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होलिका दहन 2026: जानें पूजा विधि, जरूरी सामग्री और सही दिशा

Updated at : 28 Feb 2026 1:15 PM (IST)
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Holika Dahan Puja Vidhi

होलिका दहन की पूजा विधि

Holika Dahan 2026: 03 मार्च 2026 को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, जरूरी सामग्री, परिक्रमा का महत्व और दहन के बाद राख का उपयोग कैसे करें—आसान भाषा में पूरी जानकारी यहां जानें.

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Holika Dahan 2026:   होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को यह पर्व मनाया जाता है. साल 2026 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 03 मार्च को शाम 06 बजकर 22 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस समय विधि-विधान से पूजा और दहन करना शुभ माना गया है. आइए आसान भाषा में जानते हैं होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि, जरूरी सामग्री, परिक्रमा का महत्व और दहन के बाद राख का क्या करना चाहिए.

होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि

  • शाम को स्नान करके साफ और शुद्ध कपड़े पहनें. इसके बाद परिवार के साथ होलिका स्थल पर जाएं.
  • सबसे पहले होलिका के सामने जल से आचमन करें.
  • भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें.
  • रोली, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित करें.
  • कच्चा सूत (मौली) होलिका पर लपेटें.
  • हल्दी, गुलाल और गुड़ चढ़ाएं.
  • नारियल और अनाज (गेहूं या जौ) अर्पित करें.
  • पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें. मान्यता है कि होलिका की अग्नि में अपनी नकारात्मक सोच और बुराइयों को भी समर्पित कर देना चाहिए.

कौन-कौन सी सामग्री जरूरी है?

होलिका दहन की पूजा के लिए कुछ खास सामग्री की जरूरत होती है.

  • रोली और अक्षत
  • फूल और माला
  • हल्दी और गुलाल
  • कच्चा सूत (मौली)
  • गुड़
  • नारियल
  • गेहूं या जौ की बालियां
  • पानी से भरा लोटा
  • अगरबत्ती या दीपक

इन सामग्रियों से विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.

सही दिशा का ध्यान क्यों जरूरी है?

होलिका दहन करते समय दिशा का भी विशेष महत्व होता है. अगर संभव हो तो होलिका पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाएं. पूजा करते समय भी पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सही दिशा में पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं.

होलिका की परिक्रमा का महत्व

पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. परिवार के सभी सदस्य मिलकर होलिका की कम से कम 3 या 7 बार परिक्रमा करें. परिक्रमा करते समय भगवान का नाम लें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें. मान्यता है कि परिक्रमा करने से रोग, दोष और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. महिलाएं विशेष रूप से अपने परिवार की रक्षा और खुशहाली के लिए परिक्रमा करती हैं.

ये भी पढ़ें: ग्रहण के दिन होलिका दहन शुभ है या अशुभ? जानें पौराणिक मान्यता

दहन के बाद राख का क्या करें?

  • होलिका दहन के बाद बची हुई राख को पवित्र माना जाता है.
  • अगले दिन सुबह उस राख को घर लाकर माथे पर तिलक के रूप में लगाना शुभ माना जाता है.
  • कुछ लोग राख को घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर भी रखते हैं. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और घर में शांति बनी रहती है.
  • खेतों में राख डालना भी शुभ माना जाता है, इससे फसल अच्छी होने की मान्यता है.
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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