अक्षय तृतीया पर क्यों खरीदते हैं सोना, किस देवी-देवता का है स्वरूप
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 07 May 2024 4:37 PM
Prasanna Vadanam Shloka
Akshaya Tritiya: जब सुर-असुर संग्राम के बाद समुद्र मंथन किया गया था, तो उस समय अमृत के साथ-साथ सोना भी समुद्र से निकला था.
Akshaya Tritiya: आज के तीसरे दिन भारत में पूरे धूम-धाम से अक्षय तृतीया का व्रत मनाया जाएगा. इस दिन महिलाएं शृंगार करके पूजा करती हैं. इस व्रत को लेकर कई प्रकार की मान्यताएं और प्रथा है. इन्हीं में एक मान्यता और प्रथा सोना-चांदी, हीरा-मोती या धातु की कोई भी वस्तु खरीदने का प्रचलन है. हम सभी के मन में सवाल पैदा होता है कि आखिर, अक्षय तृतीया के दिन सोना-चांदी या फिर धातु की कोई वस्तु क्यों खरीदी जाती है? इसके पीछे कारण क्या है? इसे सबसे अधिक पसंद कौन करता है और यह किस देवी-देवता का प्रतीक है? आइए, इन सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.
माता लक्ष्मी को समर्पित है अक्षय तृतीया
पंडित विष्णु वल्लभनाथ मिश्र के अनुसार, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया का व्रत माता लक्ष्मी को समर्पित है. यही कारण है कि इस व्रत में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस व्रत की पूजा में माता लक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है कि उनका आशीर्वाद घर-परिवार पर हमेशा बना रहे. माता लक्ष्मी की आराधना में महिलाएं निवेदन करती हैं कि उनकी कृपा से धन-धान्य की प्राप्ति हो और उसका कभी क्षय न हो. घर में सुख-शांति बनी रही और हमेशा घर में माता लक्ष्मी का वास हो. इसके अलावा, अक्षय तृतीया के दिन अन्य मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह, मुंडन, गृहप्रवेश, वाहन खरीद, सोना-चांदी और धातु की वस्तु की खरीद की जाती है.
बिस्कुट समझ ब्रिटानिया के शेयर पर टूट पड़े लोग, जानें फिर क्या हुआ?
अक्षय तृतीया के दिन क्यों खरीदते हैं सोना
पंडित विष्णु वल्लभनाथ मिश्र आगे कहते हैं कि चूंकि, अक्षय तृतीया माता लक्ष्मी को समर्पित है, तो इस दिन सोना-चांदी या धातु की वस्तु खरीदने का विधान है. सोना-चांदी और धातु के वस्तु, गहने-जेवर, वाहन और घर-मकान माता लक्ष्मी की प्रिय वस्तु हैं. इसीलिए इस दिन सोना-चांदी की खरीद करना शुभ माना जाता है. उनका कहना है कि धातुओं में सोना और चांदी की खरीद करने का अपना अलग-अलग महत्व है. इसलिए इस दिन इन दोनों धातुओं की खरीद की जाती है. सोना-चांदी खरीदने से घर में निधि (धन-संपत्ति और रुपया-पैसा) का भंडार अक्षय बना रहता है.
दिग्गज इन्वेस्टर वॉरेन बफे ने भारत में दिखाया इंट्रेस्ट, बोले- बाजार में अनखोजे अवसर
माता लक्ष्मी का स्वरूप है सोना
उन्होंने कहा कि सोना माता लक्ष्मी को न केवल समर्पित है, बल्कि उसे माता लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है. इसके पीछे की पौराणिक कथा यह है कि जब सुर-असुर संग्राम के बाद समुद्र मंथन किया गया था, तो उस समय अमृत के साथ-साथ सोना भी समुद्र से निकला था, जिसे भगवान विष्णु ने धारण कर लिया था. इसीलिए सोना को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. यही वजह है कि दीपावली से पहले धनतेरस और अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने की परंपरा है.
रॉकेट की रफ्तार से भाग रहा सोना, 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ गया दाम
Akshaya Tritiya: बेटर हाफ को दें गोल्ड-डायमंड का तोहफा, मिल रही बंपर छूट
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










