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संताली कविता संग्रह के लिए बांकुड़ा के कजली सोरेन को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ऐसी है उनकी कविता यात्रा

Updated at : 22 Dec 2022 8:35 PM (IST)
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संताली कविता संग्रह के लिए बांकुड़ा के कजली सोरेन को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ऐसी है उनकी कविता यात्रा

Sahitya Akademi Puraskar 2022 Winner: पश्चिम बंगाल के कजली सोरेन ने कहा कि हर लेखक की यही इच्छा होती है कि उसकी लेखनी को सराहा जाये. उसे पुरस्कार मिले. साहित्य अकादमी पुरस्कार पाना हर लेखक-कवि का सपना होता है. मुझे भी बहुत खुशी हो रही है.

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Sahitya Akademi Puraskar 2022 Winner: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिला में रहने वाले संताली लेखक कजली सोरेन (72) को वर्ष 2022 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है. उनके कविता संग्रह ‘साबरनका बालिरे सानन पंजय’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है. कजली सोरेन के इस कविता संग्रह में 350 कविताएं हैं. ‘प्रभात खबर’ (prabhatkhabar.com) को फोन पर श्री सोरेन ने बताया कि पुरस्कार मिला, तो उन्हें बेहद खुशी हुई.

‘साबरनका बालिरे सानन पंजय’ के लिए कजली सोरेन को मिला पुरस्कार

पश्चिम बंगाल के कजली सोरेन ने कहा कि हर लेखक की यही इच्छा होती है कि उसकी लेखनी को सराहा जाये. उसे पुरस्कार मिले. साहित्य अकादमी पुरस्कार पाना हर लेखक-कवि का सपना होता है. मुझे भी बहुत खुशी हो रही है. कजली सोरेन ने बताया कि सुबह 11 बजे साहित्य अकादमी के संयोजक मदन मोहन सोरेन ने उन्हें फोन करके बताया कि उनके कविता संग्रह ‘साबरनका बालिरे सानन पंजय’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है. श्री सोरेन की खुशी का ठिकाना न रहा.

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सोरेन की कविताओं को अलग-अलग विषयों में नहीं बांट सकते

कजली सोरेन की कविताएं संताली साहित्य की अनोखी रचना है. उनकी कविताओं को अलग-अलग विषय में बांटना बेहद मुश्किल है. अगर आप उनकी कविताएं पढ़ेंगे, तो पायेंगे कि इसमें हर्ष है, उल्लास है, तो गम भी है. उनकी रचनाओं में इमोशन है, तो इमेजिनेशन भी है. ईश्वर और प्रकृति के प्रति आस्था है, तो ईश्वर की रचना के प्रति प्रेम भी है. भाषा और संस्कृति के प्रति लगाव है, तो धर्म एवं अध्यात्म के प्रति झुकाव भी है.

कविताओं में हैं कवि के कई भाव

उनकी कविताओं में मानवता के प्रति उनका समर्पण दिखता है, तो जीवन के प्रति उल्लास भी दिखता है. कवि ने अपनी रचना में गुस्से के भाव को प्रदर्शित किया है, तो उत्पीड़न पर भी कलम चलायी है. मान्यता एवं रूढ़ियों पर भी उन्होंने जमकर लिखा है. कुल मिलाकर कवि ने अपने मन के भावों को अपनी पुस्तकों में बखूबी पिरोया है.

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बचपन से ही था कजली सोरेन को कविता लिखने का शौक

बता दें कि 72 वर्षीय कजली सोरेन की 10 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं. उन्होंने उसी वक्त कविता लिखना शुरू कर दिया था, जब वह स्कूल में पढ़ते थे. वर्ष 1968-69 से ही वह कवि बन गये थे. श्री सोरेन के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बेटियां हैं. संताली साहित्य जगत में कजली सोरेन के नाम से प्रसिद्ध इस कवि का असली नाम जगन्नाथ सोरेन है. उनका जन्म 19 अगस्त 1950 को हुआ. उनके पिता का नाम जगन्नाथ सोरेन और माता का नाम नीलमणि सोरेन है.

इंडियन ऑयल के रिटायर्ड कर्मी हैं कजली सोरेन

बता दें कि जगन्नाथ सोरेन उर्फ कजली सोरेन पश्चिम बंगाल के हल्दिया में इंडिय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के पूर्व कर्मचारी हैं. वहां से रिटायर हो चुके हैं. उनकी पुस्तकों की सूची इस प्रकार है:

  • चाचो दीदी (कविता) – 1982

  • गेगोम (कविता) – 1984

  • दुली चेतन (कविता) – 1993

  • लानदायमे चांपा बाहा (कविता) – 2009

  • ओजोग काटे मानमी उमुल (कविता) – 2012

  • लेतका (अनुवाद) -2013

  • बुधी पारकोम हानासा (अनुवाद) – 2019

  • सोबरनका बालिरे सानन पंजय (कविता) – 2019

संताली भाषा के महान कवि हैं कजली सोरेन: लक्ष्मण किस्कू

ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू कहते हैं कि उनकी इस पुस्तक में 350 कविताएं हैं. लेखक को स्वर्णरेखा नदी के बालू में सोना मिलता है. इस पुस्तक का यही थीम है. लेकिन, वह चाहते हैं कि मानवता और समाज दोनों का मानवीय तरीके से विकास हो. मुख्य रूप से कजली सोरेन संताली भाषा के महान कवि हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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