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UNICEF YuWaah: महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाएगा यूनिसेफ युवाह, झारखंड-ओडिशा से पायलट पहल की शुरुआत

Updated at : 27 Mar 2025 4:25 PM (IST)
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UNICEF YuWaah

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UNICEF YuWaah: यूनिसेफ युवाह और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने झारखंड, ओडिशा समेत 5 राज्यों में महिलाओं और युवाओं को डिजिटल व उद्यमशीलता के अवसर देकर सशक्त बनाने की पहल शुरू की है. यह पायलट प्रोजेक्ट स्वरोजगार, कौशल विकास व आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगा. युवा हब, लखपति दीदी, कंप्यूटर दीदी केंद्र जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी.

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UNICEF YuWaah: ग्रामीण भारत में युवाओं और महिलाओं को डिजिटल और उद्यमशीलता के अवसरों से जोड़कर सशक्त बनाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और यूनिसेफ युवाह (YuWaah) ने एक साथ कदम बढ़ाया है. इस साझेदारी के तहत झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से एक पायलट पहल शुरू की जा रही है. इसका उद्देश्य स्वरोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास के जरिए ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है.

यूनिसेफ युवाह पहल का उद्देश्य

यूनिसेफ युवाह पहल का मुख्य लक्ष्य 18 से 29 वर्ष की उम्र की महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमशीलता के अवसरों से जोड़ना है. इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव टीके अनिल कुमार ने इस पहल को बजट 2025-26 के ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन कार्यक्रम के अनुरूप बताते हुए कहा कि 10 करोड़ स्वयं सहायता समूह (SHG) की एक तिहाई सदस्य युवा हैं, जो इस बदलाव में अहम भूमिका निभाएंगे.

कैसे होगा बदलाव?

  • युवा हब: यह एक डिजिटल एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म होगा, जो नौकरियों, कौशल प्रशिक्षण और स्वयंसेवा के अवसर प्रदान करेगा.
  • लखपति दीदी: सरकार के इस विजन के तहत 2,500 महिला उद्यमियों को तैयार किया जाएगा. यदि यह सफल रहा, तो 30 लाख 50 हजार महिलाओं तक इसका विस्तार किया जाएगा.
  • कंप्यूटर दीदी केंद्र: पंचायत स्तर पर महिलाओं द्वारा संचालित 100 डिजिटल केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे गांवों में तकनीकी शिक्षा और डिजिटल सेवाएं सुलभ होंगी.
  • डिजिटल गर्ल्स हब (डीजीएच): यह पहल युवा महिलाओं को डिजिटल कौशल और रोजगार के अवसर देने पर केंद्रित होगी.
  • दीदी की दुकान: पांच ब्लॉकों में 250 खुदरा स्टोर खोले जाएंगे, जो स्थानीय उत्पादकों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेंगे.
  • सामुदायिक प्रबंधन प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी): ये केंद्र ग्रामीण युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, जिससे वे नए कौशल सीखकर रोजगार प्राप्त कर सकें.

महिलाओं और युवाओं को आर्थिक स्वतंत्रता

यूनिसेफ युवाह की उप-प्रतिनिधि शारदा थपलिया के अनुसार, डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कौशल विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव आएगा. इस पहल के जरिए महिलाओं और युवाओं को स्थायी आजीविका और आर्थिक स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे वे अपने समुदाय के विकास में योगदान कर सकेंगे.

यूनिसेफ युवाह के बारे में जानें

  • यूनिसेफ युवाह को जनरेशन अनलिमिटेड (GenU) के इंडिया चैप्टर के तौर 2019 में लॉन्च किया गया था.
  • 100 मिलियन युवाओं को आर्थिक अवसरों से जोड़ना.
  • 200 मिलियन युवाओं को कौशल विकास के जरिये आत्मनिर्भर बनाना.
  • 300 मिलियन युवाओं को लीडरशिप और सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा बनाना.

स्मृति ईरानी ने भी की है पहल की सराहना

इस पहल को भारत सरकार, यूनिसेफ और कई अन्य संगठनों का समर्थन प्राप्त है. माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इस पहल की सराहना की है.

महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर का द्वार

यूनिसेफ युवाह और ग्रामीण विकास मंत्रालय की यह साझेदारी महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलने जा रही है. डिजिटल सशक्तिकरण, उद्यमशीलता और कौशल विकास के माध्यम से यह पहल भारत में सतत विकास और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह मॉडल पूरे देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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