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गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद इस भारतीय ने बेच दी 8400 करोड़ की कंपनी, अब पूछ रहा- 'इन पैसों का क्या करूं'

Updated at : 09 Jan 2025 10:14 AM (IST)
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Vinay Hiremath

स्टार्टअप कंपनी लूम के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ विनय हिरेमथ. फोटो साभार: फॉर्च्यून इंडिया एक्स हैंडल

Vinay Hiremath: लूम के सह-संस्थापक विनय हिरेमथ की कहानी सिर्फ एक व्यवसायिक सफलता नहीं, बल्कि नए रास्ते खोजने की जिद और अपने सपनों को साकार करने की मिसाल है. विनय हिरेमथ मानते हैं कि उनके अगले उद्यम को लूम जितनी सफलता हासिल करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह उनके लिए संतोषजनक जरूर होना चाहिए.

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Vinay Hiremath: पैसा और शोहरत कमाने के लिए लोग क्या नहीं करते. कुछ लोग बड़ी कंपनी बनाने के लिए अपना जीवन समेत सबकुछ दांव पर लगा देते हैं. लेकिन, कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो कम उम्र में बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं. इन्हीं में से एक भारतीय मूल के बिजनेसमैन विनय हिरेमथ है. उन्होंने कम उम्र में स्टार्टअप कंपनी बना ली. लेकिन उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप होने के बाद 975 मिलियन डॉलर यानी 8400 करोड़ रुपये की स्टार्टअप कंपनी बेच डाली. इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी बेच डाली. अब वह सोशल मीडिया पर लोगों से पूछ रहे हैं, ‘अब इस पैसे का क्या करूं, कहां खर्च करूं?’

विनय हिरेमथ ने ब्लॉग पोस्ट में शेयर की संघर्ष की कहानी

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के विनय हिरेमथ ने अपने ब्लॉग पोस्ट “मैं अमीर हूं और मुझे नहीं पता कि अपने जीवन में क्या करना है” में उन्होंने अपने संघर्षों को शेयर किया है. उन्होंने 60 मिलियन डॉलर की नौकरी ठुकराई, गर्लफ्रेंड से रिश्ता खत्म किया. रोबोटिक्स और सरकारी सुधार जैसे क्षेत्रों में असफल प्रयोग किए. उन्होंने साल 2023 में लूम को एटलसियन के हाथों 975 मिलियन डॉलर यानी 8400 करोड़ रुपये में बेच डाला.

विनय हिरेमथ ने 2010 में लूम की शुरुआत की

एनडीटीवी की वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विनय हिरेमथ लूम के सह-संस्थापक और पूर्व सीटीओ हैं. उन्होंने ने सिलिकॉन वैली में अपने जुनून और कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की. उन्होंने शाहिद खान और जो थॉमस के साथ मिलकर 2010 के दशक में लूम की शुरुआत की. लूम एक वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म है, जो यूजर्स को शॉर्ट-फॉर्म वीडियो बनाने और शेयर करने की सुविधा प्रदान करता है.

जब विनय हिरेमथ ने खुद के क्रेडिट कार्ड से जुटाया फंड

रिपोर्ट में कहा गया है कि विनय हिरेमथ की कहानी एक मिसाल बन गई. लूम के शुरुआती दिनों में जब कंपनी पैसों की कमी से जूझ रही थी, तब विनय हिरेमथ ने अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर इसे बचाए रखा. उनके नेतृत्व में लूम ने 200 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया और 30 मिलियन से अधिक यूजर का बेस बनाया.

1991 में जन्मे हैं विनय हिरेमथ

विनय हिरेमथ का जन्म 1991 में हुआ. उन्होंने इलिनोइस विश्वविद्यालय से अर्बाना-शैंपेन में पढ़ाई शुरू की, लेकिन अपने स्टार्टअप के जुनून को पूरा करने के लिए बीच में ही छोड़ दिया. सिलिकॉन वैली में उन्होंने बैकप्लेन नामक एक स्टार्टअप में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया, जहां उनकी मुलाकात शाहिद खान से हुई. इन दोनों ने बाद में लूम की शुरुआत की.

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हवाई में फिजिक्स की पढ़ाई कर रहे विनय हिरेमथ

लूम की सफलता के बाद विनय ने नए अवसर तलाशे, लेकिन 60 मिलियन डॉलर की नौकरी ठुकराने और कई असफल उद्यमों के कारण उन्हें उद्देश्य की कमी महसूस होने लगी. वर्तमान में, 33 साल के विनय हिरेमथ हवाई में फिजिक्स की पढ़ाई कर रहे हैं और एक नया स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हैं.

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विनय हिरेमथ की उपलब्धियां

  • फोर्ब्स 30 अंडर 30 (2018): विनय हिरेमर्थ को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए फोर्ब्स की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया.
  • स्टार्टअप के प्रति जुनून: लूम से पहले उन्होंने कई छोटे और बड़े उद्यमों में योगदान दिया.
  • भविष्य की योजना: विनय हिरेमथ मानते हैं कि उनके अगले उद्यम को लूम जितनी सफलता हासिल करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह उनके लिए संतोषजनक जरूर होना चाहिए.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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