टैक्स बचाने के लिए पीएफ खाते में मोटी रकम रखने वालों की खैर नहीं, नियमों में बदलाव करने की तैयारी में मोदी सरकार

Updated at : 10 Feb 2021 4:05 PM (IST)
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टैक्स बचाने के लिए पीएफ खाते में मोटी रकम रखने वालों की खैर नहीं, नियमों में बदलाव करने की तैयारी में मोदी सरकार

PPF News : कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) के लिए टैक्स छूट को हटा दिया गया है.

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PPF News : मोटी कमाई करने वालों को अब पीएफ खाते में पैसा रखना आसान नहीं होगा. भविष्य निधि (PF) खाते में ढाई लाख रुपये से अधिक के अंशदान पर सरकार ने टैक्स वसूलने का फैसला किया है. इसके लिए नियमों में बदलाव करने की खातिर सरकार ने एक प्रस्ताव किया है. उसने वित्त वर्ष में 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा के अंशदान पर अर्जित ब्‍याज पर इनकम टैक्‍स वसूलने का फैसला किया है.

इस बाबत एक अधिकारी ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) के लिए टैक्स छूट को हटा दिया गया है. नियम में इस बात का उल्‍लेख किया गया है. हालांकि, इस मामले को लेकर पूछे गए सवाल का केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कोई जवाब नहीं दिया. इस बारे में कर विशेषज्ञों की राय है कि वित्त वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा के अंशदान के ब्‍याज पर टैक्‍स लगाना प्रमुख बदलावों में से एक है. हालांकि, बजट दस्‍तावेज नियम में बदलाव की व्‍यवहार्यता को नहीं बताता है.

कर विशेषज्ञों का कहना है कि बजट दस्तावेज में दी गई धाराएं कहती हैं कि पीपीएफ इसमें शामिल है, लेकिन खुद पीपीएफ नियम में साल में 1.5 लाख रुपये तक के अंशदान की सीमा है. लिहाजा, बैंक इस सीमा से अधिक रकम को स्‍वीकार नहीं करते हैं. ऐसे में, वैसे भी करदाता 2.5 लाख रुपये की सीमा पार नहीं कर पाते हैं.”

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर कानून में बदलाव का कोई असर नहीं होगा. इसकी वजह यह है कि पीपीएफ अंशदान में किसी बदलाव के लिए पीपीएफ नियम में बदलाव की जरूरत होगी. उनका कहना है कि जब तक पीपीएफ के नियमों को बदला नहीं जाता है और इसमें अंशदान की सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये से ज्‍यादा नहीं की जाती है, तब तक पीपीएफ के नजरिये से सेक्‍शन 10(11) में संशोधन सिर्फ किताबी रहेगा.

उधर, सरकार का तर्क है कि अच्छी कमाई करने वाले कई लोग कर्मचारी भविष्य निधि में भारी-भरकम निवेश करते हैं. वह ईपीएफ में उपलब्‍ध इस सुविधा के दुरुपयोग रोकना चाहती है. इसका असर 1 फीसदी से भी कम अंशदान पर पड़ेगा.

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने बजट से पहले एक अध्‍ययन कराया था. इसमें उसने पाया था कि वित्त वर्ष 2018-19 में करीब 1,23,000 लोगों की ईपीएफ कॉरपस 62,500 करोड़ रुपये थी. वहीं, टॉप 20 अमीर अंशधारकों के खातों में करीब 825 करोड़ रुपये थे. 100 अंशधारकों के खातों में 2,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की रकम थी. हालांकि, ईपीएफ के 6.33 करोड़ सदस्य हैं.

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Posted By : Vishwat Sen

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