स्पाइसजेट का संकट: 20% स्टाफ की कटौती और ₹621 करोड़ का घाटा; अकासा से भी पिछड़ी एयरलाइन

Spicejet (फोटो: Wikipedia)
Spicejet Staff Layoff: भारी कर्ज और विमानों की कमी के चलते स्पाइसजेट 20% स्टाफ कम कर रही है. ₹621 करोड़ के तिमाही घाटे और टैक्स बकाया ने परिचालन को मुश्किल बना दिया है, जिससे एयरलाइन अब बाजार हिस्सेदारी में अकासा एयर से भी पीछे हो गई है.
Spicejet Staff Layoff: देश की प्राइवेट एयरलाइन स्पाइसजेट गंभीर संकट से गुजर रही है. परिचालन क्षमता घटने के चलते कंपनी ने करीब 20 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती का फैसला लिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 500 से ज्यादा कर्मचारियों को अस्थायी रूप से बिना वेतन अवकाश पर भेजा जा सकता है.
सीमित विमान और घटती उड़ानें
कंपनी के पास इस समय लगभग 6,800 कर्मचारी हैं, लेकिन ऑपरेशन के लिए केवल 13 विमान ही बचे हैं, जिनमें 10 बोइंग और 3 क्यू400 शामिल हैं. इसके अलावा 14 विमान वेट-लीज पर चलाए जा रहे हैं, जिससे लागत और बढ़ रही है.
सैलरी में देरी और बकाया का दबाव
स्पाइसजेट की वित्तीय हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सीनियर अधिकारियों को जनवरी से वेतन नहीं मिला है. अन्य कर्मचारियों को भी 2 से 3 महीने की देरी से सैलरी दी जा रही है. कंपनी पर जीएसटी, टीडीएस और पीएफ मिलाकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है.
मार्केट शेयर में गिरावट
घरेलू विमानन बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी घटकर 3.9 प्रतिशत रह गई है. वहीं, नई एयरलाइन अकासा 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आगे निकल चुकी है. इससे स्पाइसजेट की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हुई है.
कर्मचारियों में बढ़ती नाराजगी
कई इंजीनियर पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और उनका नोटिस पीरियड भी समय से पहले समाप्त कर दिया गया है. पुराने कर्मचारी अपने फुल एंड फाइनल भुगतान में देरी को लेकर असंतोष जता रहे हैं.
पायलट्स की सैलरी में कटौती
पायलट्स के लिए नया नियम लागू किया गया है, जिसके तहत उन्हें 21 दिन काम और 9 दिन छुट्टी करनी होगी. इस बदलाव के कारण कैप्टन का मासिक वेतन 7.5 लाख रुपये से घटकर करीब 6 लाख रुपये रह गया है.
तिमाही घाटा बढ़कर 621 करोड़ रुपये
जुलाई से सितंबर तिमाही (Q2FY26) में कंपनी का घाटा बढ़कर 621 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 458 करोड़ रुपये था. इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी घटकर 792 करोड़ रुपये रह गया.
घाटे के तीन बड़े कारण
- ऑपरेटिंग कॉस्ट में वृद्धि: पुराने विमानों की मरम्मत, इंजन बदलने और नए विमान जोड़ने में खर्च बढ़ गया है. कई विमान ग्राउंडेड रहने से नुकसान और बढ़ा.
- मानसून में कम डिमांड: बरसात के मौसम में यात्रियों की संख्या घटने से टिकट बिक्री कम हुई, जिससे कंपनी की आय पर असर पड़ा.
- सप्लाई चेन की समस्या: ग्लोबल लेवल पर पार्ट्स और इंजन की कमी के कारण कई विमान समय पर तैयार नहीं हो सके, जिससे उड़ानों पर असर पड़ा.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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