चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 तक महंगा हो सकता, कंपनियां घाटे में

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Petrol Diesel Price

सांकेतिक तस्वीर (फोटो: Freepik)

Petrol Diesel Price: बीते 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा है. 27 फरवरी को जो क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह 19 मार्च को 120 डॉलर के पीक पर पहुंच गया और फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है.

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Petrol Diesel Price: विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का बोझ अब घरेलू तेल कंपनियों (OMCs) के लिए असहनीय होता जा रहा है. हालांकि वर्तमान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन यह कंपनियों के भारी घाटे की कीमत पर है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव खत्म होते ही कंपनियां कीमतों में बड़ा इजाफा कर सकती हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में 27 डॉलर का उछाल

बीते 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा है. 27 फरवरी को जो क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह 19 मार्च को 120 डॉलर के पीक पर पहुंच गया और फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की वृद्धि से भारतीय कंपनियों का घाटा करीब ₹6 प्रति लीटर बढ़ जाता है.

कंपनियों का वित्तीय बोझ और सरकारी राजस्व

कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें न बढ़ाने के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹18 और डीजल पर ₹35 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले महीने यह घाटा ₹2,400 करोड़ प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद अब ₹1,600 करोड़ प्रतिदिन पर है.

चिंताजनक बात यह है कि सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का हिस्सा, जो 2017 में 22% था, अब घटकर मात्र 8% रह गया है, जिससे सरकार के पास कीमतों को और कम करने की गुंजाइश सीमित हो गई है.

आयात पर निर्भरता और CAD का खतरा

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 45% मध्य पूर्व और 35% रूस से आता है. तेल की बढ़ती कीमतें न केवल महंगाई बढ़ाती हैं, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं. अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती है.

अमेरिका और पड़ोसियों का हाल

यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार निकल गई हैं. भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका पहले ही अपनी घरेलू कीमतों में भारी इजाफा कर चुके हैं. ऐसे में भारत में चुनाव बाद कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना काफी प्रबल नजर आ रही है.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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