महंगाई से आम आदमी को मिली राहत, फरवरी में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ी उम्मीद

Retail inflation
Retail Inflation: पिछले सप्ताह आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई के मोर्चे पर चिंता का हवाला देते हुए रेपो रेट को 6.5% पर स्थिर रखा था. करीब 6 साल तक आरबीआई के गवर्नर रहे शक्तिकांत दास के स्थान पर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नए गवर्नर का पदभार संभाला है.
Retail Inflation: खाने-पीने की चीजों की कीमतों में नरमी आने से नवंबर 2024 में खुदरा महंगाई घटकर 5.48% पर आ गई. इससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की फरवरी 2025 में होने वाली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर में कटौती की उम्मीद दिख रही है. गुरुवार को घोषित आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अक्टूबर में 6.21% के स्तर पर थी, जबकि पिछले साल नवंबर में यह 5.55% थी.
सब्जी और दालों की कीमतों में खासी गिरावट
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ”नवंबर 2024 में सब्जियों, दालों, चीनी, मिठाइयों, फलों, अंडों, दूध, मसालों, परिवहन, संचार और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों की कीमतों में खासी गिरावट देखी गई है.” आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने फूड आइटम्स की महंगाई घटकर 9.04% रह गई, जबकि अक्टूबर में यह 10.87% और नवंबर, 2023 में 8.70% थी.
लहसून, आलू और फूल गोभी सबसे अधिक महंगे
आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर, 2024 में सालाना आधार पर सबसे अधिक महंगा होने वाले उत्पादों में लहसुन (85.14), आलू (66.65), फूलगोभी (47.7), बंद गोभी (43.58) और नारियल तेल (42.13) शामिल थे. वहीं, सालाना आधार पर सबसे कम महंगी प्रमुख वस्तुओं में जीरा (-35.04), अदरक (-16.96), रसोई गैस (-10.24) और सूखी मिर्च (-9.73) रहीं.
महंगाई पर अंकुश लगाएगा आरबीआई
सरकार ने खुदरा महंगाई को 2% की घट-बढ़ के साथ 4% पर रखने का दायित्व आरबीआई को सौंपा हुआ है. आरबीआई ने फरवरी, 2023 से ही रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा है. रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि खाद्य महंगाई में कमी की वजह से खुदरा महंगाई उम्मीद के अनुरूप नवंबर, 2024 में 5.5% पर आ गई. यह आरबीआई की मध्यम अवधि वाली लक्षित सीमा के भीतर है जिससे राहत मिलने की उम्मीद है.
महंगाई घटेगी तब होगी ब्याज दरों में कटौती
अदिति नायर ने कहा, ”यदि दिसंबर, 2024 तक मुख्य मुद्रास्फीति 5.0% या उससे कम हो जाती है, तो फरवरी 2025 की मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कटौती होने की संभावना बहुत अधिक होगी. हम प्रतीक्षित दर कटौती चक्र में 0.25-0.25% की दो दर कटौतियों की अपनी अपेक्षा को बनाए रखते हैं.”
रेपो रेट 6.5% पर स्थिर
पिछले सप्ताह आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई के मोर्चे पर चिंता का हवाला देते हुए रेपो रेट को 6.5% पर स्थिर रखा था. करीब 6 साल तक आरबीआई के गवर्नर रहे शक्तिकांत दास के स्थान पर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नए गवर्नर का पदभार संभाला है. रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान को 4.5% से बढ़ाकर 4.8% कर दिया है. इसने यह भी कहा कि खाद्य कीमतों पर दबाव के कारण दिसंबर तिमाही में मुख्य मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका है.
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ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक महंगाई
खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई-अगस्त के दौरान औसतन 3.6%, सितंबर में 5.5% और अक्टूबर 2024 में 6.2% हो गई. एनएसओ के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि नवंबर में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर क्रमशः 5.95% और 4.83% थी. राज्यों में सबसे अधिक महंगाई छत्तीसगढ़ (8.39%) और सबसे कम महंगाई दिल्ली (2.65%) में दर्ज की गई. एनएसओ ने कहा, ”अगस्त से अक्टूबर, 2024 तक वृद्धि का ट्रेंड रहा. इसके बाद नवंबर, 2024 में महंगाई में फिर से गिरावट आई है. यह गिरावट मुख्य रूप से ‘खाद्य और पेय पदार्थ’ की कीमतें गिरने के कारण है.”
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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