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अमेरिका ने भारतीय सोलर पैनलों पर 126% शुल्क लगाया, एक्सपोर्टर्स को बड़ा झटका

Updated at : 25 Feb 2026 1:29 PM (IST)
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US Solar Import Duty on India

अमेरिकी मार्केट में भारतीय सोलर का 'सूर्यास्त'? 126% ड्यूटी से निर्यात पर लगा ब्रेक

अमेरिका ने भारतीय सोलर पैनलों पर 126% का भारी टैक्स लगा दिया है. इससे अमेरिका में भारतीय पैनलों की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी. अमेरिकी कंपनियों का आरोप है कि भारत सरकार सब्सिडी देकर खेल बिगाड़ रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए वहां टिकना अब बहुत मुश्किल होगा.

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US Solar Import Duty on India: अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंधों में हाल ही में एक बड़ा मोड़ आया है. अमेरिकी वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) ने भारत से आने वाले सोलर पैनलों और सेल पर 126% की भारी शुरुआती ड्यूटी लगा दी है. यह फैसला न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह वैश्विक रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई चेन में मचे घमासान को भी दर्शाता है.

क्या है पूरा मामला ?

अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स के एक समूह, ‘अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड’ ने शिकायत दर्ज की थी कि विदेशी कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद ‘डंप’ कर रही हैं. उनका आरोप है कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस जैसे देश अपने मैन्युफैक्चरर्स को गलत तरीके से सरकारी सब्सिडी दे रहे हैं, जिससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को व्यापार में भारी नुकसान हो रहा है.

क्या हैं ये ड्यूटीज ?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार को निष्पक्ष बनाने के लिए दो तरह के मुख्य टैक्स (टैरिफ) लगाए जाते हैं.

  • एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty): जब कोई देश अपने माल को जानबूझकर बहुत कम कीमत पर (अपनी उत्पादन लागत से भी कम पर) दूसरे देश में बेचता है ताकि वहां के बाजार पर कब्जा किया जा सके, तो इसे ‘डंपिंग’ कहते हैं. इसे रोकने के लिए जो टैक्स लगता है, उसे ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ कहा जाता है.
  • काउंटरवेलिंग ड्यूटी (Countervailing Duty – CVD): इसे ‘सब्सिडी-विरोधी शुल्क’ भी कह सकते हैं. अगर कोई सरकार (जैसे भारत सरकार) अपने एक्सपोर्टर्स को वित्तीय मदद या सब्सिडी देती है जिससे उनके उत्पाद सस्ते हो जाते हैं, तो उस सब्सिडी के असर को खत्म करने के लिए आयात करने वाला देश (जैसे अमेरिका) ‘काउंटरवेलिंग ड्यूटी’ लगाता है.

भारतीय कंपनियों के लिए रास्ता बंद ?

सिटीग्रुप इंक के विश्लेषकों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ के बाद भारतीय सोलर उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में टिकना लगभग असंभव हो जाएगा. अमेरिकी कंपनियों का एक गंभीर आरोप यह भी है कि चीनी कंपनियां सीधे तौर पर अमेरिकी टैक्स से बचने के लिए भारत, इंडोनेशिया और लाओस जैसे देशों का इस्तेमाल ‘ट्रांस-शिपमेंट’ (Trans-shipment) हब के रूप में कर रही हैं. उनका दावा है कि चीन अपना माल इन देशों के रास्ते अमेरिका भेज रहा है ताकि वह टैरिफ से बच सके.

देशपुरानी ड्यूटी (लगभग)नई शुरुआती ड्यूटीवर्तमान स्थिति
भारत10%126%बाजार में प्रतिस्पर्धा से बाहर
इंडोनेशिया10%143%सबसे अधिक प्रभावित
लाओस10%81%भारत से थोड़ा बेहतर स्थिति में

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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