सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका में संताल अकादमी ने की संताली स्पोकन कोर्स की शुरुआत

Updated at : 08 May 2023 8:53 PM (IST)
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सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका में संताल अकादमी ने की संताली स्पोकन कोर्स की शुरुआत

यहां डिग्री के स्तर पर संताली की पढ़ाई तो होती ही है, अब संताली स्पोकेन के लिए अकादमी के द्वारा पहल करना यहां के संताली भाषा प्रेमियों के लिए हर्ष का विषय है. संताल परगना आदिवासी बहुल इलाका है. यहां कई पदाधिकारी ऐसे हैं, जो संताली में संवाद नहीं कर सकते हैं, उनके लिए यह सबसे अच्छा अवसर है.

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सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका के तत्वावधान में संचालित संताल अकादमी द्वारा कुलपति प्रो डॉ सोनाझारिया मिंज के अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के मिनी कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘संताली स्पोकन कोर्स’ का शुभारंभ किया गया. शुरुआत अमर शहीद सिदो कान्हू मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं विश्वविद्यालय कुलगीत गाकर शुरू की गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं कुलपति प्रो (डॉ) सोनाझारिया मिंज ने कहा कि यह कोर्स संताल परगाना और झारखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

उन्होंने कहा कि यहां डिग्री के स्तर पर संताली की पढ़ाई तो होती ही है, अब संताली स्पोकेन के लिए अकादमी के द्वारा पहल करना यहां के संताली भाषा प्रेमियों के लिए हर्ष का विषय है. संताल परगना आदिवासी बहुल इलाका है. यहां कई पदाधिकारी ऐसे हैं, जो संताली में संवाद नहीं कर सकते हैं, उनके लिए यह सबसे अच्छा अवसर है कि संताली भाषा कोर्स में दाखिला प्राप्त करके संताली भाषा सीखें और यहां के लोगों के साथ संताली भाषा में बात करें.

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विश्वविद्यालय के पदाधिकारी और शिक्षक भी कोर्स का लाभ उठा सकते हैं. ऐसे कोर्स की शुरुआत होने से संताली भाषा के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति का भी विकास होगा. इसलिए कोर्स को निरंतर और सुचारु रूप से चलाना जरूरी है. मंच संचालन डॉ सुजीत कुमार सोरेन ने किया. स्वागत भाषण डॉ चंपावती सोरेन ने दिया. कहा कि 90 घंटे का कोर्स है. पाठ्यक्रम बहुत ही सहज बनाया गया है.

कोर्स में दाखिला लेनेवाले छात्र-छात्राएं बहुत ही सरलता से संताली सीख सकते हैं और बोल सकते हैं. आम बोलचाल एवं सभी जगह उपयोग में आने वाले शब्द एवं भाषा का समावेश सिलेबस में शामिल हैं. कोर्स लाभदायक साबित होगा. कुलसचिव डॉ संजय कुमार सिन्हा ने व संताल अकादमी के सचिव डॉ सुशील टुडू ने भी अपने विचार रखे.

मौके पर डॉ हशमत अली, डॉ विजय कुमार, डीन डॉ आरकेएस चौधरी, डॉ शर्मिला सोरेन, प्रो होलिका मरांडी, विश्वविद्यालय जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ शंभू कुमार सिंह, डॉ विनोद शर्मा, डॉ विनोद मुर्मू, निर्मल मुर्मू, सिद्धौर हांसदा, मिलू रजक, राजकुमार उपाध्याय, इग्नासियस मरांडी, अमित मुर्मू एवं संताली तथा कॉमर्स के सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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पदाधिकारी व कर्मियों की पदोन्नति में भी सहायक होगा कोर्स : डीसी

मुख्य अतिथि उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने कहा कि संताल अकादमी और यूनिवर्सिटी ने संताली भाषा क्षेत्र में बहुत बड़ा काम किया है. क्षेत्र के लिए इस कोर्स की आवश्यकता थी. विवि प्रबंधन ने इस चीज की शुरुआत करके निश्चित तौर पर ऐतिहासिक काम किया है. निश्चय ही यह संताल अकादमी के लिए भी बहुत बड़ी उपलब्धि साबित होगी. इस कोर्स की शुरुआत से जो संताली भाषा नहीं जानते हैं, उनके लिए सीखने का अच्छा अवसर साबित होगा.

साथ ही साथ संताल परगना में जितने भी पदाधिकारी और कर्मचारी हैं, उन्हें यहां के लोगों के साथ संताली से संवाद करने में कष्ट होता है. वह कोर्स में दाखिला प्राप्त करके अपनी कठिनाई दूर कर सकते हैं. सहजता के साथ यहां के लोगों के साथ संताली भाषा में संवाद स्थापित कर सकेंगे. उपायुक्त ने कहा कि वे अपने स्तर से जिला के कर्मचारी को इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए प्रेरित करेंगे. समय-समय पर खुद भी कक्षा का लाभ प्राप्त करने का कोशिश करेंगे.

उन्होंने आगे कहा कि यहां के भूतपूर्व पदाधिकारियों ने मेहनत करके यहां के लोगों के दिल में अपना जगह स्थापित की थी. संताली भाषा सीखा था. विदेश से आये शोधार्थियों ने भी संताली भाषा सीखने के बाद कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी, जिसमें रॉबर्ट कास्टेयर्स एवं पीओ बोडिंग जैसा महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं. भाषा और संस्कृति के मामले में यह क्षेत्र बहुत ही धनी है. इसको सीख करते बाकी लोग भी महसूस कर सकते हैं.

डीसी ने कहा कि कोर्स की शुरुआत से भाषा के साथ-साथ साहित्य का भी उत्थान होगा. कोर्स की शुरुआत करने से यह यहां के पदाधिकारी-कर्मचारियों के पदोन्नति में भी सहायक सिद्ध होगी. उपायुक्त ने कहा कि यहां आने के बाद वे खुद थोड़ा बहुत संताली सीख चुके हैं और आगे सीखने का प्रयास कर रहें है. इसलिए उनके लिए भी यह बेहतर अवसर है.

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