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Chandrayaan-3: प्रज्ञान रोवर’ की डिजाइनिंग में धनबाद IIT-ISM के पूर्व छात्र विजय का है अहम योगदान

Updated at : 29 Aug 2023 9:16 AM (IST)
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Chandrayaan-3: प्रज्ञान रोवर’ की डिजाइनिंग में धनबाद IIT-ISM के पूर्व छात्र विजय का है अहम योगदान

विजय ने वर्ष 2021 में आईआईटी-आईएसएम के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग से अपनी पीएचडी की पढ़ाई पूरी की. इसके पूर्व उन्होंने आइआइटी बीएचयू से 2015 में एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2018 में इसरो में शामिल हुए.

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चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर भारत का अभियान चंद्रयान तीन की सफलता में आईआईटी आईएसएम के दो पूर्ववर्ती छात्रों का अहम योगदान रहा है. अभी चंद्रमा की सतह पर अण्वेषण कर रहे ‘प्रज्ञान रोवर’ की डिजाइनिंग में आईआईटी आईएसएम के पूर्व छात्र विजय कुमार वर्मा ने अहम योगदान दिया है. वह रोवर को बनाने वाली टीम में शामिल थे. वहीं दूसरे छात्र भरत कुमार अभियान के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाली टीम के हिरस्सा थे. यह जानकारी आईआईटी आईएसएम की मीडिया एंड ब्रांडिंग के डीन प्रो रजनी सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि दोनों पूर्व छात्रों की उपलब्धि से संस्थान गौरवान्वित है.

बताया कि विजय ने वर्ष 2021 में आईआईटी-आईएसएम के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग से अपनी पीएचडी की पढ़ाई पूरी की. इसके पूर्व उन्होंने आइआइटी बीएचयू से 2015 में एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2018 में इसरो में शामिल हुए. जहां वे एसडी कंट्रोल एंड डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स ग्रुप में वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने चंद्रयान के रोवर को अत्याधुनिक बनाने में योगदान दिया है. वहीं वर्ष 2015 के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक के छात्र रहे भरत कुमार ने भी चंद्रयान टीम में अहम भूमिका निभायी है उन्होंने दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग टीम में काम किया है. संस्थान के पूर्व छात्रों की उपलब्धि पर निदेशक प्रो जेके पटनायक और संस्थान के शिक्षक शिक्षिकाओं ने उन्हें बधाई दी है.

आईआईटी में कोल कंपनियों के अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू

धनबाद आईआईटी आईएसएम में सोमवार से माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग की ओर से माइंस सर्वे प्रौद्योगिकी में प्रगति विषय पर छह सप्ताह का इंटेंसिव कोर्स शुरू किया गया. पाठ्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के कार्यकारी विकास केंद्र में निदेशक प्रो जेके पटनायक ने किया. पाठ्यक्रम के को-ऑर्डिनेटर सह संस्थान के उपनिदेशक प्रो धीरज कुमार ने बताया कि पाठ्यक्रम में उपकरण पर सटीक, नियंत्रण सर्वेक्षण, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, ढलानों की निगरानी, खान सर्वेक्षण में पोजिशनिंग सिस्टम, मानचित्र प्रक्षेपण और राष्ट्रीय ग्रिड से कनेक्शन, सर्वेक्षण कानून, ओपन कास्ट माईन सर्वेक्षण, स्कैनिंग और प्लाटिंग जियोरेफरेंसिंग जैसी जानकारी दी जायेगी. इस अवसर पर डीन आर एंड डी प्रो सागर पाल, खनन इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो डीपी मिश्रा, प्रो विजीके विल्लुरी और शोएब आलम सहित बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल, डब्ल्यूसीएल, एनसीएल, एसइसीएल और एमसीएल के 68 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं.

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