घनश्यामदास बिड़ला पुरस्कार 2025 का ऐलान, प्रोफेसर बुशरा अतीक का खास योगदान

प्रोफेसर बुशरा अतीक
GD Birla Award: वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. साल 2025 का घनश्यामदास बिड़ला पुरस्कार प्रोफेसर बुशरा अतीक को दिया जाएगा. उन्हें यह सम्मान जैविक विज्ञान के क्षेत्र में किए गए बेहतरीन शोध कार्य के लिए मिल रहा है. प्रोफेसर बुशरा अतीक आईआईटी कानपुर से जुड़ी हैं और उनका काम कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में काफी अहम माना जाता है. इस पुरस्कार की घोषणा होते ही वैज्ञानिक समुदाय में खुशी की लहर है.
GD Birla Award: घनश्यामदास बिड़ला पुरस्कार की शुरुआत साल 1991 में के के बिड़ला फाउंडेशन ने की थी. इसका मकसद ऐसे भारतीय वैज्ञानिकों को पहचान देना है, जो भारत में रहकर स्वतंत्र रूप से रिसर्च कर रहे हों और जिनकी उम्र 50 साल या उससे कम हो. देश में कई वैज्ञानिक सम्मान दिए जाते हैं, लेकिन उम्र आधारित यह व्यवस्था इसे बाकी पुरस्कारों से अलग बनाती है. यही वजह है कि युवा और मिड करियर वैज्ञानिकों के बीच इसकी काफी अहमियत है.
GD Birla Award: 5 लाख का पुरस्कार
इस पुरस्कार (GD Birla Award) के तहत चुने गए वैज्ञानिक को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है. चयन प्रक्रिया काफी सख्त होती है और इसके लिए एक खास बोर्ड बनाया जाता है. इस बोर्ड की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष करते हैं. फिलहाल बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर आशुतोष शर्मा हैं. बोर्ड में देश के जाने माने वैज्ञानिक और बड़े रिसर्च संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो उम्मीदवारों के काम की गहराई से जांच करते हैं.
कौन हैं प्रोफेसर बुशरा अतीक?
प्रोफेसर बुशरा अतीक आईआईटी कानपुर के जैविक विज्ञान और जैव अभियांत्रिकी विभाग (Department of Engineering) में प्रोफेसर हैं. वह डीबीटी वेलकम ट्रस्ट इंडिया एलायंस की सीनियर फेलो भी हैं. उनका रिसर्च ऐसा है, जिसका फायदा सीधे मरीजों तक पहुंच सके. उन्होंने प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर पर गहराई से काम किया है और यह समझने की कोशिश की है कि कैंसर शरीर में कैसे फैलता है.
प्रोफेसर बुशरा अतीक की टीम ने कुछ ऐसी दवाओं पर भी काम किया है, जो पहले किसी और बीमारी के लिए इस्तेमाल होती थीं, लेकिन अब कैंसर के इलाज में भी कारगर साबित हो सकती हैं. WHO से मंजूर एंटी मलेरियल दवा आर्टेमिसिनिन को दोबारा इस्तेमाल करने पर उनका रिसर्च काफी चर्चा में रहा है. आम भाषा में कहें तो प्रोफेसर बुशरा अतीक का काम लोगों की जिंदगी बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम है.
प्रोफेसर बुशरा अतीक की टीम ने प्रोस्टेट कैंसर के कुछ खास मामलों में SPINK1 नाम के फैक्टर की भूमिका को समझा है. इससे यह पता चला है कि कैंसर की गंभीरता कैसे बढ़ती है और उसे किस तरह रोका जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने WHO से मंजूर एंटी मलेरियल दवा आर्टेमिसिनिन को दोबारा इस्तेमाल कर कैंसर के इलाज में इसकी उपयोगिता पर भी काम किया है.
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लेखक के बारे में
By Ravi Mallick
रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.
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