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US Tariff Impact: ईरान के सहयोगी देशों पर अमेरिकी टैरिफ से भारत को फर्क नहीं, सरकारी सूत्रों का दावा

Updated at : 13 Jan 2026 8:23 PM (IST)
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US Tariff Impact

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं)

US Tariff Impact: अमेरिका की ओर से ईरान के सहयोगी देशों पर 25% टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद भारत पर इसके असर को लेकर स्थिति साफ हो गई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत-ईरान व्यापार सीमित है. इसलिए, इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यात पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि ईरान भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल नहीं है और पहले से ही व्यापार प्रतिबंधों के चलते लेन-देन कम है. निर्यातक सतर्क हैं, लेकिन घबराहट की स्थिति नहीं है.

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US Tariff Impact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारत में इसके असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत पर इस फैसले का प्रभाव न्यूनतम रहने की संभावना है. सूत्रों के अनुसार, भारत और ईरान के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंध सीमित हैं और अमेरिका के हालिया टैरिफ उपायों से भारत के कुल व्यापार पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है.

भारत-ईरान व्यापार बेहद सीमित

सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए सूत्रों ने बताया कि ईरान भारत के शीर्ष 50 वैश्विक व्यापारिक साझेदारों में भी शामिल नहीं है. पिछले वर्ष भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का सिर्फ 0.15% है. सूत्रों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक हालात और ईरान पर जारी प्रतिबंधों को देखते हुए आने वाले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा और घट सकता है.

ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार कौन

वर्ष 2024 में ईरान का कुल आयात करीब 68 अरब अमेरिकी डॉलर रहा. इसमें उसका सबसे बड़ा साझेदार यूएई रहा, जिससे उसने लगभग 21 अरब डॉलर (30%) का आयात किया. इसके बाद, चीन से 17 अरब डॉलर (26%), तुर्की से 11 अरब डॉलर (16%) और यूरोपीय संघ से करीब 6 अरब डॉलर (9%) का आयात हुआ. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस सूची में भारत का हिस्सा मात्र 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जो कुल ईरानी आयात का लगभग 2.3% बनता है. इससे साफ है कि ईरान के कुल व्यापार ढांचे में भारत की भूमिका सीमित है।

निर्यातक सतर्क, लेकिन घबराहट नहीं

भारतीय निर्यात समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े झटके की आशंका नहीं जता रहा. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के सीईओ और डीजी अजय सहाय ने कहा कि वह इस घोषणा से अनावश्यक रूप से चिंतित नहीं हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग और बैंक ईरान के साथ केवल उन्हीं वस्तुओं का व्यापार करते हैं, जो अमेरिकी ओएफएसी (ओएफएसी) प्रतिबंधों के दायरे से बाहर हैं. ऐसे में भारत के वैध निर्यात और भुगतान तंत्र पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम है.

बासमती चावल जैसे कुछ क्षेत्रों में रहा है असर

हालांकि, कुछ खास क्षेत्रों में ईरान भारत के लिए अहम बाजार रहा है. इंडिया गेट ब्रांड की मूल कंपनी केआरबीएल के बल्क एक्सपोर्ट्स हेड अक्षय गुप्ता ने बताया कि एक समय ईरान भारतीय बासमती चावल का प्रमुख बाजार था. उन्होंने कहा, “जब ईरान के साथ व्यापार पूरी तरह खुला था, तब केआरबीएल ने करीब 2.5 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था. लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में प्रतिबंधों और बढ़ते व्यापारिक अवरोधों ने हमारे कारोबार को काफी प्रभावित किया है.” उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में ईरान को होने वाला निर्यात पहले ही सीमित हो चुका है. इसलिए नए टैरिफ का प्रभाव भी दायरे में ही रहेगा.

ट्रंप का ऐलान और तत्काल प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ऐलान किया कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करना जारी रखेंगे, उन्हें अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25% टैरिफ देना होगा. उन्होंने इसे तत्काल प्रभाव से लागू होने वाला और अंतिम व निर्णायक आदेश बताया. इस घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल जरूर बढ़ी है, लेकिन भारत को लेकर सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश की व्यापारिक संरचना और सीमित ईरान निर्भरता के चलते इसका व्यापक असर नहीं पड़ेगा.

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भारत पर प्रभाव सीमित

कुल मिलाकर सरकार का आकलन यही है कि ईरान के सहयोगी देशों पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ से भारत को कोई बड़ा आर्थिक झटका नहीं लगेगा. हालांकि, अधिकारी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और निर्यातकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित बदलाव से समय रहते निपटा जा सके.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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