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बैंकों के पास बिना क्लेम के पड़ी हैं 1.84 लाख करोड़ की प्रॉपर्टी, निर्मला सीतारमण का बड़ा खुलासा

Updated at : 04 Oct 2025 5:37 PM (IST)
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Unclaimed Property

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Unclaimed Property: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुलासा किया कि बैंकों और नियामक संस्थाओं के पास 1.84 लाख करोड़ रुपये की बिना दावे वाली संपत्तियां पड़ी हैं. उन्होंने गांधीनगर से “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य इन संपत्तियों को उनके असली मालिकों तक पहुंचाना है. आरबीआई के यूडीजीएएम पोर्टल के जरिए लोग अपनी जमा राशियों का दावा कर सकते हैं. सरकार ने भरोसा दिलाया कि यह राशि पूरी तरह सुरक्षित है.

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Unclaimed Property: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को देश की वित्तीय प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि बैंकों, बीमा कंपनियों और नियामक संस्थाओं के पास 1.84 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां बिना किसी दावे के पड़ी हैं. यह राशि उन जमाओं, निवेशों और नीतियों से जुड़ी है, जिन पर वर्षों से किसी ने दावा नहीं किया है.

आपकी पूंजी, आपका अधिकार अभियान शुरू

निर्मला सीतारमण ने गुजरात के गांधीनगर से तीन महीने के विशेष अभियान ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ की शुरुआत की. इस कार्यक्रम में गुजरात के वित्त मंत्री कनुभाई देसाई और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. इस अभियान का उद्देश्य है कि बैंकों और नियामक संस्थाओं के पास पड़ी बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों को उनके असली मालिकों या उत्तराधिकारियों तक पहुंचाया जा सके.

बैंकों और नियामकों के पास पड़ी है बड़ी रकम

निर्मला सीतारमण ने कहा कि विभिन्न बैंकों, बीमा कंपनियों और नियामक निकायों के पास 1.84 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियां बिना दावे के पड़ी हैं. इनमें बैंक जमा, बीमा, भविष्य निधि (पीएफ) और शेयरों में निवेश शामिल हैं. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि इन संपत्तियों के असली मालिकों की पहचान कर उन्हें उनका अधिकार लौटाया जाए.

तीन स्तंभों पर आधारित है योजना

वित्त मंत्री ने कहा कि यह अभियान तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है.

  • जागरूकता: लोगों को बताया जाएगा कि उनका पैसा या निवेश कहां अटका है.
  • पहुंच: उन्हें संबंधित पोर्टल्स और प्रक्रियाओं तक पहुंच दी जाएगी.
  • कार्रवाई: सही दस्तावेज मिलने पर धनराशि उनके खाते में वापस दी जाएगी.

निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि वास्तविक दावेदारों तक धन पहुंचाना है.

संपत्तियों का ट्रांसफर और सुरक्षा

निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि अगर किसी संपत्ति पर लंबे समय तक दावा नहीं किया जाता, तो उसे एक संस्था से दूसरी संस्था में स्थानांतरित कर दिया जाता है. बैंक जमा राशि आरबीआई के पास चली जाती है. शेयर और निवेश भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (आईईपीएफ) में ट्रांसफर होते हैं. सीतारमण ने यह भी कहा कि यह पूरी राशि सुरक्षित है और जब भी कोई व्यक्ति उचित दस्तावेजों के साथ दावा करेगा, उसे उसका धन लौटा दिया जाएगा.

आरबीआई का पोर्टल बना माध्यम

वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई ने ‘यूडीजीएएम’ (अनक्लेम्ड डिपॉजिट गेटवे टू एक्सेस इन्फॉर्मेशन) पोर्टल बनाया है, जिससे लोग अपनी बिना दावे वाली जमा राशियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा, “यह अब एक संस्था से दूसरी संस्था में जाने वाली राशि नहीं है, बल्कि जैसे ही आप दावा करेंगे, आपको तुरंत पैसा मिल जाएगा.”

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जनजागरूकता पर दिया गया विशेष जोर

सीतारमण ने सरकारी और प्राइवेट बैंक के अधिकारियों से कहा कि वे आम जनता में जागरूकता फैलाएं और लोगों को यह बताएं कि उनका पैसा सुरक्षित है. उन्होंने कहा, “लोगों को प्रेरित करें कि वे अपने पुराने दस्तावेज खोजें, पोर्टल पर पंजीकरण करें और अपनी संपत्ति का दावा करें.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही मंत्रालय को निर्देश दिया है कि हर नागरिक तक पहुंचें और सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति अपनी पूंजी से वंचित न रहे. इस प्रकार, यह अभियान न केवल एक वित्तीय सुधार का प्रयास है, बल्कि नागरिकों को उनके अधिकार से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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