महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता कुलकर्णी का कौन उठाएगा खर्च, पढ़ें रिपोर्ट

Updated at : 29 Jan 2025 10:48 PM (IST)
विज्ञापन
Mamta Kulkarni

Mamta Kulkarni

Mamta Kulkarni Expenses: ममता कुलकर्णी के किन्नर अखाड़े से जुड़ने के बाद अखाड़े की धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ी है और इसके खर्चों को संतुलित करने के लिए समाज के दान, चढ़ावा और संपत्तियों का योगदान महत्वपूर्ण है.

विज्ञापन

Mamta Kulkarni Expenses: प्रयागराज के महाकुंभ में बॉलीवुड की अभिनेत्री किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बन गई हैं. भारत में किन्नर समाज की धार्मिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित अहम संस्थाओं में से किन्नर अखाड़ा एक है. यह समुदाय अपने धार्मिक और सामाजिक अधिकारों के लिए लड़ता आ रहा है और इसकी प्रमुख भूमिका महाकुंभ जैसे आयोजनों में भी नजर आती है. लेकिन, सवाल यह पैदा होता है कि बॉलीवुड अभिनेत्री से महामंडलेश्वर का पद संभालने वाली ममता कुलकर्णी का खर्च कौन उठाएगा. आइए जानते हैं कि ममता कुलकर्णी का खर्च कौन उठाएगा.

ममता कुलकर्णी और किन्नर अखाड़े की प्रमुखता

ममता कुलकर्णी एक बॉलीवुड अभिनेत्री के तौर पर प्रसिद्ध रही हैं. उन्होंने किन्नर अखाड़े के साथ जुड़कर महामंडलेश्वर का पद संभाला. उनके इस कदम ने किन्नर समुदाय के बीच सम्मान और पहचान को नया आयाम दिया. ममता ने किन्नर समाज के अधिकारों की रक्षा और समाज में समानता की ओर कदम बढ़ाने की पहल की. इसके साथ ही उन्होंने समाज के लिए विभिन्न धार्मिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जो अखाड़े के लिए महत्वपूर्ण था.

किन्नर अखाड़े की संपत्ति का ब्योरा

किन्नर अखाड़े की संपत्ति मुख्य रूप से उनके धार्मिक आयोजनों, आश्रमों, दान और चढ़ावों से संबंधित है. हालांकि, किन्नर अखाड़ा प्रमुख अखाड़ों के मुकाबले संपत्ति के मामले में छोटा है. फिर भी, इसके पास कुछ महत्वपूर्ण संपत्ति है, जो उनके दैनिक कार्यों को संचालित करने के लिए पर्याप्त है.

  • जमीन और नकदी: किन्नर अखाड़े के पास भारत के विभिन्न स्थानों पर भूमि और धार्मिक आश्रमों की संपत्ति है. एक अनुमान के अनुसार, किन्नर अखाड़े के पास 5-7 करोड़ रुपये की संपत्ति हो सकती है, जिसमें प्रमुख जमीन, आश्रम, और धार्मिक स्थल शामिल हैं.
  • दान और चढ़ावा: किन्नर अखाड़े को हर साल 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक का दान और चढ़ावा प्राप्त होता है, जो उनके धार्मिक कार्यों और आयोजन के खर्चों के लिए प्रयोग किया जाता है. विशेष पूजा और आयोजन के दौरान यह राशि और बढ़ जाती है. विशेष अवसरों पर, जैसे महाकुंभ और अन्य धार्मिक मेले, इनकी आय में वृद्धि होती है, जो 2-3 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.
  • आश्रम और धार्मिक केंद्र: किन्नर अखाड़े के आश्रमों और धार्मिक केंद्रों का रख-रखाव और संचालन 20 लाख से 30 लाख रुपये तक का खर्च आता है. इन केंद्रों से उन्हें आय भी होती है, लेकिन खर्चों का बड़ा हिस्सा अनुदान और दान से पूरा होता है.

महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता कुलर्णी की जिम्मेदारी और खर्च

महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता कुलकर्णी जैसे व्यक्ति की जिम्मेदारी बढ़ जाती है और इस स्थिति में उनके धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए अखाड़े को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. इनमें धार्मिक आयोजनों का खर्च, समाज कल्याण कार्यक्रम, किन्नर समाज के लिए आवास और चिकित्सा सुविधा शामिल हैं. अनुमान यह भी लगाया गया है कि इस प्रकार के कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये तक का वार्षिक खर्च हो सकता है.

इसे भी पढ़ें: सरकार की इस योजना से महिलाएं भी बन सकती हैं लखपति, जानें क्या है लास्ट डेट

किन्नर अखाड़ा उठाएगा ममता कुलकर्णी का खर्च

ममता कुलकर्णी का खर्च मुख्य रूप से किन्नर समाज द्वारा किए गए दान, चढ़ावे और योगदान से उठाया जाएगा. किन्नर अखाड़े का हर साल दान और चढ़ावा मिलता है, जिससे उनके धार्मिक कार्यों और महामंडलेश्वर के खर्च को पूरा किया जाता है. यह योगदान किन्नर समाज के सदस्यों, अनुयायियों, और समाज के समर्थकों से आता है.

इसे भी पढ़ें: Tax: आपके लिए पुरानी कर व्यवस्था फायदेमंद है या न्यू टैक्स रीजीम, किसमें मिलेगी सबसे अधिक छूट

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola