिली पैडिंग एक स्मार्ट स्ट्रैटजी है, जिसे करियर ग्रोथ के लिए Gen Z द्वारा अपनाया जा रहा है.

Job Hopping से कैसे है अलग?
मकसद (Purpose): जॉब होपिंग अक्सर ज्यादा पैसे या बेहतर पद के लिए की जाती है. ‘लिली पैडिंग’ का मकसद खुद को ‘फ्यूचर प्रूफ’ बनाना है.
रणनीति (Strategy): इसमें कर्मचारी यह देखता है कि अगली कंपनी उसे क्या नया सिखाएगी जो उसकी मौजूदा कंपनी में मुमकिन नहीं है.
लंबी रेस का घोड़ा: लिली पैडर्स जानते हैं कि आज के दौर में सिर्फ एक स्किल के भरोसे पूरी जिंदगी नहीं काटी जा सकती.
Gen-Z इसे क्यों चुन रही है?
जानकारों की मानें तो आज के दौर में छंटनी (Layoffs) और AI के बढ़ते खतरे ने युवाओं को असुरक्षित कर दिया है. फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और तेजी से बदलते तकनीक ने भी इस बदलाव में अपनी भूमिका निभाई है. युवाओं को समझ आ गया है कि कंपनी से रिलेशन बनाने से कोई खास फायदा नहीं होने वाला है. उससे बेहतर है अपने स्किल्स को बढ़ाना.
लिली पैडिंग के फायदे
- नई-नई स्किल्स सीखने और अनुभव बढ़ाने का मौका मिलता है.
- अलग-अलग कंपनियों और इंडस्ट्री में काम करने से बेहतर एक्सपोजर मिलता है.
- कई तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलता है.
- अलग-अलग जगह काम करने से मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क बनता है.
- बदलते जॉब मार्केट के हिसाब से खुद को जल्दी एडजस्ट करने में मदद मिलती है.
लिली पैडिंग के नुकसान
- बार-बार नौकरी बदलने से कंपनियों को कैंडिडेट की स्थिरता पर संदेह हो सकता है.
- किसी एक फील्ड में गहरी एक्सपर्टिज विकसित करने में मुश्किल आ सकती है.
- लगातार बदलाव से करियर में स्थिरता की कमी महसूस हो सकती है.
- कुछ रिक्रूटर्स जॉब-हॉपिंग को नेगेटिव नजर से देखते हैं.
- लंबे समय तक किसी एक संगठन में अनुभव न बनने से करियर ग्रोथ प्रभावित हो सकती है.
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लेखक के बारे में
By Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.
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