'कोरोना वायरस के एहतियाती कदम के तहत आइसोलेट कर्मचारियों को पूरी सैलरी देगा टाटा ग्रुप'

Updated at : 20 Mar 2020 9:04 PM (IST)
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'कोरोना वायरस के एहतियाती कदम के तहत आइसोलेट कर्मचारियों को पूरी सैलरी देगा टाटा ग्रुप'

कोरोना वायरस संकट के बीच टाटा समूह की कंपनियां अस्थायी कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों को मार्च-अप्रैल का पूरा वेतन देगी.

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नयी दिल्ली : कोरोना वायरस संकट के बीच टाटा समूह की कंपनियां अस्थायी कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों को मार्च-अप्रैल का पूरा वेतन देगी. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शुक्रवार को कहा कि यदि कोई अस्थायी कर्मचारी या दिहाड़ी श्रमिक आइसोलेट रहने के लिए उठाये गये कदमों के चलते काम पर नहीं पहुंचता है, तो ऐसे हालात में भी टाटा समूह की कंपनियां उन्हें मार्च और अप्रैल का पूरा वेतन देंगी.

चंद्रशेखरन ने कहा कि कोरोना वायरस एक वैश्विक महामारी है. ऐसे मुश्किल समय में देश को सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि टाटा समूह की सभी कंपनियों से बहुत अधिक सावधानी बरतने को कहा गया है. हमारे लिए हमारे कर्मचारियों, उनके परिवारों, हमारे आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों और अन्य सभी के स्वास्थ्य की रक्षा सबसे अहम है. उन्होंने कहा कि टाटा समूह की कंपनियों ने बड़े स्तर पर घर से कार्य की सुविधा शुरू कर दी है.

चंद्रशेखरन ने कहा कि हमने अपनी कंपनियों से तेजी से व्यापक स्तर पर घर से कार्य की सुविधा शुरू करने के लिए कहा है, ताकि बहुत अनिवार्य स्थितियों में ही कर्मचारियों को घर से बाहर निकलना पड़े. जनहित में सामानों या सेवाओं की आपूर्ति करने वाले कर्मचारियों को इससे अलग रखा गया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति का ज्यादा नुकसान समाज के निचले तबके को होगा. ऐसे संकट के समय में उनके समूह की कंपनियां अस्थायी और दिहाड़ी श्रमिकों को पूरा वेतन देंगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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