Budget Suggestions: सलाहकार फर्म डेलॉयट इंडिया ने आगामी आम बजट को लेकर सरकार को अहम सुझाव दिए हैं. कंपनी का कहना है कि अगर बजट में आयात शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार किया जाए और रणनीतिक क्षेत्रों में आवंटन बढ़ाया जाए, तो इससे घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी और भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी. डेलॉयट के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपने मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत है.
एसईजेड सुधार और शुल्क ढांचे में बदलाव पर जोर
डेलॉयट इंडिया ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी वकालत की है. फर्म के अनुसार, ‘छोड़े गए शुल्क’ के आधार पर घरेलू आपूर्ति की अनुमति, उप-अनुबंध मानदंडों को सरल बनाना और मूल्यवर्धन को सीमा-शुल्क से छूट देना ऐसे कदम हैं, जिनसे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी. इसके साथ ही, डेलॉयट ने सीमित दायरे में एक सीमा-शुल्क माफी योजना लाने का सुझाव दिया है. कंपनी का मानना है कि इससे व्यापार करना आसान होगा, निर्यातकों को राहत मिलेगी और लंबित कर विवादों व मुकदमों में भी कमी आएगी.
घरेलू विनिर्माण और निर्यात को मजबूत करने की जरूरत
डेलॉयट इंडिया का कहना है कि भारत के निर्यात को लगातार गति देने के लिए बजट को घरेलू विनिर्माण को सशक्त करने की मौजूदा सरकारी कोशिशों को और आगे बढ़ाना चाहिए. फर्म के मुताबिक, अगर भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में मजबूत भूमिका निभानी है, तो लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, प्रक्रियागत सरलता और कर संरचना में स्पष्टता बेहद जरूरी है. वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट एक फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है. ऐसे में उद्योग जगत की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार किस हद तक विनिर्माण और निर्यात केंद्रित सुधारों को बजट में जगह देती है.
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कलपुर्जों पर शुल्क घटाने की सिफारिश
डेलॉयट इंडिया में साझेदार गुलजार दिदवानिया ने कहा, “एक प्रमुख उपाय सीमा शुल्क संरचना को अधिक युक्तिसंगत बनाना होगा. उन क्षेत्रों में कलपुर्जों और घटकों पर शुल्क कम करना चाहिए, जहां भारत ने अपनी उत्तम विनिर्माण क्षमता हासिल कर ली है.” उन्होंने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण तैयार उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करेगा, घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगा और निर्यात के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा. डेलॉयट के अनुसार, अगर कस्टम ड्यूटी नीति को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप ढाला जाता है, तो भारत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘निर्यात हब’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है.
भाषा इनपुट के साथ
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