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मिलिए, एसबीआई एमएफ की को-फंड मैनेजर मानसी सजेजा से, जो बताती हैं कमाई के तगड़े टिप्स

Updated at : 06 Mar 2025 10:31 PM (IST)
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Manasi Sajeja

एसबीआई म्यूचुअल फंड की को-फंड मैनेजर मानसी सजेजा.

Investment Tips: एसबीआई म्यूचुअल फंड की फंड मैनेजर मानसी सजेजा के करियर सफर, निवेश रणनीति और भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में उनकी भूमिका काफी दिलचस्प और प्रेरक है. यहां हम एक कहानी पेश करने जा रहे हैं, जिसमें यह बताएंगे कि मानसी सजेजा ने कैसे फंड मैनेजर तक का सफर तय किया और निवेशकों के लिए उनकी क्या सलाह है.

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Investment Tips: म्यूचुअल फंड आज की डेट में निवेश का सबसे लोकप्रिय ऑप्शन बन गया है. शेयर बाजार का जोखिम उठाने वाली युवा पीढ़ी बचत योजनाओं में निवेश करने की बजाय एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने में अधिक दिलचस्पी रखते हैं. इस युवा पीढ़ी को म्यूचुअल फंड से कमाई के सबसे तगड़े टिप्स एसबीआई म्यूचुअल फंड की फंड मैनेजर बताती हैं. इनका नाम मानसी सजेजा है. मानसी सनेजा छह फंडों की को-फंड मैनेजर हैं.

एसबीआई म्यूचुअल फंड में अहम भूमिका निभा रही हैं मानसी सनेजा

मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई म्यूचुअल फंड की को-फंड मैनेजर जिन छह फंडों का मैनेजमेंट करती हैं, उनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये हैं. एसबीआई म्यूचुअल फंड भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है और मानसी सजेजा इस महत्वपूर्ण संस्थान में एक अहम भूमिका निभा रही हैं.

मानसी सजेजा का करियर सफर

फाइनेंशियल मार्केट में अपना करियर बनाने वाली मानसी सजेजा ने बताया कि जब वह पढ़ाई कर रही थीं, तब भारत में फाइनेंशियल मार्केट इतना विकसित नहीं था. एनालिस्ट, रिसर्च और बाय-साइड जैसी अवधारणाएं प्रचलन में नहीं थीं. ऐसे में फंड मैनेजर बनने का सपना देखना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने बिजनेस और इकोनॉमिक्स में अपनी रुचि को बनाए रखा. सजेजा ने MBA (फाइनेंस) किया और वह ऐसा करियर चाहती थीं, जहां उन्हें भारतीय प्रमोटर्स से मिलने का मौका मिले. करीब 19 साल पहले उन्हें एक ग्लोबल फर्म की ऑफशोर यूनिट में रिसर्च करने का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने भारत में रहकर अपना करियर बनाने का फैसला किया.

मानसी सनेजा ने अपने करियर की शुरुआत एक रेटिंग एजेंसी में क्रेडिट एनालिस्ट के रूप में की. इसके बाद, वह एक म्यूचुअल फंड कंपनी में एनालिस्ट बन गईं. यह उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ था. उन्होंने धीरे-धीरे अनुभव प्राप्त किया और फंड मैनेजर बनने तक का सफर तय किया.

महिलाओं के लिए अवसर और चुनौतियां

मानसी सजेजा का मानना है कि आज के दौर में भारत में महिलाओं के लिए करियर ग्रोथ की कोई बाधा नहीं है. अगर वे मेहनत और लगन से सीखती हैं, तो सफलता निश्चित है. फंड मैनेजर बनने के सफर में कई कड़ियां जुड़ती जाती हैं.

  • एनालिस्ट से शुरुआत करना
  • सीनियर एनालिस्ट बनना
  • कुछ पोर्टफोलियो संभालना
  • फिर फंड मैनेजर की भूमिका निभाना
  • निवेशकों के लिए मानसी सजेजा का मंत्र

काफी परिपक्व हो गया है आज का रिटेल इन्वेस्टर

मानसी सजेजा के अनुसार, आज का रिटेल इन्वेस्टर पहले की तुलना में काफी परिपक्व हो गया है. खासकर 1990 के दशक की तुलना में अब निवेशकों की समझ काफी बढ़ गई है. वह शेयरों को केवल एक स्पेक्युलेटिव एसेट के रूप में नहीं देखते, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के रूप में समझते हैं.

मानसी सजेजा की सलाह

  • शॉर्ट-टर्म गेन पर ध्यान न दें. निवेश को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखें.
  • गोल-ओरिएंटेड इन्वेस्टमेंट करें. अपने निवेश लक्ष्यों को स्पष्ट रखें।
  • लगातार सीखते रहें. मार्केट में बने रहने के लिए स्किल्स डेवलप करें.

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काफी प्रेरक है मानसी सजेजा का सफर

मानसी सजेजा का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है, जो फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट इंडस्ट्री में अपना करियर बनाना चाहते हैं. उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही रणनीति, सीखने की लगन और मेहनत से कोई भी इस क्षेत्र में ऊंचाइयों को छू सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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